राजनीति में जाने से क्यों डरते हैं गायक कैलाश खेर ?

NewsCode | 13 April, 2018 8:01 AM
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नई दिल्ली| गायक व संगीतकार पद्मश्री कैलाश खेर का कहना है कि राजनीति में प्रवेश करने में उन्हें डर लगता है, क्योंकि इसमें दिल के बजाय दिमाग का इस्तेमाल होता है।

‘टूटा टूटा एक परिंदा’ और ‘अल्लाह के बंदे’ जैसे हिट गीत के गायक स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड एंबेस्डर भी हैं और कई सामाजिक परोपकारी कार्यो में सहयोग देते रहे हैं। पिछले साल उन्होंने किसानों की सहायता के लिए मणिपुर के तमेंगलॉन्ग में निशुल्क प्रस्तुति दी थी।

कैलाश से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी राजनीति में जाने के बारे में सोचा है तो उन्होंने आईएएनएस से कहा, “नहीं, मैंने इस बारे में नहीं सोचा। राजनीति में शामिल होना बहुत डरावना है, क्योंकि आपको ज्यादा दिमाग चलाने की जरूरत होती है। हम कलाकार तो दिल से सोचते हैं। राजनीति में जगह बनाने और विशेष पद को लेकर मारामारी होती है। मैं इसे थोड़ा मुश्किल मानता हूं।” 

उन्होंने कहा, “मेरा यह भी मानना है कि अगर आप मानवता के लिए कुछ अच्छा करते हैं तो फिर आप जो भी हों, आप योगदान दे सकते हैं। बस निष्ठावान व ईमानदार बने रहिए।”

साल 2017 में कैलाश ने दो भारतीय बैंड सुरफिरा और इंडी रूट्स लॉन्च किया था। वह कैलासा बैंड के संस्थापक हैं। पिछले महीने सुरफिरा की एक प्रस्तुति के सिलसिले में कैलाश यहां आए थे।

कैलाश ने कहा, “सुरफिरा दुनिया भर में प्रस्तुति दे रहा है। बैंड रचनात्मक रूप से विकसित हो राह है। इसने गजल-सूफी-रॉक बैंड के रूप में शुरुआत की है। अब इसने कई और विधाओं को शामिल कर लिया है।” 

आगामी महीनों में उनकी योजना दो और प्रतिभाओं..दो एकल गायकों और दो बैंड लॉन्च करने की है।

उन्होंने कहा, “मैं एक कलाकार भी हूं, इसिलए मैं लॉन्च करने का एकदम सही तारीख नहीं बता सकता। एक साल में हम करीब 100 संगीत कार्यक्रम करते हैं। मैं विभिन्न जगहों पर प्रेरणादायी भाषण भी देता हूं। कैलासा ‘थमजा’ नाम के एक एकल गीत पर भी काम कर रहा है। यह ‘सैयां’ और ‘तेरी दीवानी’ की तर्ज पर रोमांटिक गीत होगा।”

फिल्मों के लिए गाने तैयार करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास इसके लिए समय नहीं है और वह स्वतंत्रता के संदर्भ में इसे बहुत रोमांचकारी नहीं पाते हैं। इसमें कई लोग शामिल होते हैं। संगीत में भी कमोबेश यही स्थिति है, हर किसी के पास संगीत निर्देशक के लिए सुझाव होता, इसलिए वह फिल्मों के लिए गाने तैयार करना पसंद नहीं करते।

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कैलाश ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव मिलते रहते हैं, लेकिन ज्यादा दखलअदांजी और समय ज्यादा लगने के चलते उन्होंने इससे दूरी बना रखी है। उन्होंने कहा कि वह लाइव संगीत कार्यक्रम करना पसंद करते हैं, क्योंकि इससे लोगों को संगीत के प्रति ज्यादा जागरूक बनाया जा सकता है।

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 आईएएनएस

कई रोगों के लिए रामबाण है अमरूद, जानें खाने के फायदे

NewsCode | 23 July, 2018 3:47 PM
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नई दिल्ली। सेहत के लिहाज से अमरूद को एक शानदार फल माना जाता है। आयुर्वेद में अमरूद और इसके बीजों के सेवन के कई लाभ गिनाए गए हैं। अमरूद का वैज्ञानिक नाम सीडियम गुआजावा है। इसमें मौजूद विटामिन और खनिज शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार होते हैं। अमरूद की तासीर ठंडी होती है। इसका सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। ऐसे गुणकारी पौधे को हम अपने आंगन या घर के आसपास रोप कर पूरे परिवार की सेहत का ध्यान रख सकते हैं।

वास्तु शास्त्र के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ

उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अमरूद सफलतापूर्वक उगाया जाता है, जो समुद्र तल से 1,500 मीटर (4, 9 00 फीट) ऊपर हैं। भारी मिट्टी से लेकर बहुत हल्की रेतीली मिट्टी तक में अमरूद की खेती की जाती है। नदी-घाटी में बहुत अच्छी गुणवत्ता वाले अमरूद पैदा होते हैं। इसके अलावा वास्तु के दृष्टिकोण से भी यह पेड़ शुभ माना गया है। जिस भूमि पर अमरूद के वृक्ष बहुत हों वह वास्तुशास्त्र में बहुत श्रेष्ठ बताई गई है।

वृक्षों की किस्में

लखनऊ 49: इसे सरदार भी कहा जाता है। इसके फल आकार में बड़े होते हैं। इसके फले बहुत स्वादिष्ट होते हैं। फल का ऊपरी हिस्सा हल्का पीला और गूदा सफेद होता है।

इलाहाबाद सफेदा: इसके फल आकार में बड़े और गोल होते हैं। फल का ऊपरी हिस्सा पीले-सफेद रंग का होता है। गूदा सफेद होता है और बीज बहुत कड़े होते हैं।

चिट्टीदार: यह किस्म उत्तर प्रदेश में ज्यादा पाई जाती है। इसका फल कुछ-कुछ इलाहाबाद सफेदा की तरह दिखता है। स्वाद में यह बहुत मीठा होता है और इसके बीज बहुत मुलायम होते हैं। फल की त्वचा में छोटे-छोटे लाल बिंदु होते हैं।

हरिजा: यह किस्म बिहार में अधिक लोकप्रिय है। इसका फल आकार में गोल होता है। इसका आकार मध्यम होता है। यह हरे-पीले रंग का होता है और बड़ा ही स्वादिष्ट होता है।

बड़ा गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक है अमरूद

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

अमरूद में विटामिन सी काफी मात्रा में पाया जाता है। संतरे की तुलना में अमरूद में 4 गुना ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। यह शरीर की इम्यूनिटी को बेहतर बनाने में मदद करता है और संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा करता है।

हृदय को रखता है स्वस्थ

अमरूद शरीर में सोडियम और पोटेशियम का स्तर संतुलित करता है, जिससे हायपर टेंशन वाले रोगियों को ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। अमरूद बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। अच्छा कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग के विकास में योगदान नहीं करता है। कुल मिलाकर अमरूद अपने दिल को स्वस्थ रखता है।

कैंसर का खतरा कम करता है

कैंसर एक भयानक बीमारी है, लेकिन आप अमरूद खाते हैं, तो आप कैंसर होने की आशंका से बच सकते हैं। इसमें लाइकोपीन, क्वेरसेटिन, विटामिन सी और अन्य तत्व पाए जाते हैं। ये मानव शरीर में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करते हैं और कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकते हैं। अमरूद प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करते हैं और स्तन कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है।

डायबिटीज, कब्ज और मोटापे में कारगर

अमरूद में फाइबर काफी अधिक मात्रा में होता है, जो डायबिटीज के विकास को रोकता है। अमरूद में मौजूद फाइबर से शरीर में शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। इसका फायबर कब्ज को दूर करने में भी मददगार होता है। अमरूद के बीज पेट साफ करने के लिए अच्छे साबित होते हैं। यह वजन कम करने में भी बेहतरीन साबित होता है क्योंकि इसे खाने से भूख नहीं लगती है और इसमें ज्यादा चर्बी भी नहीं होती है।

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तेनुघाट : झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट की बैठक संपन्न

NewsCode Jharkhand | 23 July, 2018 4:36 PM
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तेनुघाट(बोकारो)। बेरमो अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट में झारखंड यूनियन ऑफ जॉर्नलिस्ट की बैठक किया गया। जिसका मुख्य अतिथि एनयूजे के राष्ट्रीय महासचिव शिव अग्रवाल ने पत्रकारों की एकता को लेकर कई बातें बताये।

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आज पत्रकार अपने कलम की ताकत पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो रहे हैं। पत्रकार की हित को लेकर संगठन के द्वारा कई कदम उठाए गए हैं, और सरकार का ध्यान पत्रकार के हित में करने में कामयाब हुई है। बेरमो के पत्रकारों की एकता की भी मिसाल दी जाती है कि किसी भी प्रकार की समस्या में हमेशा वे एकजुट नजर आते हैं।

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एनयूजे के सदस्य मनोज मिश्रा ने भी सभा को संबोधित किया। स्वागत भाषण जेयूजे के बेरमो महासचिव मो. शाबिर अंसारी, मंच संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन जेयूजे के बेरमो अध्यक्ष सुभाष कटरियार ने किया। मौके पर टिल्लू पांडेय, ओम प्रकाश सहगल, ददन श्रीवास्तव, मिथलेश कुमार, पप्पू चौहान, जीवन सागर, मुकेश कुमार, जीतू चौहान, पंकज सिन्हा, संजय रवानी, सन्तोष रविदास, महावीर कुमार, सुभाष कुमार, राकेश कुमार सहित कई पत्रकार मौजूद थे।

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धनबाद : जीएम ने रेलवे अस्‍पताल का किया निरीक्षण, डासलिसिस मशीन लगाने का दिया आदेश

NewsCode Jharkhand | 23 July, 2018 4:28 PM
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धनबाद। अब रेलवे कमियों को डायलिसिस की सुविधा रेलवे अस्पताल में ही उपलब्‍ध होगी। पूर्व मध्‍य रेलवे के जीएम एलसी त्रिवेदी ने इसके आदेश दे दिए हैं। शनिवार को अस्‍पताल का निरीक्षण करने के बाद उन्‍होंने ये आदेश दिए। किडनी के मरीज रेलवे कर्मियों को अस्‍पताल में ये सुविधा बहाल होने के बाद सुविधा होगी। निरीक्षण के दौरान जीएम के साथ डीआरएम अनिल कुमार मिश्रा सहित रेलवे के अन्‍य अधिकारी थे।

धनबाद : जिला डेकोरेटर्स एसोसिएशन का 40 वां वार्षिक अधिवेशन 9 सितम्बर को 

इस रलवे अस्‍पताल में पीपीपी अर्थात् पब्लिक-प्राइवेट (पीपीपी) पार्टनरशिप के आधार पर डायलिसिस मशीन लगाया जाएगा, इसके आदेश जीएम ने दे दिए हैं। उन्‍होंने अस्पताल में उपलब्‍ध सुविधाओं पर खुशी व्‍यक्‍त करते हुए पुरस्‍कार देने की भी घोषणा की।

निरीक्षण के दौरान जीएम ने अल्‍ट्रासोनिक वेब मशीन का उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्‍होंने सुरक्षा की दृष्टि से रेलवे हॉस्पिटल में सीसीटीवी कैमरा लगाने का भी आदेश दिया। जीएम के आदेश पर उक्‍त अस्‍पताल में इनफर्मेशन मैनेजमेंट सर्विस भी बहाल किया जाएगा।

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