रेलवे ने काट दिया एक हजार साल आगे का टिकट, शख्स ने ऐसे सिखाया सबक

NewsCode | 15 June, 2018 3:29 PM
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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे की एक बार फिर किरकिरी हुई है। एक टिकट काटने में हुई छोटी-से गलती रेलवे को भारी पड़ गयी है। दरअसल, यह मामला 5 साल पहले का है जब रेलवे ने आरक्षण काउंटर से एक यात्री को एक हजार साल आगे का टिकट काटकर थमा दिया। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के इस व्यक्ति की नवंबर 2013 की टिकट में नवंबर 3013 छप गया, जिसके चलते बीच रास्ते में ही टीटीई ने यात्री को उतार दिया और जुर्माना लगाने की बात कहते हुए टिकट को ही फर्जी बता दिया। टीटीई के दुर्व्यवहार से आहत यात्री ने रेलवे को सबक सिखाने की ठानी और उपभोक्ता फोरम में रेलवे को चुनौती दे डाली।

पांच साल संघर्ष के बाद अब उपभोक्ता अदालत के फैसले में रेलवे को मुंह की खानी पड़ी है। उपभोक्ता फोरम ने रेलवे के खिलाफ अपना फैसला सुनाते हुए यात्री को ब्याज सहित टिकट के पैसे लौटाने, 10 हजार रुपये बतौर मानसिक क्षति और 3 हजार रुपये वाद-व्यय देने के आदेश दिए हैं।

जानें पूरी कहानी

हुआ यूँ कि सहारनपुर के प्रद्युम्ननगर निवासी 73 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर डा. विष्णु कांत शुक्ला ने सहारनपुर से जौनपुर के लिए हिमगिरी एक्सप्रेस में 19 नवंबर 2013 को एसी थ्री-टियर का रिजर्वेशन कराया था। यात्रा के दौरान लक्सर में चेकिंग स्टाफ ने टिकट जांचा और टिकट पर 19 नवंबर 3013 देखकर टिकट को गलत बताया और मुरादाबाद में प्रोफेसर को नीचे उतार दिया। प्रोफेसर ने रेलवे को शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस पर उत्तर रेलवे जीएम, डीआरएम अंबाला व स्टेशन अधीक्षक को पार्टी बनाते हुए पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली।

फर्जी टिकट बताता रहा रेलवे

उपभोक्ता फोरम में रेलवे ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित टिकटत रेलवे से जारी नहीं हुआ है और किसी एजेंट ने फर्जी टिकट दे दिया होगा। रेलवे ने कहा कि रिजर्वेशन चार्ट में भी यात्री का नाम नहीं था। प्रोफेसर ने कहा कि उसने रिजर्वेशन विंडो से ही टिकट लिया था और फार्म सही भरा था, यह रेलवे की त्रुटि है। वैसे भी 2013 के रिजर्वेशन चार्ट में 3013 के टिकट का नाम कैसे आता। इस पर रेलवे ने दलील दी कि यात्री को काउंटर पर टिकट जांच लेना चाहिए थी। यह बात काउंटर पर लिखी होती है और रिजर्वेशन फार्म में भी ऐसे दिशा-निर्देश लिखे होते हैं। इसलिए यात्री को हुई परेशानी के लिए वह स्वयं जिम्मेवार है।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम अध्यक्ष लुकमानुल हक व सदस्य डा. सनत कौशिक की पीठ ने मामले की सुनवाई में माना कि किसी वरिष्ठ नागरिक को लंबी यात्रा में बीच में ही उतार दिया जाना शारीरिक व मानसिक परेशानी का कारक है। इसके बावजूद तथ्यों के लिए पीठ ने रेलवे से प्रोफेसर द्वारा रिजर्वेशन के लिए भरा गया फार्म मांगा, जो रेलवे द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया।

इसपर पीठ ने कहा कि यात्री ने काउंटर पर टिकट की जांच नहीं की, केवल इस आधार पर रेलवे अपने उत्तरदायित्व से नहीं बच सकता है। रेलवे की गलती के कारण वरिष्ठ नागरिक को शारीरिक और मानसिक कष्ट उठाना पड़ा, जो रेलवे की सेवा में कमी है। इस पर फोरम ने रेलवे को टिकट के पैसे ब्याज सहित लौटाने के साथ 10 हजार रुपये मानसिक कष्ट व 3 हजार रुपये बतौर वाद खर्च बतौर हर्जाना देने के आदेश दिए है।

‘रेलवे से जीती जंग, मिला सुकून’

महानगर के जेवी जैन डिग्री कालेज से हिन्दी विभागाध्यक्ष के पद से रिटायर्ड डा. विष्णुकांत शुक्ला ने कहा कि 19 नवंबर 2013 को उन्हें अचानक जौनपुर जाना पड़ा था। उनके साथी डा. कंचन सिंह की पत्नी का देहांत हो गया था, जिसमें जाने के लिए उन्होंने ट्रेन पकड़ी थी, लेकिन रेलवे की गलती पर टीटीई ने उन्हें अपमानित किया और उन्हें बीच रास्ते में मुरादाबाद में ही उतार दिया। उनसे आठ सौ रुपये मांगे तथा रेलवे के दूसरे स्टॉफ ने भी जौनपुर तक ले जाने के लिए 15 सौ रुपये मांगे थे। उन्हें खुशी है कि यह पैसा उन्होंने नहीं दिया और अपने अपमान का बदला लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः जीत हासिल की। इससे उन्हें सुकून मिला है।

ट्रेन में ज्यादा सामान लेकर सफर करने की आदत है तो इसे बदल डालिए, रेलवे ने बदला ये नियम

बाघमारा : जीएम ने डीसी रेल लाइन का किया निरीक्षण

NewsCode Jharkhand | 21 July, 2018 6:03 PM
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बाघमारा (धनबाद)। हाजीपुर जोन के जीएम केएन त्रिवेदी ने शनिवार को डीसी रेल लाइन का निरीक्षण किया। जीएम ने इस संबंध में पत्रकारों से कहा कि खान सुरक्षा महानिदेशक के रिपोर्ट के आधार पर 15 जून 2017 से इस रेल खण्ड पर गाडि़यों का परिचालन बंद है। महानिदेशक ने  इस रेल रूट को असुरक्षित करार दिया था, उसके बाद से ट्रेनें नहीं चल रही है।

उन्‍होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान रेलवे रूट की एक-एक इंच को जांचा गया। रेलवे के वरीय अ‍धिकारियों को जांच रिपोर्ट भेजा जाएगा जिसका वे लोग अध्‍ययन करेंगे। वरीय अधिकारीगण रिपोर्ट का अध्‍ययन करने के बाद जैसा बताएंगे वैसा किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान बीसीसीएल सीएमडी एके सिंह भी जीएम के साथ में थे।

धनबाद : रैयतों को मुआवजा दिये बगैर, जबरन बनाई जा रही बरवाअड्डा-टुंडी रोड

वहीं कतरास से धनबाद डीसी रेल लाइन बन्दी के खिलाफ अब लोगों का गुस्‍सा फूट पड़ा है। रेल लाइन बंद होने से से नाराज लोगों ने शुक्रवार को कतरास बाजार बंद कर दिया था। बंद का आह्वान कतरास विचार मंच ने किया था। बंद का समर्थन सभी विपक्षी दलों ने किया था।

बताते चलें कि बीती रात मंच के संस्थापक नितेश ठक्कर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कयास ये लगाया जा रहा है कि जीएम के दौरे को देखते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया क्योंकि मंच के सदस्यगण जीएम और सीएमडी  को काला झण्डा दिखाने वाले थे। उन्हें हिरासत में लिए जाने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

उल्लेखनीय है कि कतरास विकास मंच रेलबन्दी का विरोध साल भर से लगातार करता आ रहा है।  इस रेल रुट को बंद होने से धनबाद के लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

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राफेल पर राहुल ने मोदी को घेरा, कहा- विमान सौदे से आ रही है घोटाले की बू

NewsCode | 23 July, 2018 12:58 AM
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नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से राफेल डील को लेकर पीएम मोदी और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को घेरा है। कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि इस डील को लेकर पर्दे के पीछे कुछ खेल जरूर हुआ है, और उसे दबाने के लिए रक्षामंत्री किसी के दबाव में काम कर रही हैं।

दरअसल, रविवार को राफेल डील को लेकर राहुल ने ट्वीट के जरिये पीएम मोदी पर निशाना साधा, उन्होंने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपने भाषण में कही बात दोहराई। राहुल की मानें तो रक्षामंत्री किसी के दबाव राफेल डील को लेकर सही बातें नहीं रख पा रही हैं। जबकि पीएम मोदी को लेकर ट्वीट में लिखा है कि उनकी संसद में मुस्कुराहट के पीछे एक घबराहट नजर आई, इसलिए वो मेरी तरफ नहीं देख पा रहे थे। निश्चित तौर पर राफेल सौदे में अब घोटाले का शक गहराता जा रहा है। राफेल का दाम पूछने पर पीएम असहज हो जाते हैं।

राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस

वहीं भारतीय जनता पार्टी राफेल डील पर राहुल के दिए बयान को लेकर पलटवार की तैयारी में है। बीजेपी के चार सांसदों ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। नोटिस में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ ‘गलत’ आरोप लगाकर संसद को गुमराह किया। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे, अनुराग ठाकुर, दुष्यंत सिंह और प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस दिया है।

बता दें कि संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा था कि सदन के नियमों के अनुसार किसी सदस्य के खिलाफ आरोप लगाने से पहले गांधी को नोटिस देना चाहिए था, उन्हें लोकसभा अध्यक्ष को आरोपों के समर्थन में सामग्री सौंपनी चाहिए थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि सीतारमण ने यह कहकर देश को गुमराह किया कि फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदा मामले में भारत गोपनीयता शर्तों से बंधा हुआ है।

संसद में राहुल ने उठाया था राफेल का मुद्दा

गौरतलब है कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर राफेल सौदे के ब्यौरे साझा करने के मुद्दे पर देश से ‘‘झूठ’’ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कथित भ्रष्टाचार के मामलों में ‘‘भागीदार’’ हैं, ‘‘चौकीदार’’ नहीं। लोकसभा में राजग सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान राहुल ने अपने भाषण में कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक बैठक के दौरान उनसे साफ साफ कहा था कि 58,000 करोड़ रुपये के राफेल लड़ाकू विमान से संबंधित ब्यौरे साझा करने में कोई दिक्कत नहीं है।

राहुल गांधी की टिप्पणी के कुछ ही घंटे बाद फ्रांस के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारत के साथ 2008 में किया गया सुरक्षा समझौता गोपनीय है और दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों की संचालन क्षमताओं के संबंध में इस गोपनीयता की रक्षा करना कानूनी रूप से बाध्यकारी है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि क्या समझौते के प्रावधान भारत सरकार को राफेल सौदे से जुड़े कीमत के ब्यौरे का खुलासा करने से रोकते हैं।

कांग्रेस राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाती रही है और उपकरण एवं हथियारों की कीमत सहित उससे जुड़े ब्यौरे मांगती रही है लेकिन सरकार फ्रांस के साथ गोपनीय समझौते का हवाला देते हुए ब्यौरे साझा करने से इनकार करती रही है।

राहुल ने कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार पर करारा हमला करते हुए मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘मैं उन्हें मुस्कुराते देख सकता हूं, घबराहट की झलक है। वह दूर देख रहे हैं, मेरी आंखों में नहीं देख रहे।’ राहुल की इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष से विरोध तेज हो गया जिसके बाद विपक्षी सदस्यों ने अपनी सीट से खड़े होकर उनका सामना किया।

आपको याद दिला दें कि राहुल संसद में कहा था कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण प्रधानमंत्री के दबाव में देश से झूठ बोल रही हैं। उन्होंने कहा कि किसकी मदद की जा रही है, क्यों की जा रही है, निर्मलाजी, प्रधानमंत्री देश को बताएं।

हालांकि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस आरोप को पूरी तरह गलत करार दिया कि राफेल विमान सौदे के संदर्भ में फ्रांस और भारत के बीच गोपनीयता का कोई समझौता नहीं हुआ है। सीतारमण ने कहा कि लड़ाकू विमान खरीदने के लिए भारत और फ्रांस के बीच 2008 में समझौता हुआ था।

संसद में पीएम मोदी की जीत, विपक्ष के समर्थन में पड़े 126 वोट जबकि विरोध में 325 वोट पड़े

गाजियाबाद में धराशायी हुई पांच मंजिला इमारत, योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश

NewsCode | 22 July, 2018 11:02 PM
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गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में रविवार को 5 मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह गई है। इसमें एक व्यक्ति की हताहत होने की खबर है जबकि सात लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इमारत के मलबे में कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है। बताया जा रहा है कि जिस इलाके में यह बिल्डिंग गिरी है, वह पूरी तरह से अवैध रूप से बसाई गई है।

खबरों के मुताबिक प्रसन्नजीत गौतम नाम के शख्स की ज़मीन है। बिल्डर मनीष गोयल नाम का शख्स है। दोनों ही अभी पुलिस की पंहुच से दूर हैं। इन दोनों के परिवार वालों पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले रखा है।

हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद के एसएसपी को सख्त कार्रवाई करने को कहा है। सीएम की सख्ती के बाद दोषियों की गिरफ्तारी को पुलिस की चार टीमों का गठन कर दिया गया है। वहीं मृतकों के परिजनों को दो लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की गयी है। याद रहे कि पांच दिन पहले ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में दो इमारतें भरभराकर गिर गईं थी, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस इमारत में चार लोग हिस्सेदार हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बेसमेंट मिलाकर पांच तल वाली बिल्डिंग में 17 मजदूर काम कर रहे थे। दोपहर पौने तीन बजे इमारत भरभराकर गिर गई और उसमें काम कर रहे सभी मजदूर मलबे में दब गए। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत दो मजदूरों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। सूचना पर पहुंची एनडीआरएफ की टीम और पुलिस ने देर शाम तक मलबे से छह मजदूरों को निकाला। इनमें से एक को संयुक्त अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।

सामने आई बिल्डर की लापरवाही

गाजियाबाद इमारत हादसे में बिल्डर की बड़ी लापरवाही भी सामने आई हैै। घटनास्थल पर काम कर रहे मजदूरों का कहना है कि बिल्डिंग के एक हिस्से में दरार आ गई थी, जिसके बारे में बिल्डर को जानकारी थी। बिल्डर ने मजदूरों को इस दरार को भरने को कहा और इमारत में जबरदस्ती काम जारी रखा।

राहत और बचाव कार्य जारी

हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस और NDRF की टीम पहुंच चुकी है राहत और बचाव का कार्य जारी है। बचाव के कार्य में डॉग स्क्वायड की भी मदद ली जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत के गिरते उमसें कई मजदूर मौजूद थे। हादसे में घायल महिला गुलाबरानी (47), शिवा (8) व देवेन्द्र (5) साल की हालत गंभीर बनी हुई है। तीनों को जिला संयुक्त अस्पताल से जीटीबी दिल्ली रेफर कर दिया गया है।

कभी भी गिर सकती है ग्रेटर नोएडा की 13 मंजिला इमारत

ग्रेटर नोएडा के पॉश सेक्टर बीटा-2 में नई बिल्डिंग बनाने के लिए की गई गहरी खुदाई और उसमें जमे पानी की वजह से पास की 13 मंजिला बिल्डिंग पर खतरा मंडराने लगा है। इमारत की दीवार में दरारें आ गई हैं। 13 मंजिला बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है।

बारिश के पानी और बिल्डर की मनमानी से 180 परिवारों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-2 की स्पार्क डिवाइन में रहनेवाले लोगों की नींद सोसाइटी के ठीक बगल में खोदे गए 25 फीट गहरे गड्ढे के कारण गायब हो गई है। ऐसे में यहां के 20 परिवार अपना फ्लैट खाली कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं।

बता दें कि गड्ढे से ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का दफ्तर महज 500 मीटर की दूरी पर है। थाना और भी पास है, लेकिन किसी ने भी इस बड़े खतरे और खुदाई की ओर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, लोगों के विरोध के बाद ग्रेटर नोएडा प्रशासन एक्शन मोड में आया है। पानी को निकालने के लिए पंप लाया गया। गड्ढे को भरने का काम भी शुरू हो गया

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