जामताड़ा : भाजपा राज में भूख से मर रहा किसान, जरूरतमंद लोगों का राशन कार्ड हो रहा रद्द- कांग्रेस

NewsCode Jharkhand | 21 December, 2017 9:26 AM

अनुमंडल कार्यालय के समक्ष कांग्रेस का धरना प्रदर्शन

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जामताड़ा। जन समस्याओं व आम लोगों की समस्याओं को ले बुधवार को जामताड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में अनुमंडल कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना प्रदर्शन जिला अध्यक्ष प्रभु मंडल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। प्रभु मंडल ने संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा राज में किसान भूख से मर रहा है, विधवा, विकलांग पेंशन भुगतान में विभाग सुस्त गति से कार्य कर रहा है। आधार लिंक के अभाव में जरूरतमंद लोगों का राशन कार्ड रद्द किया जा रहा है।

मनरेगा मजदूरों को नहीं मिल रहा काम

मनरेगा मजदूरों को स्थानीय क्षेत्र में काम नही मिल रहा है। इतना ही काम करने वाले मजदूरों को कम मजदूरी राशि भी दिया जा रहा है। इन सभी मांग को कांग्रेस पार्टी ने गंभीरता से लिया है। इसी निमित धरना प्रदर्शन के माध्यम से जिला प्रशासन से इस ओर पहल करने की मांग किया है।

उन्‍होंने कहा कि झारखंड में भाजपा शासन काल में राशन कार्ड के अभाव में राज्य के कोने-कोने से भूख से मौत की खबरें आ रही है। सिमडेगा की संतोषी कुमारी देवघर के रुप लाल मरांडी झरिया के बैजनाथ रविदास गढ़वा की विधवा प्रेमली कुंवर यह सारे लोग भूख से तड़प तड़प कर अपनी जान गंवा बैठे।

ऐसी सरकार जो प्रदेश के भूखे लाचार परिवार को एक वक्त की रोटी मुहैया नहीं करा सकता, वैसे सरकार को एक पल भी सरकार में रहने का अधिकार नहीं है। झारखंड के आदिवासी मूलवासी अपना घर बार जमीन-जायदाद छोड़कर अन्य राज्य पलायन कर जाय या मर जाय ताकि यह सरकार भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन कर लैंड बैंक द्वारा आदिवासी मूलवासी की उपजाऊ जमीनों को कारपोरेट घरानों के हाथों सौंप सके। लेकिन कांग्रेस यह कतई होने नहीं देगी।

भाजपा ने अच्‍छे दिन का दिखाया झूठा सपना

जिला प्रवक्ता हामिद सुमन ने कहा कि भाजपा के द्वारा अच्छे दिन के झूठे सपने दिखा कर भोली भाली जनता को बेवकूफ बनाकर सत्ता को हड़पने का काम किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ बड़े उद्योगपतियों को अच्छे दिन का सपना दिखाने का काम कर रही है। धरना-प्रदर्शन समाप्ति के बाद

10 सूत्री मांग पत्र महामहिम राज्यपाल के नाम से उपायुक्त को सौंपा

10 सूत्री मांग पत्र महामहिम राज्यपाल के नाम से उपायुक्त को सौंपा गया। कार्यक्रम में युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष विनोद क्षत्रिय, कराली चरण सर्खेल, हराधन भुई, जीवेश्वर मिश्रा, अजीत दुबे, विजय दुबे, मधुसूदन चंद्रा, अशोक नायक, बापी मंडल, राज कुमार दास, दीपक कुमार भैया, सुधीर किस्कू, हसीना बीवी, प्रमिला मुर्मू, लकोनी मुर्मू आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।

दिल्ली में 14,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘आप’ का चिपका आंदोलन

NewsCode | 24 June, 2018 7:54 PM
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध तेज हो गया है। आम लोगों के साथ अब आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ उतर आई है। आज रविवार को सरोजिनी नगर में पार्टी ने एक बड़े चिपको आंदोलन का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #DelhiChipkoAndolan लगातार ट्रेंड कर रहा है।

दिल्ली सरकार में ‘आप’ के मंत्री इमरान हुसैन ने कई विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पेड़ों से चिपककर विरोध-प्रदर्शन किया। लोग हाथ से लिखे पोस्टर के साथ पेड़ों को बचाने की अपील करने के लिए वहां पहुंचे थे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे जगह शिफ्ट करने की अपील की।

वहीं, पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “जब सारी जनता , दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार पेड़ों के बारे में इतनी चिंतित है तो केन्द्र सरकार प्रोजेक्ट बंद कर दे। अब कोई पेड़ ना काटा जाए”

बता दें कि सरोजिनी नगर में शनिवार को भी पेड़ काटने के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं ने पेड़ से चिपककर उसे बचाने की अपील की।उनका कहना था कि सुंदर नगर में पेड़ कट चुके हैं। अब सरोजिनी नगर व आरकेपुरम में इन्हें काटा जाना है। हम इसका विरोध कर रहे है। सभी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली का नारा पेड़ काटने से पूरा नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली में स्थित सात सरकारी आवसीय कॉलोनियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव बनाया था। केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पुनर्विकास प्लान को वर्ष 2016 में ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ही दक्षिणी दिल्ली में स्थित किदवई नगर में 1123, नेताजी नगर में 2294, नैरोजी नगर में 1454, मोहम्मदपुर में 363 और सरोजनी नगर में 11 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। नैरोजी में पेड़ों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। अब इन पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह जितने पेड़ काटेंगे उससे दोगुना पौधे लगाएं जाएंगे। पूरा पुनर्विकास प्लान ग्रीन प्रोजेक्ट होगा।

1973 में पहली बार हुआ था चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 1973 में हुई थी। तब ग्रामीण किसानों ने राज्य के वन ठेकेदारों द्वारा वनों और जंगलों को काटने के विरोध में चिपको आन्दोलन चलाया था। चिपको आंदोलन का सीधे-सीधे अर्थ है किसी चीज से चिपककर उसकी रक्षा करना। जब यह आंदोलन वहां पर चल रहा था, तब वनों की कटाई को रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं पेड़ों से लिपट जाती थीं और ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने देती थी। इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी।

जानिए क्या है चिपको आंदोलन, जिस पर Google ने बनाया डूडल

इस आंदोलन को चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और ग्रामीणों ने मिलकर अंजाम दिया था। बाद में प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी सुन्दरलाल बहुगुणा ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। जिस समय यह आन्दोलन चल रहा था, उस समय केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया था। इस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम बनाया।

चिपको आंदोलन आज अधिक प्रासंगिक

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धनबाद : झरिया के अस्तित्‍व को बचाने के लिए फिर होगा आंदोलन

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:48 PM
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झरिया को उजाडने की सरकारी मंसूबे को जनता कामयाब नहीं होने देगी

धनबाद (झरिया)। झरिया के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर आंदोलन होगा। इसबार आंदोलन की मुख्‍य भूमिका में पूर्व मंत्री समरेश सिंह रहेंगे। आंदोलन की रुपरेखा तैयार करने के बावत आज झरिया प्रेस क्लब में समरेश सिंह की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें पूर्व में हो चुके झरिया आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने भाग लिया।

बैठक में निर्णय लिया गया कि झरिया को बचाने के लिए यह आखिरी आंदोलन होगा। इस आंदोलन में झरिया की जनता पूरी ईमानदारी से लड़ेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बंद आर एस पी कॉलेज को उसी जगह चालू किया जाएगा जहां वह है। इसके लिए कोर्ट जाना पड़े या कहीं और लेकिन बंद कॉलेज को खुलवाया जाएगा। बैठक में भाग ले रह लोगों ने एकसुर से कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झरिया के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है जिसे यहां की जनता सफल नहीं होने देगी।

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गिरीडीह : सुरीली आवाज से जिले के साथ गांव का नाम रौशन करना चाहती है नाजिया

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:36 PM
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उदित नारायण के साथ मंच साझा कर चुकी है

गिरीडीह। अपनी सुरीली आवाज से संगीत की दुनिया में धूम मचानेवाली नाजिया परवीन अपने गृह जिले गिरीडीह व गांव का नाम रौशन कर रही है। वह इस जिले के पिहरा गांव की रहनेवाली है। मशहूर बॉलीवुड गायक उदित नारायण के साथ वह मंच साझा कर चुकी है।

हाल ही में उनकी मेरी आवाज ही मेरी पहचान है एलबम रिलीज हुई है। एलबम में वह पर्दे पर गाती नजर आती है। आवाज में तो वाकई जादू है। ईद के मौके पर अपने घर पहुंची नाजिया ने बताया कि झारखंड की नक्सली घटना पर चिलखारी एक दर्द नामक सिनेमा बन रही है जिसमें उन्‍हें उदित नारायण के साथ गाने का मौका मिला।

गिरीडीह : युवती को लेकर युवक फरार, परिजनों ने थाने में लगाई गुहार

नाजिया इससे पहले तू लौट के आजा एलबम में एक गीत को आवाज दे चुकी है। नाजिया के पिता मोहम्‍मद मोइनुद्दीन पेशे से एक किसान हैं व मां जैनब खातून आंगनबाड़ी सेविका है।

 गिरीडीह : सुरीली आवाज से जिले के साथ गांव का नाम रौशन करना चाहती है नाजिया

मैट्रिक तक की पढ़ाई कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय गावां से पूरी करने के बाद नाजिया रांची में रहकर एमए करने के साथ-साथ संगीत भी सीख रही है। कस्‍तूरबा विद्यालय में पढ़ने के दौरान नाजिया स्‍कूल में आयोजित गीत-संगीत व नृत्‍य प्रतियोगिता में भाग लेती थी और दर्शकों का वाहवाही बटोरती थी।

नाजिया का सपना अपनी आवाज के जरिये पिछडे जिले में शुमार गिरीडीह तथा अपने गांव पिहरा गावां को पहचान दिलाना है।

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