गूगल भी हुआ मोदी भक्त, ‘India first PM’ सर्च करने पर नेहरू की जगह दिख रहे पीएम मोदी

NewsCode | 26 April, 2018 12:29 PM
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नई दिल्ली। सभी सवालों के जवाब देने वाला गूगल इन दिनों अपने एक जवाब को लेकर सुर्खियों में है। एक टेक्निकल ग्लिच के कारण जब गूगल पर “Indias first PM” टाइप करके सर्च कर रहे हैं तो पेज पर सबसे पहले नाम तो पंडित जवाहर लाल नेहरू का आ रहा है लेकिन फोटो भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की आ रही है।

25 अप्रैल को स्क्रीनशॉट हुआ था वायरल

गूगल की इस गलती की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है। हालांकि, यह ट्विस्ट कैसे और कब हुआ ये फिल्हाल अनिश्चित है, लेकिन 25 अप्रैल को जैसे ही सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी फैली किसी ने रिजल्ट पेज का स्क्रीनशॉट लेकर इसे ट्वीट कर दिया। जिसके बाद कई अन्य लोगों ने भी इस स्क्रीनशॉट को सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया। जिसके आगे सवाल था कि, आखिर क्यों?

#Google कर लोग पूछ रहे गलती का कारण

गूगल की ये बड़ी गलती सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। कुछ लोगों ने गूगल को टैग करते हुए पूछा है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। इस स्क्रीनशॉट में गूगल पर ‘India First PM’ सर्च करने पर पीएम मोदी की फोटो नजर आ रही है। साथ ही विकिपीडिया का लिस्ट ऑफ इंडियन प्राइम मिनिस्टर्स का लिंक आता है।

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गूगल, आप भी मिस्टर मोदी के जाल में फंस गए? : कांग्रेस

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तनवर ने लिखा, ‘गूगल पर ‘India First PM’ सर्च करो और रिजल्ट में पंडित नेहरू की बजाय नरेंद्र मोदी की फोटो दिखाई देती है। गूगल प्लीज इसे ठीक करें। आप भी मिस्टर मोदी के जाल में फंस गए?’ कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना यानि राम्या ने भी गूगल से सवाल किए।

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रांची : एबीवीपी सरकार के बल पर छात्र राजनीति और शैक्षणिक संस्थानों कर रही है कब्ज़ा-वाम दल

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:01 PM
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रांचीएबीवीपी राज्य व केंद्र सरकार के बल पर छात्र राजनीति और शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है। यह छात्र और शैक्षणिक जगत के हितों के खिलाफ है। इससे छात्र का मूल दायित्व शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। शिक्षण कार्य के विकास के लिए दहशत और खुले वातावरण का होना जरूरी है।

उक्त बातें आज एआइएसएफ, एआइवाईएफ, एआइडीएसओ, एसएफआई, डीवाईएफआई आइसा और जेसीएम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रेसवार्ता को अल्बर्ट एक्का चौक  स्थित भाकपा कार्यालय में छात्र-युवा नेता संबोधित कर रहे थे।

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प्रेसवार्ता 19 सितंबर को रांची और जमशेदपुर में वाम छात्र-संगठनों के प्रतिरोध मार्च पर एबीवीपी के गुंडों द्वारा हुए हमले के खिलाफ आयोजित की गयी। यह प्रतिरोध मार्च जेएनयू में एबीवीपी की करारी हार के बाद निकाला गया था। सभी छात्र संगठनों ने एक स्वर में इस हमले की कड़ी निंदा की।

सभी छात्र संगठनों ने एकमत स्वर में कहा कि छात्र संगठनों के देशभक्त होने का सर्टिफिकेट एबीवीपी से लेने आवश्यकता नहीं है। छात्र संगठनों का इतिहास आजादी के आंदोलन से लेकर आजादी के बाद भी है, जो देश की एकता व अखंडता के लिए संघर्ष से जुड़ा है।

नेताओं ने कहा कि एबीवीपी की गुंडागर्दी का विरोध हम अपनी वैचारिकता और राजनैतिक चेतना के आधार पर करेंगे और शिक्षण संस्थाओं से लेकर राज्य के सभी जिलों में एक सशक्त अभियान संचालित करेंगे। इस अभियान के तहत एबीवीपी की आपराधिक कार्रवाइयों का पर्दाफाश किया जायेगा।

साथ ही देश में बढ़ते कट्टरवाद और उन्माद से शिक्षा और रोजगार स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में छात्र-युवाओं को बतायेंगे। छात्र-युवा नेताओं ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई के जरिये शिक्षा के व्यवसायीकरण और रोजगार के अवसर में हो रही कटौती से छात्रों और नौजवानों का ध्यान भटकाया जाता है।

नेताओं ने कहा कि एबीवीपी के साजिशकर्ता व गुंडों की त्वरित गिरफ्तारी नहीं हुई और पुलिस के वैसे पदाधिकारी जिनकी संलिप्तता इस घटना के साथ थी, उन्हें चिह्नित करते हुए निलंबन किया जाये। साथ ही सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करते हुए इस घटना की जवाबदेही रांची जिला एसपी लें।

प्रेस वार्ता में एआइडीएसओ के राज्य उपाध्यक्ष अमर महतो व रीमा बंसरियार, एआइएसएफ के रांची जिला सचिव मेहुल मृगेंद्र व लोकेश आनंद, एआइवाईएफ के अजय कुमार सिंह, इप्टा के उमेश नजीर व फरजाना फारूकी, आइसा के नौरिन अख्तर, एसएफआई के अकरम, डीवाईएफआई के संजय पासवान, जेसीएम के अनिकेत ओहदार, जेसीएस के मीर शहबाज संबोधित कर रहे थे।

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चास : पिंड्राजोरा के डाबर गांव में धूमधाम से मनाया गया मुहर्रम

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:14 PM
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चास(बोकारो)। पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के केलिया डाबर में मुहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लाठी खेल का आयोजन किया।

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लाठी खेल में 3 क्लब 5 स्टार क्लब, सनराइज क्लब, लक्की स्टार क्लब ने खेल दिखाया। लक्की स्टार क्लब ने भारत के सैनिक किस तरह से दुश्मन के इलाके में घुस कर आतंकवादियों को मरते है और अपना भारत का झंडा फहराते है ये दिखाया गया है।

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लक्की स्टार क्लब ने देश भक्ति गानों के साथ अपना खेल दिखाया देश कि शान तिरंगा को दुश्मन के इलाके में फहराकर दिखाया। लाठी खेल में दोनों समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। डाबर में लाठी खेल का आयोजन लगभग 20 वर्षो से किया जाता है।

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इस मौके पर अजीत सिंह चौधरी, कामदेव सिंह चौधरी, सुबलचंद्र महतो, यकीन अंसारी, अकबर अंसारी, लतीफ़ अंसारी, आवेदिन अंसारी, यकीन अंसारी, रहमगोल अंसारी, बदल सिंह चौधरी, मिहिर महतो आदि मौजूद थे।

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कोडरमा : मुहर्रम में कई हिन्दू परिवार पूरी श्रद्धा से निकालते है ताजिया और निशान

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:07 PM
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कोडरमाकोडरमा जिले में मुहर्रम के मौके पर कई हिन्दू परिवारों द्वारा पिछले कई पीढियों से ताजिया और निशान (झंडा) निकालने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। समाजिक सौहार्द की प्रतिमूर्ति इन परिवारों में चाराडीह इलाके के उमाशंकर उर्फ तुफानी सिंह गुलशन कुमार, गाँधी स्कूल रोड़ निवासी गजाधर भारती, भादेडीह निवासी जयप्रकाश वर्मा के परिवार शामिल है।

सभी परिवारों को आसपास के ग्रामीण इस कार्य में निष्ठा भाव से परंपरा निर्वहन और क्षेत्र परिभ्रमण के दौरान पुरा सहयोग देते हैं। इस बावत पूछे जाने पर उमाशंकर उर्फ तुफानी सिंह ने बताया कि उनका परिवार पिछले कई पीढ़ियों से यह परंपरा निभा रही है।

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उन्होंने कहा कि उनके पुर्वजों ने अपनी किसी मन्नत के पूरा होने के बाद इसकी शुरूआत की थी जो आज जारी है। हालाकि इस परिवार द्वारा बीती रात तक इसकी सारी तैयारी पूरी कर ली गई थी मगर उमाशंकर के बड़े भाई निर्मल सिंह का आज सुवह निधन हो जाने के कारण इस वर्ष इस परिवार द्वारा आज ताजिया नही निकाला गया।

गांधी स्कूल रोड निवासी गजाधर भारती ने बताया कि उनके दादा स्व. गुरूचरण राम (उत्पाद विभाग में जमादार थे) ने श्रद्धा से 1924 में इस मौके पर निशान (सरकारी झंडा) निकाला था जिस परंपरा का उनके पिता स्व. रामेश्वर राम और अब वे और उनका परिवार निर्वहन कर रहे हैं।

भादेडीह निवासी जयप्रकाश वर्मा ने बताया कि उनके दादा स्व. बुधन सोनार ने ताजिया निकालाना शुरू किया था। फिर उनके पिता स्व. सुखदेव प्रसाद और अब वे इस परंपरा को निभा रहे है। इन दोनों परिवारों के द्वारा आज ताजिया और झंडा निकाला गया।

इसी परिवार के द्वारा यहाँ के इमामबाड़े के लिए भूमि उपलब्ध करा इसकी स्थापना की थी। जहाँ सभी लोग जुटते हैं। उन्होंने बताया कि मुहर्रम के दिन उनके घर चुल्हा नही जलता वे मातम मनाते है। और तीजा के दिन ही सारी औपचारिकताए पूरी की जाती है।

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