मजदूर दिवस : डिजिटल इंडिया में कहाँ ठहरते हैं मजदूर ?

NewsCode | 1 May, 2018 11:37 AM
newscode-image

ई-प्रथा और डिजिटल युग ने श्रमिकों की जरूरत को खत्म कर दिया है। श्रमिकों के हिस्से थोड़ा-बहुत काम आता भी है, तो उसका उन्हें पूरा पारिश्रमिक नहीं मिल पाता। इसलिए ज्यादा मेहनताना मांगना खुद में बेईमानी सा लगता है। इसलिए हिंदुस्तान की तरक्की सिक्के के दो पहलू की तरह हो गई। खुशहाल और बदहाल। दोनों की ताजा तस्वीरें हमारे समक्ष हैं। एक वह जो ऊपरी और काफी चमकीली है। इस लिहाज से देखें तो पहले के मुकाबले देश की शक्ल-व-सूरत काफी बदल चुकी है। अर्थव्यवस्था अपने पूरे शबाब पर है और कहने को तो उच्च मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग सभी खुशहाल हैं, लेकिन तरक्की की दूसरी तस्वीर भारतीय श्रमिकों और किसानों की, जिनकी बदहाली कहानी हमारे सामने है।

जी-तोड़ मेहनत करने के बावजूद श्रमिकों को गुजर-बसर करने लायक पारिश्रमिक तक नहीं मिल पाता। श्रम दिवस के मौके पर श्रमिकों के लिए कई सरकारी आयोजन किए जाते हैं। इनकी बदहाली को दूर करने के लिए नेता-नौकरशाह सभी लंबे-लंबे भाषण देते हैं, साथ ही तमाम कागजी योजनाओं का श्रीगणेश भी करते हैं, लेकिन महीने की दूसरी तारीख यानी दो मई के बाद में सब भुला दिए जाते हैं।

मजदूर दिवस का महत्व नहीं जानते मजदूर, कंपनी करती है शोषण

हुकूमतें जानती हैं कि मजदूर अपने अधिकारों से देश के आजाद होने के बाद से ही वंचित है। देखिए, कामगार तबका दशकों से पूरी तरह से हाशिए पर है। अगर कुछ बड़े मेट्रो शहरों की बात न करके छोटे कस्बों एवं गांव-देहातों की बात करें तो वहां पर अपना जीवन व्यतीत कर रहे मजदूर एवं किसान महज सौ-डेढ़ सौ रुपये ही प्रतिदिन कमा पाते हैं, वह भी दस घंटों की हाड़तोड़ मेहनत मशक्कत के बाद।

उस पर तुर्रा यह कि इस बात कि कोई गारंटी नहीं दी जा सकती कि उन्हें रोज ही काम मिल जाए। इतने पैसे में वह अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी भी बमुश्किल से ही जुटा पाता है। भारत की यह तस्वीर यहां के बाशिंदे तो देख रहे हैं, लेकिन विदेशों में सिर्फ हमारी चमकीली अर्थव्यवस्था का ही डंका है।

मजदूर दिवस : हम तो रोज कमाने-खाने वाले, काम नहीं मिलने पर रोटी पर आफत

मजदूरों की हालत बहुत ही दयनीय है, सियासी लोगों के लिए वह सिर्फ और सिर्फ चुनाव के समय काम आने वाला एक मतदाता है। पांच साल बाद उनका अंगूठा या ईवीएम मशीन पर बटन दबाने का काम आने वाला वस्तु मात्र है।

पिछली कांग्रेस सरकार ने श्रमिकों के लिए एक योजना बनाई थी, जिसमें मजदूरों के हित में कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने का मसौदा तैयार किया था। मसलन, दैनिक मजदूरी, स्वास्थ्य, बीमा, बेघरों को घर देना। यह बात फरवरी सन् 2010 की है। लेकिन योजना हर बार की तरह कागजी साबित हुई।

सबसे बड़ी बात यह कि श्रमिकों के हितों के लिए ईमानदारी से लड़ने वाला कोई नहीं है। पूर्व में जिन लोगों ने मजदूरों के नाम पर प्रतिनिधित्व करने का दम भरा जब उनका उल्लू सीधा हो गया। वह भी सियासत का हिस्सा हो गए। उन्होंने भी मजदूरों के सपनों को बीच राह में भटकने के लिए छोड़ दिया। लेकिन केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार श्रमिकों के लिए संजीदा से काम करती दिख रही है। मजदूरों के उद्धार के लिए बनाए गए लक्ष्य को हासिल करने में किसी तरह की कोताही नहीं होने देंगे की बात कही जा रही है।

श्रमिकों की बदहाली से भारत ही आहत नहीं है, बल्कि दूसरे मुल्क भी परेशान हैं। भूख से होने वाली मौतों की समस्या पूरे संसार के लिए बदनामी जैसी है। झारखंड में एक बच्ची बिना भोजन के दम तोड़ देती है।

मजदूर दिवस विशेष : 151 साल पहले मजदूरों को 14 घंटे करना पड़ता था काम

सवाल उठता है कि जब जनमानस को हम भर पेट खाना तक मुहैया नहीं करा सकते, तो किस बात की हम तरक्की कर रहे हैं। भारत में ही नहीं, दुनिया के कई देशों में यह समस्या काफी विकराल रूप में देखी जा रही है।

आकंड़ों के मुताबिक, सिर्फ हिंदुस्तान में रोज 38 करोड़ लोग भूखे पेट सोते हैं। ओड़िशा एवं पश्चिम बंगाल में तो भूख के मारे किसान एवं मजदूर दम तोड़ रहे हैं। यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। तमाम तरह के प्रयासों के बावजूद आजतक इस दिशा में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, तमिलनाडु एवं अन्य छोटे प्रांतों के कुछ छोटे-बड़े क्षेत्र इस समस्या से प्रभावित होते रहे हैं।

यह वह इलाका है, जहां समाज के पिछड़ेपन के शिकार लोगों का भूख से मौत का मुख्य कारण गरीबी है। इसके विपरीत देश के कई प्रांतों में लोग भूख के बजाय कर्ज और उसकी अदायगी के भय से आत्महत्या कर रहे हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि गरीबी के कारण भूख से मरने वाले आमतौर पर गरीब किसान और आदिवासी हैं।

श्रमिकों की दशा सुधरे, इसके लिए हमारे पास संसाधनों की कमी नहीं है, मगर इसका कुप्रबंधन ही समस्या का बुनियादी कारण है। इसी कुप्रबंधन का नतीजा है कि ग्रामीण श्रमिक लगातार शहरों की ओर भागने को विवश हो रही है। गांवों से शहरों की ओर पलायन कर रही आबादी पर अगर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि इनमें गरीब नौजवानों से लेकर संपन्न किसान और पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स तक शामिल हैं।

कतार में खड़े अंतिम आदमी की बात तो हर नेता करता है, लेकिन उसकी बात केवल भाषण तक ही सीमित रह जाती है। उस अंतिम आदमी तक संसाधन पहुंचाने के दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन पहुंचाने की ताकत किसी में नहीं है। शायद यही कारण है कि गांवों में स्कूल तो हैं लेकिन तालीम नदारद है, अस्पताल तो हैं लेकिन डॉक्टर व दवाइयां नहीं हैं। दूरवर्ती गांवों तक पहुंचने को सड़कें हैं, लेकिन वाहन नहीं। प्रशासन है लेकिन अराजक तत्वों का उस पर इतना दबदबा है कि प्रशासन उनके आगे लुंजपुंज हो जाता है।

(लेखक रमेश ठाकुर स्वतंत्र पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

आईएएनएस

चास : विद्यालय में कमरों के निर्माण को लेकर मंत्री से मिलेंगे अविभावक

NewsCode Jharkhand | 22 July, 2018 10:27 AM
newscode-image

चास(बोकारो)। बीबी महतो उच्च विद्यालय कुरा भण्ड्रो में शनिवार को अभिभावक शिक्षक एवं छात्र छात्राओं की एक बैठक की गई। बैठक की अध्यक्षता पंचायत के मुखिया युधिष्ठिर महतो ने की जबकि संचालन प्राचार्य  युधिष्ठिर महतो  ने किया।

बैठक संचालन के पूर्व प्राचार्य श्री महतो ने सभी अभिभावक से आग्रह करते हुए कहा कि बिना वजह के बच्चों को घर पर ना रखकर प्रतिदिन  स्कूल भेजने का प्रयास करें । ताकि बच्चों की उपस्थिति 90% हो सके  साथ ही उन्होंने मिजिल्स रूबेला टीकाकरण संबंधित जानकारी दी।

बेरमो : दुधमुंही बच्ची के साथ महिला लापता, पुलिस कर रही मामले की जांच

प्रसिंपल द्वारा बच्चों को  सुविधा के लिए  दस  कमरे वाले  भवन  के बारे में  अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों से बात की। अभिभावकों के समक्ष रखी बातों को लेकर सभी अभिभावकों ने ध्वनिमत से एक स्वर में कहा कि इस संबंध में मंत्री अमर कुमार बाउरी से विद्यालय के एक 10 कमरे का नया भवन निर्माण के लिए सब मिलेंगे।

बोकारो : ट्रेन से गिरकर आर्मी जवान की हुई मौत

 समाजसेवी अशोक महतो को अभिभावकों ने इस संबंध में मंत्री अमर कुमार बाउरी से कहने को कहा। मौके पर भण्ड्रो  मुखिया सुनीला देवी,  देवेंद्र चंद्र महतो, हुबलाल महतो,  लालबाबू दास,  राज नारायण चौबे, माधव चंद्र महतो,  चंद्र भूषण पंडित,  जोहर लाल बाउरी, पूर्णिमा कुमारी, प्रधान सहायक मिथिलेश कुमार महतो,  राजकुमार महतो,  उमेश महतो शहीद काफी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।

(अन्य झारखंड समाचार के लिए न्यूज़कोड मोबाइल ऐप डाउनलोड करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं

 

sun

320C

Clear

क?रिकेट

Jara Hatke

Read Also

धनबाद : उपायुक्त ने किया फुटवेयर उत्पादक समूह के प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्धघाटन

NewsCode Jharkhand | 22 July, 2018 10:04 AM
newscode-image

धनबाद। धनबाद उपायुक्त के द्वारा गोविंदपुर के जंगलपुर ग्राम संसद भवन में फुटवेयर उत्पादक महिला स्वयं सहायता समूह को दिए जाने वाले 60 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।उक्त प्रशिक्षण जिला प्रशासन की ओर से दिया जा रहा है़।

जिसमें जिला ग्रामीण विकास अभिकरण तथा झारखंड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी द्वारा प्रशिक्षण करवाया जाएगा। तकनिकी सहयोग प्रेम फुटवियर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दिया जा रहा है। इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि यह प्रशिक्षण महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास के साथ उनको आत्मबल भी मिलेगा।

धनबाद : सगे भाई-बहन ने किया रक्‍तदान, पेश की मिसाल  

 

उद्घाटन समारोह में उप विकास आयुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी गोविंदपुर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक झारखंड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, तथा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित रही।

(अन्य झारखंड समाचार के लिए न्यूज़कोड मोबाइल ऐप डाउनलोड करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं

जमशेदपुर : फुटपाथ दुकानदार को स्थान आवंटित कराने की मांग

NewsCode Jharkhand | 22 July, 2018 9:27 AM
newscode-image

जमशेदपुर।  पूर्वी सिंहभूम जिले में चलाए गए अतिक्रमण मुक्त अभियान के तहत बीते दिन भारतीय जनता पार्टी की एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मुलाकात की। जिसमें बहरागोड़ा बाजार से हटाए गए फुटपाथ दुकानदारों को स्थान आवंटित करने की मांग को लेकर चर्चा हुई।

वहीं इन लोगों ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से सम्बंधित एक मांग पत्र पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी ने उपायुक्त को सौंपा। उधर उपायुक्त ने उन्हें यथा सम्भव यथोचित कार्रवायी करने का आश्वासन दिया।

(अन्य झारखंड समाचार के लिए न्यूज़कोड मोबाइल ऐप डाउनलोड करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं

More Story

more-story-image

पाकुड़ : डूमरघाटी में सड़क दुर्घटना, एक की मौत

more-story-image

जमशेदपुर : नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों के बीच ग्राम...