Karnataka Results: कर्नाटक में खिचड़ी जनादेश, अब गवर्नर के भरोसे बीजेपी, कांग्रेस-जेडीएस

    कुमारस्वामी से पहले राज्यपाल से मिले येदियुरप्पा, बहुमत साबित करने के लिए मांगे 48 घंटे

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। नतीजों में भाजपा राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। पार्टी के खाते में 104 सीटें आई हैं। उधर कांग्रेस पार्टी 78 सीटों पर सिमट गयी है। चुनाव की तीसरी प्रमुख पार्टी जेडी(एस) को भी 38 सीटें हासिल हुई हैं।

लेकिन बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने के लिए कांग्रेस ने नया दांव खेला और तीसरी बड़ी पार्टी जेडीएस को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। जेडीएस ने भी समर्थन स्वीकार कर लिया है और राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। दूसरी ओर बीजेपी के सीएम उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा ने भी राज्यपाल से मुलाकात की है और सरकार बनाने का दावा ठोक दिया है। उन्होंने बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल से दो दिन का समय मांगा है।

इसके बाद जेडीएस नेता कुमारस्वामी राज्यपाल से मुलाकात करने पहुंचे हैं, जेडीएस के सपोर्ट में कांग्रेस नेता सिद्धारमैया भी राजभवन पहुंचे। इससे पहले सिद्धारमैया इस्तीफा देने अपने साथी नेताओं के साथ राजभवन पहुंचे। उनके साथ दिनेश राव गुंडू, रिजवान अरशद और जी. परमेश्वर भी मौजूद रहे। कर्नाटक के सरकार में मंत्री रहे डीके शिवकुमार भी दो निर्दलीय विधायकों के साथ राज्यपाल भवन पहुंचे। कर्नाटक के सिद्धारमैया सरकार में मंत्री रहे डीके शिवकुमार भी दो निर्दलीय विधायकों के साथ राज्यपाल भवन पहुंचे।

आपको बता दें कि मंगलवार की दोपहर सिद्धारमैया के साथ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हमारी फोन पर देवगौड़ा और कुमारस्वामी के साथ बात हुई है और उन्होंने सैद्धांतिक स्तर पर सहमति जताई है। जेडी(एस) सरकार का नेतृत्व करेगी और दोनों पार्टियां एक साथ राज्यपाल से मुलाकात करेंगी।

सिद्धारमैया ने कहा कि मैं शाम को राज्यपाल को इस्तीफा सौंप देंगे और जेडीएस सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि हम जेडीएस को बाहर से समर्थन देंगे। बता दें कि सिद्धारमैया सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे डीके शिवकुमार ने मुलबगल से निर्दलीय विधायक एच. नागेश को समर्थन किया है, जिसके बाद नागेश कांग्रेस को समर्थन देने को तैयार हो गए हैं।

आजाद ने कहा कि हम सीधे तौर पर राज्यपाल से मिलने जाएंगे, अब एचडी देवगौड़ा से मिलने की जरूरत नहीं है। गवर्नर हाउस में ही दोनों पार्टियों की मुलाकात होगी। दोनों पार्टियां सेकुलर मूल्यों वाली हैं और जेडीएस कभी सांप्रदायिक बीजेपी के साथ नहीं जाना चाहेगी।

 गौरतलब है कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कर्नाटक में मौजूद गुलाम नबी आजाद से बात की थी और जनता दल (एस) के नेता कुमार स्वामी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए देवगौड़ा से बात करने को कहा था।

हालांकि, अभी कुछ और चरणों की मतगणना बाकी है, लेकिन रुझानों से लग रहा है कि भाजपा अपने बूते राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

मतगणना में जो सबसे दिलचस्प बात निकल कर सामने आयी है वो यह है कि चुनाव आयोग की ओर से जारी आकड़ों के मुताबिक अभी तक कांग्रेस पार्टी को भारतीय जनता पार्टी से ज़्यादा वोट मिले हैं। लेकिन दोनों पार्टियों के बीच 30 सीटों से ज्यादा का अंतर नजर आ रहा है।

पिछले पांच सालों से कर्नाटक की सत्ता संभाल रही कांग्रेस इस बार काफी पीछे है। रुझानों में कांग्रेस को 76 सीटें मिली हैं। साल 2013 में कांग्रेस को 122 सीटों पर जीत मिली थी और उसने अकेले बहुमत में सरकार बनाई थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं लग रहा है। वहीं एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस 42 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं अन्य को 2 सीटें मिली हैं।

बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदियुरप्पा शिकारीपुरा से चुनाव जीत गए हैं। येदियुरप्पा ने लगभग 35,000 वोटों से चुनाव में जीत दर्ज की।

                           पार्टी                नतीजे/रूझान
                          बीजेपी                    104
                          कांग्रेस                     78
                         जेडीएस                     38
                          अन्य                       2

पिछले चुनावों में क्या रही थी जेडीएस की स्थिति

कर्नाटक में जेडीएस, कांग्रेस और बीजेपी दोनों के साथ मिलकर सरकार बना चुकी है। 1999 के विधानसभा चुनाव में जेडीएस को 10 सीटें, जबकि 10.42 फीसदी वोट हासिल हुए थे। 2004 में उसे 59 सीट और 20.77 फीसदी वोट मिले। वहीं 2008 में पार्टी को 28 सीट और 18.96 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे और 2013 में 40 सीट और 20.09 फीसदी वोट हासिल हुए थे।

बीजेपी के साथ भी कर्नाटक में बनाई थी सरकार

देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी राज्य में बीजेपी के समर्थन से भी सरकार चला चुके हैं। 2004 के चुनाव के बाद कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई थी और कांग्रेस के धरम सिंह मुख्यमंत्री बने। लेकिन 2006 में जेडीएस गठबंधन सरकार से अलग हो गई। फिर बीजेपी के साथ बारी-बारी से सत्ता संभालने के समझौते के तहत कुमारस्वामी जनवरी 2006 में सीएम की कुर्सी पर बैठे।

लेकिन अगले साल सत्ता बीजेपी को सौंपने की जगह कुमारस्वामी ने अक्टूबर 2007 में राज्यपाल को इस्तीफा भेज दिया, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा। हालांकि, बाद में जेडीएस ने बीजेपी को समर्थन का ऐलान किया। इस समझौते के तहत 12 नवंबर 2007 को बी. एस. येदियुरप्पा 7 दिन के लिए सीएम बने थे। देखा जाए तो बीजेपी के साथ जेडीएस का गठजोड़ कभी मजबूत नहीं हो पाया।

कांग्रेस के करीब क्यों जेडीएस?

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस और जेडीएस के बीच बयानों के तीखे तीर भले ही चले, लेकिन दोनों दल स्वाभाविक सहयोगी नजर आते हैं। जेडीएस की स्थापना एचडी देवगौड़ा ने 1999 में जनता दल से अलग होने के बाद की थी। जनता दल की जड़ें 1977 में कांग्रेस के खिलाफ बनी जनता पार्टी से शुरू होती हैं। इसी में से कई दल और नेताओं ने बाद में जनता दल बनाई। कर्नाटक में जनता दल की कमान देवगौड़ा के हाथों में थी। उन्हीं के नेतृत्व में जनता दल ने 1994 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई और देवगौड़ा मुख्यमंत्री बने।

कांग्रेस से ही शुरू हुई थी देवगौड़ा की सियासत

दो साल के बाद 1996 में जनता दल के नेता के रूप में कांग्रेस के समर्थन से एचडी देवगौड़ा 10 महीने तक देश के प्रधानमंत्री रहे। इतिहास के पन्नों को थोड़ा और पलटें तो 1953 में देवगौड़ा ने अपनी सियासत की शुरुआत भी कांग्रेस नेता के रूप में ही की थी, लेकिन पहली बार वो निर्दलीय के तौर पर विधायक बने थे। फिर इमरजेंसी के दौरान जेपी आंदोलन से जुड़े और जनता दल में आ गए।

सत्तारूढ़ कांग्रेस राज्य की 220, भाजपा 222, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) 199 और गठबंधन की साझेदार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 18 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) 18, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) दो, स्वराज इंडिया पार्टी 11, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) 10 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। भाजपा, कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) तीनों पार्टियां ही सरकार बनाने का दावा कर रही हैं। राज्य में 12 मई को हुए विधानसभा चुनाव में करीब 72.36 प्रतिशत मतदान हुआ था।

कांग्रेस की हार पर उमर का ट्वीटनेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कर्नाटक में कांग्रेस की हार पर जूलियस सीजर का एक फ्रेज इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने ट्वीट में ‘Et tu #Karnataka’ लिखा। जिसका मतलब है, कर्नाटक तुम भी। यानी कर्नाटक में भी कांग्रेस की हार।

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