काला पर कानूनी विवाद, रजनीकांत से इस शख्स नें मांगा 101 करोड़ रूपये हर्जाना

NewsCode | 4 June, 2018 12:42 PM
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मुंबई। रजनीकांत और नाना पाटेकर की आने वाली फिल्म ‘काला’ को लेकर मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ‘काला’ के ख‍िलाफ अब कानूनी विवाद सामने आ रहा है. मुंबई के एक जर्नल‍िस्ट ने फिल्म निर्माताओं के खिलाफ मानहान‍ि की शिकायत की है। जवाहर नडार ने दावा किया है कि फिल्म में रजनीकांत जिस किरदार को निभा रहे हैं वह र‍ियल लाइफ में मेरे पिता थिराव‍ियम नडार ही हैं।

जवाहर के मुताबिक उन्होंने अभी तक फिल्म को नहीं देखा है लेकिन उन्हें लगता है कि इस फिल्म से उनके पिता काला सेठ जिन्हें लोग गुडवाला सेठ के नाम से भी जानते थे, उनकी छवी को नुकसान पहुंच सकता है। इसी बात को लेकर उन्होंने अपने वकील के जरिए मानहानि की शिकायत की। तीन पन्ने की शिकायत में उन्होंने काला के निर्माताओं से लिख‍ित माफी मांगने के साथ ही 101 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग भी की है।

साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि इस फिल्म को बनाने से पहले फिल्ममेकर ने उनसे परमिशन तक नहीं ली जबकि यह फिल्म सीधा उनके पिता के जीवन पर आधारित है।

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फिल्म बनकर तैयार है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर लॉन्च हुआ था। फिल्म की रिलीजिंग डेट 7 जून तय की गई है मगर फिल्ममेकर की राह में अब यह नई अड़चन आन खड़ी हुई है।

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सऊदी अरब में 60 साल बाद महिलाओं को मिली कार चलाने की इजाजत, मना जश्न

NewsCode | 24 June, 2018 1:21 PM
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नई दिल्ली। सऊदी अरब में आज रविवार से महिलाओं को आधिकारिक तौर पर सड़कों पर गाड़ी चलाने की अनुमति मिल गई है। इसी के साथ सऊदी अरब महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगे प्रतिबंध को हटाने वाला दुनिया का आखिरी देश बन गया है। मालूम हो कि सऊदी अरब दुनिया का अकेला देश था जहां महिलाओं को ड्राइव करने की आजादी नहीं थी।

राजधानी जेद्दा में आधी रात से ही सड़कों पर इस आजादी का जश्न देखने को मिला, जहां कई महिलाएं स्टियरिंग थामें नजर आईं और हर कुछ दूरी पर खड़े कई लोग उन्हें बधाई देते दिख रहे थे। इस देश के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि 60 से अधिक वर्षों से महिलाएं सिर्फ यात्री सीट पर ही बैठती थीं यानी खुद गाड़ी नहीं चला सकती थीं। गाड़ी चलाने पर लगा बैन हटने से खाड़ी देश में 1.51 करोड़ महिलाएं पहली बार सड़कों पर गाड़ी लेकर उतरने में सक्षम हो सकेंगी।

बता दें कि सऊदी अरब ने सितंबर 2017 में महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का ऐलान किया था। यह फैसला क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 कार्यक्रम का हिस्सा है, ताकि अर्थव्यवस्था को तेल से अलग कर सऊदी समाज को खोला जा सके। उन्होंने जून 2018 तक इस आदेश को लागू करने की बात कही थी। सऊदी के शासक सलमान के इस कदम की दुनियाभर में तारीफ हुई।

सऊदी अरब में 60 साल बाद महिलाओं को मिली कार चलाने की इजाजत, मना जश्न Ban on Women driving ends in Saudi Arabia | NewsCode - Hindi News

जेद्दाह की एक महिला हम्सा अल-सोनोसी ने कहा कि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं अपनी जिंदगी में इस दिन को देख पाउंगी। जेद्दाह महिलाओं को लाइसेंस देने वाला देश का दूसरा शहर है।

गौरतलब है कि सऊदी अरब की गिनती कट्टरपंथी देश के तौर पर होती है, जहां महिलाओं के लिए कई पाबंदियां और सख्तियां हैं। उन्हें अभी तक वो अधिकार भी नहीं मिले हैं, जो दुनिया के बाकी देशों की महिलाओं को हैं। यहां महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस का अधिकार दिलाने के लिए लंबे समय से अभियान चलाया जा रहा था। कई महिलाओं को तो नियम तोड़ने के लिए सजा तक दी गई।

कई महिलाएं ब्रिटेन, कनाडा या लेबनान जैसे देशों में जा कर अपने लिए अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया करती थीं। इनमें से कुछ ने सोमवार को एक छोटा सा ड्राइविंग टेस्ट दिया, जिसके बाद इन्हें सऊदी अरब के नए लाइसेंस दिए गए।

ड्राइविंग लाइसेंस पाने वाली पहली महिलाओं में से एक रेमा जवदात का कहना है, “सऊदी अरब में ड्राइव करने का मेरा सपना पूरा होने जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “मेरे लिए ड्राइविंग का मतलब है अपनी पसंद से कुछ करना, आजाद होना। अब हमारे पास विकल्प हैं।”

सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति

– सऊदी अरब में महिलाओं के प्रति होने वाली घरेलू हिंसा और यौन शोषण को रोकने के लिए कोई कानून नहीं है। एक स्टडी में यहां के 53 फीसदी पुरुषों ने माना था कि उन्होंने घरेलू हिंसा की है। वहीं, 32 फीसदी ने यह भी माना कि उन्होंने अपनी पत्नी को बुरी तरह चोट पहुंचाया।

– सऊदी में महिलाएं अकेले प्रॉपर्टी भी नहीं खरीद सकतीं। यहां एक महिला के तौर पर प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने के लिए दो पुरुष गवाह जरूरी हैं।

– पुरुष गवाह के बिना महिलाओं की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकती। इसके साथ ही उन दो पुरुषों की विश्वसनीयता की पुष्टि करने के लिए चार और पुरुष गवाहों की जरूरत होती है।

– सऊदी अरब में पुरुषों की तरह महिलाओं को कानूनी तौर पर बराबरी हासिल नहीं है। ऐसे कई काम जिन्हें पुरुष कर सकते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए वो काम प्रतिबंधित हैं।

– यहां महिलाएं विदेश यात्रा नहीं कर सकतीं। पसंदीदा रहने की जगह नहीं चुन सकतीं। पासपोर्ट या फिर नेशनल आईडी कार्ड के लिए अप्लाई नहीं कर सकतीं।

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रांची : सिर्फ ‘न्यूज़कोड’ पर देखिये ‘पत्थलगड़ी के अगुआ’ युसूफ पूर्ति से ख़ास बातचीत। पत्थलगड़ी के सूत्रधार युसूफ पूर्ति की नज़र से क्या है पत्थलगड़ी, क्या हैं इसके मायने ? देखिये सिर्फ और सिर्फ ‘न्यूज़कोड’ पर।

‘मन की बात’ में PM मोदी ने GST की सफलता का श्रेय राज्यों को दिया, कही ये बातें

NewsCode | 24 June, 2018 2:31 PM
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से आज एक बार फिर देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की 45वें एपिसोड में पीएम मोदी ने भारत-अफगानिस्तान के बीच हुए ऐतिहासिक टेस्ट मैच को याद किया। साथ ही उन्होंने जीएसटी को सफल बताते हुए इसका श्रेय राज्यों को दिया।

जीएसटी को सफल बताया

पीएम मोदी ने जीएसटी की पहली सालगिरह आने से पहले इसकी सफलता का श्रेय राज्यों को दिया। उन्होंने कहा कि ‘वन नेशन वन टैक्स’ देश के लोगों का सपना था, जो अब हकीकत में बदल चुका है। पीएम ने कहा कि जीएसटी की सफलता के लिए राज्यों ने मिलकर काम किया और इसे सफल बनाया। उन्होंने जीएसटी ईमानदारी की जीत करार दिया।

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‘मन की बात’ की शुरुआत में बेंगलुरु में हुए भारत-अफगानिस्तान टेस्ट मैच का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने अफगानी स्टार बॉलर राशिद खान के खेल को सराहा। साथ ही उन्होंने कहा कि यह मैच यादगार रहेगा। पीएम मोदी ने कहा, ‘मुझे यह मैच इसलिए याद रहेगा क्योंकि भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेते समय अफगानिस्तान की टीम को भी बुलाया और दोनों टीमों ने साथ में फोटो लिए।’

योग ने दुनिया को एकजुट किया

पीएम मोदी ने पूरी दुनिया में मनाए गए योग दिवस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘योग दिवस पर अलग ही नजारा था, जब पूरी दुनिया एकजुट नजर आई। विश्वभर में योग दिवस को उत्साह के साथ मनाया गया। सऊदी अरब में पहली बार ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ और मुझे बताया गया है कि बहुत सारे आसन महिलाओं ने किए। लद्दाख की ऊंची चोटियों पर भारत और चीन के सैनिकों ने एकसाथ मिलकर योगाभ्यास किया।’

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पीएम ने कहा, ‘वायुसेना के हमारे योद्धाओं ने तो बीच आसमान में धरती से 15 हजार फुट की ऊंचाई पर योगासन करके सबको स्तब्ध कर दिया। देखने वाला नजारा यह था कि उन्होंने हवा में तैरते हुए योगासन किया, न कि हवाई जहाज में बैठ कर।’

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