खूंटी : झारखंड के नगाड़े की गूंज पहुंची समुद्र पार, अमेरिका और रुस में मचा रही धूम

NewsCode Jharkhand | 14 May, 2018 5:54 PM
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रामदयाल मुंडा ने विश्‍व में दिलाई पहचान

खूंटी। पाश्‍चात्य संगीत और डीजे के इस युग में भी प्राचीन काल से चले आ रहे वाद्य यंत्रों नगाड़ा, ढोल, रबगा, ढाक और मांदर की गूंज अब भी न सिर्फ सदियों से चली आ रही है बल्कि परंपरा को बचाने का काम कर रहे है, वहीं इन वाद्य यंत्रों की धुन आज अमेरिका और रुस तक पहुंच चुकी हैं।

पारंपरिक वाद्य यंत्रों से ही होती है खुशियों की शुरूआत

भारतीय वाद्य यंत्र का इस्तेमाल प्राचीन काल से ही होता आ रहा है और खासकर उत्तर भारत के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में इसका खूब प्रयोग होता है। इन वाद्य यंत्रों का प्रयोग शादी विवाह, पर्व त्योहार से लेकर हर उस पल में होता है जब खुशियों का इजहार करना हो। लोक संगीत या भक्ति संगीत को ताल देने में इसके साथ शहनाई का इस्तेमाल भी होता है।

एक ऐसा परिवार जो लोक संस्‍कृति को जीवित रखने में दे रहा अपना योगदान

झारखंड के खूंटी जिले के पीड़ीहातू गांव के बुदू नायक और उनके भतीजे बोध सिंह नायक का परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से नगाड़ा, ढोल, ढाक और रबगा वाद्य यंत्र बनाने का काम कर रहे हैं। इनका व्यवसाय हजारों-लाखों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे से गांव पीड़ीहातू में बने वाद्य यंत्रों का कारोबार करोड़ों में पहुंच चुका है।

खूंटी : झारखंड में बने वाद्य यंत्रों की गूंज अमेरिका और रुस तक

डॉ. रामदयाल मुंडा की मदद से झारखंड की धुन पहंची रुस और अमेरिका

जनजातीय पर्व सरहुल और अन्य पर्व त्योहार के मौके पर इनके नगाड़े और ढोल की मांग काफी बढ़ जाती है। बुदू नायक ने बताया कि जब से वे इस काम से जुड़े हैं, लगभग एक करोड़ रुपये का वाद्य यंत्र बनाकर बेच चुके है। उन्होंने बताया कि पद्मश्री और पूर्व सांसद स्व. डॉ. रामदयाल मुंडा की मदद से उनके वाद्य यंत्रों की पहुंच अमेरिका तथा रुस तक पहुंची।

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वाद्य यंत्रों को इनकी मदद से मिली पहचान

जबकि लोक कलाकार मुकुंद नायक तथा फिल्मकार मेघनाथ और बीजू टोप्पो की डॉक्यूमेंटी फिल्मों के माध्यम से इन वाद्य यंत्रों को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली समेत अन्य इलाकों में पहचान मिली।

देशभर के कलाकार खरीदारी करने आते हैं पीड़ीहातू गांव

इनके बनाये वाद्य यंत्रों की गूंज इतनी दूर तक जा पहुंची है कि देशभर के विभिन्न राज्यों के कलाकार इसकी खरीदारी करने पीड़ीहातू गांव पहुंचने लगे है। जबकि कला-संस्कृति विभाग भी यहां से ढोलक और नगाड़ा खरीद कर कलाकारों को उपलब्ध कराता है, वहीं कई जनप्रतिनिधि जिसमें मधु कोड़ा, सांसद कड़िया मुंडा, मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा समेत अन्य शामिल है।

5 से 15 हजार में बिकते है वाद्य यंत्र

पीड़ीहातु गांव में बुदू नायक और उनका परिवार तीन पीढ़ियों से इन वाद्य यंत्रों को बनाने में जुटा है। बाजार में इसकी कीमत 5 से 15 हजार रुपये तक मिल जाती है। बुदू नायक ने बताया कि 25 इंच के नगाड़े की कीमत 6 हजार, 30 इंच का 10 हजार व 32 इंच के नगाड़े की कीमत 12500 रुपये मिल जाती है। वहीं ढोल की कीमत साढ़े छह से सात हजार रुपये होती है। ऑर्डर के आधार पर ढाक, नगाड़े, रबगा व मांदर समेत अन्य वाद्य यंत्र भी परिवार 5 से 15 हजार रुपये लेकर उपलब्ध कराता है।

खूंटी : झारखंड में बने वाद्य यंत्रों की गूंज अमेरिका और रुस तक

आम-कटहल व गम्हार की लड़की से बनते है ये वाद्य यंत्र

ये वाद्य यंत्र आम, कटहल या गमहार की लकड़ी से बनता है। चाहे जतरा हो या मुरमा मेला हो या फिर अमरावाड़ी या रामरेखा हर जगह इन वाद्य यंत्रों का इस्‍तेमाल किया जाता है।

पूरा परिवार मिलकर देता है आकार

इतना ही नहीं विदेशों में भी यहां के बने ये ढोल, नगाड़ा और मांदर की मांग है। इस परिवार का हर सदस्य चाहे वो महिला, बुजुर्ग या युवा पीढ़ी हो इसे पूरी लग्न से बनाता है। युवा पीढ़ी को भी अपने पुरखों के इस कला पर नाज है और उसे वो हर हाल आगे बढ़ाने का जज्बा भी रखते हैं। प्राचीन कला का सारथी बना ये परिवार कला को सवांर तो रहा ही है इसके जरिये ये परिवार आत्मनिर्भर भी हो रहा है।

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रांची : रिटायर्ड जज एसके अग्निहोत्री आजसू में हुए शामिल, कहा- पार्टी को करेंगे मजबूत

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:22 PM
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रांची। आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो के आवास पर मिलन समारोह के मौके पर रिटायर्ड जज के साथ दूसरी अन्य पार्टी के सेकड़ों कार्यकर्ता मुखिया सहित आजसू पार्टी के विचार से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए।

इस मौके पर सुदेश महतो ने रिटायर जज के साथ कार्यकर्ताओं को माला पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। 2019 लोकसभा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए दूसरे पार्टी के कार्यकर्ता  अपनी जमीन तलाशने को लेकर आजसू पार्टी में शामिल होते नजर आ रहे हैं।

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आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा  पार्टी में शामिल हुए रिटायर्ड जज संतोष कुमार अग्निहोत्री का स्वागत करता हूँ।  आजसू पार्टी में शुभ संकेत है। पार्टी में इन्हें बड़ी जिम्मेवारी दी जाएगी। जिससे पार्टी मजबूत हो और जनता के बीच आजसू पार्टी की विचारधारा को पहुंचाया जाए। तीस सालों से न्याययिक सेवा करने के उपरांत इन्होंने समाजसेवा करने का जो फैसला लिये है। वो स्वागत योग्य है। जिनका समाज को जरूर लाभ मिलेगा।

रिटायर्ड जज संतोष कुमार अग्निहोत्री ने कहा कुछ महीनों से आजसू पार्टी को रीड कर रहा था इनकी विचारधारा को जानने की कोशिश कर रहा था जब मैं पूरी तरह से जान पाया तब मैंने  अंतिम फैसला लिया कि मैं आजसू पार्टी में रहकर समाज की सेवा करूंगा और पार्टी को मजबूत करने का काम करूंगा।

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झरिया : छेड़खानी का विरोध करने पर मारपीट, कई घायल

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:26 PM
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झरिया (धनबाद)। बहालगढ़ा में छेड़खानी का विरोध करने पर मारपीट हो गई जिससे कई लोग घायल हो गए। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार मुहल्ले में कुछ बाइक सवार युवक छेड़खानी किया। विरोध करने पर युवक घर में घुस गए और मारपीट करने लगे।

भुक्‍तभोगी ने स्‍थानीय थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

वहीं दूसरा मामला झरिया के कोयरीबांध का है जहां आपसी रंजिश में मारपीट होने से एक ऑटो ड्राईवर घायल हो गया। घायल ने मारपीट का आरोप एक स्‍थानीय दबंग वयक्ति के भाई पर लगाया है।

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रांची : तीन तलाक कानून से तीन साल सजा के प्रावधान को हटवायें केंद सरकार- आमया संगठन

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:17 PM
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रांची। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को बिना राज्यसभा से पारित कराये केन्द्रीय कैबिनेट और राष्ट्रपति के माध्यम से 20 सितंबर 2018 को अध्यादेश लाकर देश के 19 करोड़ मुसलमानों पर केन्द सरकार ने थोप दिया है। अध्यादेश में तीन तलाक को जघन्य अपराध मनाते हुए आईपीएस की धाराओं के तहत सजा देने का कानून बनाया गया है।

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कोई व्यक्ति एक साथ तीन तलाक बोलता है और उसकी पत्नी या परिवार के सदस्य पुलिस में शिकायत करते है तो तीन साल की सजा के साथ जेल हो जाएगा, जो कि असंवैधानिक है यह मामला सिविल कानून के तहत बननी चाहिए जिसमें ज्यादा से ज्यादा मुआवजा का प्रावधान रखा जाता।

वर्ष 2017 में  सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि तीन तलाक बोलने पर शादी नही टूटेगी, तो फिर किस आधार पर पति को तीन साल की जेल का प्रावधान रखा गया है पति के जेल जाने पर पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण कैसे होगा क्या पत्नी पति के खिलाफ मुकदमें लड़ेगी। अध्यादेश देखकर ऐसा लगता है कि सरकार को मुस्लिम महिलाओं के प्रति दर्द कम और वोट पाने की चाहत ज्यादा है।

केन्द्र सरकार को मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी है तो मॉब लिंचिंग में 100 से अधिक लोगों की हत्याएँ देश में  हुई है सिर्फ झारखंड में ही 27 लोग मारे गये है उनकी विधवाएं और मां बहनों को इंसाफ नही मिल रहा है और ना ही मुआवाजा मिले, अपराधी खुलेआम घुम रहे है दोषियों को अदालतों में जमानत मिल जा रही है।

सरकार के ही मंत्री फूल माला और मिठाई नौकरी देने की बात कर रहे है, इसपर सरकार मुकदर्शक बनी हुई है जबकि मॉब लिंचिंग पर 17 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने केन्द्र सरकार को कानून बनाने का आदेश दिया है साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिये है लेकिन केन्द्र सरकार ने मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने की पहल अबतक नही हुई।

हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और केन्द्र में विपक्षी दल के नेता और झारखंड के विपक्षी दल के नेता हेमंत सोरेन  से मांग करते है कि तीन तलाक़ कानून से तीन साल सजा के प्रावधान को हटवायें साथ ही धार्मिक संगठनों से मिलकर निकाहनामा फार्म में ही एक साथ तीन तलाक नही बोलने का नियम बनवाये।

यें बाते होटल केन मेन रोड रांची में आमया संगठन द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संगठन की सचिव पूर्व छात्र नेत्री नाजिया तब्बसुम ने कहीं, प्रेस कांफ्रेंस में मॉब लिंचिंग में मारे गरे अलीमुद्दीन अंसारी की विधवा मरियम खातून, नाजनीन बानों, शमा प्रवीण, रिजवाना बेगम, कमरून निशा, उबैद खातून, आलिया, रुखसार, नरगिस , गजाला, गुलफशां, फरिदा नुसरत, अमरीन सबा थी।

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