जामताड़ा : बदहाली में ईश्वरचंद्र विद्यासागर पुस्तकालय, धरोहर को सहेजने की जरूरत

NewsCode Jharkhand | 6 May, 2018 9:39 PM
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साल 1928 का ऐतिहासिक पुस्तकालय

करमाटांड़ (जामताड़ा)। पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि करमाटांड़ नंदनकानन से महज 10 किमी की दूरी पर बना है ऐतिहासिक पुस्तकालय। पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर पुस्तकालय बदहाली के बीच अपनी अहमियत खो रहा है। पुस्तकालय का भवन खंडहर में तब्दील हो रहा है। वहीं शासन-प्रशासन इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने में नाकाम साबित हुआ है। इसकी उपेक्षा से स्थानीय लोगों नाराजगी देखी जा रही है।

लोगों का कहना है कि सरकार शिक्षा ऐर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का अथक प्रयास कर रही है। परंतु नारी शिक्षा की दिशा में क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की यादों से जुड़े धरोहरों को संरक्षित करने में नाकामयाब साबित हो रही है।

भू-माफियाओं की जमीन पर नजर

पुस्तकालय के बारे में बताया गया कि प्रखंड के सीताकांटा मौजा के जमाबंदी नंबर 32/26 के खतियानी तीनकोरी घोष ने 36 डिसमिल पुस्तकालय के नाम पर भूमि दान दी थी। वर्ष 1928 में जमीन विद्यासागर पुस्तकालय के नाम की गई थी। फिलहाल कुछ
भूमाफियों की नजर इस भूमि पर पड़ी हुई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे तत्व उ जमीन की खरीद-बिक्री की साजिश में जुटे हुए हैं। जबकि भूमि व पुरूतकालय पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि का एक अभिन्न अंग है। इस धरोहर को बचाने के लिए समाज के साथ-साथ प्रशासन को भी आगे आना चाहिए।

ग्रामीणों में प्रशासन के रवैये से नाराजगी

ग्रामीण गौतम सिंह ने बताया कि पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की धरोहर के रूप में माने जाने वाले पुस्तकालय आज जीर्णोद्धार के लिए तरस रहा है। कई दशक से यहां पुस्तकालय की सुविधा ठप पड़ी है। अब इस भूमि को बचाने को लेकर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए। .. पंकज मंडल ने बताया कि 1928 से यह पुस्तकालय स्वयं पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक स्थल के रूप में है। इसका जीर्णोद्धार कर पुन इस भवन में पुस्तकालय शुरू करवाना चाहिए।

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चंदन मुखर्जी ने बताया कि पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि
नंदनकानन का जीर्णोद्धार जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि के सहयोग से किया गया है। जो काफी प्रशंसनीय कार्य है परंतु उसी का एक अंग पुस्तकालय है जो अपेक्षाओं का दंश झेल रहा है। इस ओर भी जिला प्रशासन को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

क्या कहते हैं स्थानीय विधायक व कृषि मंत्री  

कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि इस भवन का जीर्णोद्धार जल्द किया जाएगा। पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर समाज के लिए एक प्रेरणादायक महापुरुष है। उनकी हर धरोहर को बचाने के लिए वे सार्थक प्रयास करेंगे। स्थानीय लोग भी पुस्तकालय के प्रति सजग रहें।

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रांची : केरल की आफत भरी तबाही से झारखंड को सबक लेने की जरूरत

NewsCode Jharkhand | 21 August, 2018 2:53 PM
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देवेंद्र गौतम, स्वतंत्र पत्रकार

रांची। प्रकृति की विनाशलीला धीरे-धीरे रौद्र रूप धारण करती जा रही है। केरल में बाढ़ की तबाही ने खंड प्रलय का दृश्य उत्पन्न कर दिया है। यह प्राकृतिक आपदा और राष्ट्रीय शोक का समय है। साथ ही सबक सीखने का अवसर भी। अगर इसके कारणों की पड़ताल कर उनका निराकरण नहीं किया गया तो आनेवाले समय में इस आपदा विस्तार के साथ-साथ और भी विकराल रूप उत्पन्न हो सकता है।

घुमाईये तबाही पर एक नज़र

फिलहाल औसत से 37 फीसदी अधिक बारिश के पानी के साथ केरल की 41 नदियों और 80 बांधों का पानी 13 जिलों को अपने आगोश में ले चुका है। 300 से अधिक लोग काल-कवलित और 3 लाख से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। 2000 से अधिक अस्थाई राहत शिविरों में लोगों को शरण लेनी पड़ी है। बिजली आपूर्ति, संचार व्यवस्था, सड़क परिवहन, रेल सेवा बाधित है। एयरोड्राम डूबे हुए हैं। हवाई सेवा भी अवरुद्ध है। हजारों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 40 हजार हेक्टेयर में लगी फसलें नष्ट हो चुकी हैं। 134 पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हैं।

रांची : केरल की आफत भरी तबाही से झारखंड को सबक लेने की जरूरत

90 हजार किलोमीटर सड़कें बर्बाद हो चुकी हैं। अभी तक 21 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। न सिर्फ भारत के तमाम राज्य बल्कि पूरा विश्व चिंतित है। पिछले एक सौ साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। आर्थिक मदद तथा राहत कार्य में योगदान के लिए कई राज्य सरकारें और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देश आगे आए हैं।

यमराज का दूसरा नाम है ठनका

इस वर्ष का मॉनसून केरल ही नहीं देश के कई हिस्सों के लिए भारी पड़ा है। झारखंड, बिहार समेत अन्य राज्यों में ठनके की चपेट में आकर सैकड़ों लोग अपनी जान गवां चुके हैं व हजारों लोग ज़ख्मी हो चुके हैं। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मॉनसून देश के विभिन्न हिस्सों में 930 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। मॉनसून में ऐसी घटनाएं पहले भी होती थीं लेकिन प्रकोप का आकार और नुकसान की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है। हम विकास में तेजी लाने के चक्कर में विनाश को निमंत्रण देते जा रहे हैं।

प्रकृति के साथ छेड़छाड़ है कारण

केरल में इस स्थिति के उत्पन्न होने के कई तात्कालिक और पूर्ववर्ती कारण बताए जा रहे हैं। भूतकाल में प्रकृति के साथ निरंतर की गई छेड़छाड़ और वर्तमान की लापरवाही इस तबाही की मूल बताई जा रही है। इस वर्ष केरल में औसत से 37 फीसदी अधिक बारिश हुई है और मौसम विभाग ने अभी और बारिश होने की भविष्यवाणी की है।

क्या कहते हैं पर्यावरणविद् ?

पर्यावरणविदों का मानना है कि वनों की बेतहासा कटाई और पर्वत श्रृंखलाओं की बर्बादी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। एक तो बारिश ज्यादा हुई दूसरे तमिलनाडु समेत पड़ोसी राज्यों और स्वयं केरल के बांधों का पानी छोड़ दिया गया है। तबाही को कुछ कम किया जा सकता था यदि जलाशयों की क्षमता से अधिक होने पर पहले ही उनका पानी छोड़ दिया गया होता, वह समुद्र में जाकर जगह ले लेते। बांधों के कपाट भी ऐन उसी समय खोले गए

जब सारी नदियां उफनती हुई आबादी बहुल इलाकों की ओर बढ़ने लगीं।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीरता नहीं

पर्यावरण वैज्ञानिक बहुत पहले से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से हम बाज नहीं आ रहे हैं। लेकिन पर्यावरण संरक्षण को हम गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उसे एक फैशन के तहत लिया जा रहा है। सरकारी स्तर पर भी और नागरिक जीवन के स्तर पर भी। हम अपनी तबाही को स्वयं निमंत्रण दे रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि तबाही उन जिलों में आई है जिन्

हें पश्चिमी घाट के इकोलॉजिकल सेंसिटिव जोन के अंतर्गत चिन्हित किया जा चुका है।

राहत कार्यों में सरकार के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाएं भी सजग

निश्चित रूप से आपदा के उपस्थित होने के बाद हमारी नींद टूटी है। राहत कार्य में तेजी लाने के प्रति सरकार के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाएं भी सजग हो चुकी हैं। भारतीय सेना की तीनों शाखाओं के अलावा केंद्र और राज्य सरकार की तमाम एजेंसियां स्थिति से निपटने में लगाई जा चुकी हैं। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के निर्देश पर नौसेना और तटरक्षक बलों की 400 नौकाएं राहत कार्य में लगी हुई हैं। वायुसेना के दक्षिणी कमांड ने बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए 22 हेलीकॉप्टर और 6 छोटे विमान लगाए हैं। भारतीय सेना के कई अभियंताओं के साथ 700 से अधिक जवान बचाव कार्य में तैनात हैं। नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स दो दर्जन से अधिक टीमें तैनात हैं। स्वास्थ्य

रांची : केरल की आफत भरी तबाही से झारखंड को सबक लेने की जरूरत

आपदा विंग बाढ़ खत्म होने के बाद संभावित रोगों के प्रकोप से निपटने की भी तैयारी में जुटा है।

बाढ़ पीड़ितों की ‘राहत’ मौत के बाद क्यो ?

झारखंड सरकार ने 5 करोड़, महाराष्ट्र 20 करोड़ और बिहार, गुजरात, दिल्ली पंजाब, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों ने 10-10 करोड़ की सहायता की घोषणा की है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने 500 करोड़ की वित्तीय सहायता के अलावा मृतकों के परिजनों को 3 लाख और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार की तत्काल मदद की घोषणा की है। गृह मंत्रालय भी 100 करोड़ की मदद दे रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के प राष्ट्रपति ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एक कमेटी का गठन किया है।

तबाही के पहले होना होगा तैयार

यह तत्परता, यह चौकसी, यह सेवा भाव सराहनीय है लेकिन यही भाव तबाही आने के पहले दिखाया गया होता तो इसका स्वरूप इतना विकराल नहीं होता। हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं में तेजी आई है। मौसमों का चक्र असंतुलित होता जा रहा है। कभी आंधी-तूफान का प्रकोप होता है तो कहीं बाढ़ कहीं सूखे की त्रासदी। इन सबके मूल में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का अभाव है।

समस्या सिर्फ भारत की नहीं वैश्विक है। वैश्विक स्तर पर सकी पड़ताल भी की जाती रही है। पहलकदमियां भी ली जाती रही हैं लेकिन कुल मामला बड़े-बड़े सेमिनारों का आयोजन कर विचार-विमर्श तक सीमित रह जाता है। ऐसे अवसरों पर बड़े-बड़े संकल्प लिए जाते हैं। फिर मामला जहां का तहां रह जाता है।

जागरुकता बढ़ी पर नियंत्रण नहीं

विकसित देश विकासशील देशों पर पर्यावरण संरक्षण के लिए दबाव डालते हैं तो विकासशील देश विकसित देशों को कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण विनाश के लिए दोषी मानते हैं। पहले की तुलना में जागरुकता बढ़ी जरूर है लेकिन इसपर नियंत्रण पाने के लिए जितनी आवश्यकता है उतनी नहीं। केरल की तबाही से यदि सबक नहीं लिया गया और से रोकने के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए तो आनेवाले समय में हमें इससे भी बड़ी आपदाओं का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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धनवार : अवैध बालू लदे 4 ट्रैक्टर जब्त, वसूले गए फाइन

NewsCode Jharkhand | 21 August, 2018 7:41 PM
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धनवार(गिरिडीह)। अवैध बालू के हो रहे कारोबार पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए चार बालू लदे ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया। धनवार सीओ शशिकांत सिंकर एवं थाना प्रभारी कमलेश प्रसाद सिंह ने संयुक्त रूप से प्रखंड के सपामारण स्थित पहाड़पुर के बरसिंघी कला घाट में छापेमारी की थी।

अचानक हुई इस कार्रवाई से धंधेबाजों में हड़कंप मच गया। इस बाबत सीओ ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई कर ट्रैक्टरों को जब्त किया गया है, वहीं प्रावधान के तहत जुर्माना लेकर दंडाधिकारी के मौजूदगी में जब्त ट्रैक्टरों को छोड़ दिया गया है।

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