हजारीबाग : अपने परोपकारी काम से पहचाने जाने लगे हैं ये विधायक

NewsCode Jharkhand | 23 November, 2017 9:12 PM
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किडनी रोग से ग्रसित मरीज को 15 हजार रुपये का चेक दिया

हजारीबाग। सदर विधायक मनीष जायसवाल राजनीति को समाजसेवा और परोपकार की भावना से देखते हुए निरंतर क्षेत्र के समुचित विकास एवं बहुजनहिताय और बहुजनसुखाय के पुनीत भावना से ओत-प्रोत होकर नितदिन विस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। समय-समय पर उन्होंने अपने इसी पुनीत संवेदनशील भावना का परिचय गरीब-दुखी और असहाय मरीजों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक सहयोग करके जीवंत करने का कार्य किया है।

और पढ़ें ः हजारीबाग : मरीज केदार प्रसाद चौरसिया का होगा इलाज, विधायक ने की आर्थिक सहायता 

गुरुवार स्थानीय नुरा निवासी किडनी रोग से ग्रसित मरीज प्रमोद कुमार सोनी के इलाज हेतु सहयोग के रूप में उन्होंने उनके भाई दिलीप कुमार को 15 हजार रुपये का चेक देकर आर्थिक सहयोग किया। मरीज के इलाज के लिये झारखण्ड सरकार के कल्याणकारी योजना मुख्यमंत्री गंभीर रोग उपचार योजना के तहत भी इन्हें ढाई लाख रुपया का सहयोग प्राप्त हुआ है। मरीज का इलाज चंडीगढ़ में होना है।

गिरिडीह : बाबूलाल का भाजपा पर हमला, केस फौजदारियों से नहीं लगता डर

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 10:39 AM
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गिरिडीह। भाजपा न ही लोकतंत्र को मानती है और न ही उसे संविधान की मर्यादा का भान है। सिर्फ जोर जबरजस्ती से बस सत्ता में बने रहना चाहती है। यह कहना है जेवीएम सुप्रीमो सह सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का। बाबूलाल मरांडी गिरिडीह में पत्रकारों से भाजपा विधायकों की खरीद बिक्री मुद्दे पर बात कर रहे थे।

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मौके पर उन्होंने कहा कि सूबे के सबसे ऊंचे ओहदे पर बैठे व्यक्ति के पास शिकायत की है। ऐसे में संबंधित विधायक अगर निर्दोष हैं तो उन्हें जांच की मांग करनी चाहिये थी। लेकिन ये लोग सुर्खियों में बने रहने के लिए थाने की दौड़ लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख समझ रही है।  केस फौजदारियों से उन्हें डर नहीं लगता है। इन्होंने कहा कि अब आर पार की लड़ाई छिड़ गई है। यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक वे सभी के असल चाल-चरित्र को बेनकाब नहीं कर देते।

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गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- केंद्र और राज्य सरकारें बनाएं कानून

NewsCode | 17 July, 2018 11:22 AM
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नई दिल्ली। गोरक्षकों द्वारा हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाएं रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए है। कोर्ट ने चार हफ्ते में केंद्र और राज्यों को लागू करने के आदेश दिए है। कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर कोई भी शख्स कानून को हाथ में नहीं ले सकता है।

केंद्र और राज्य सरकार को गाइडलाइन जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के लिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

अदालत ने कहा कि सरकारें हिंसा की इजाजत नहीं दे सकती हैं। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. एस. नरसिम्हा ने कहा था कि केंद्र सरकार इस मामले में सजग और सतर्क है, लेकिन मुख्य समस्या कानून व्यवस्था की है। कानून व्यवस्था पर नियंत्रण रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। केंद्र इसमें तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक कि राज्य खुद गुहार ना लगाएं।

बता दें कि गोरक्षा के नाम पर हो रही भीड़ की हिंसा पर रोक लगाने के संबंध में दिशानिर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह इस तरह से हो रही भीड़ की हिंसा को रोकें।

गोरक्षा के नाम पर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मॉबोक्रेसी’ को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, और इसे नया नियम नहीं बनने दिया जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक, इससे कड़ाई से निपटना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं के सिलसिले में प्रिवेंटिव, रेमिडियल और प्यूनिटिव दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि संसद को इसके लिए कानून बनाना चाहिए, जिसमें भीड़ द्वारा हत्या के लिए सज़ा का प्रावधान हो। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट अगस्त में करेगा।

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याचिकाकर्ता इंदिरा जयसिह ने कहा कि भारत में अपराधियों के लिए गोरक्षा के नाम पर हत्या करना गर्व की बात बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है और उन्हें जीवन की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारें इस तरह के अपराध करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने में भी विफल रही हैं। इसलिए वक्त की मांग है कि इस बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

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जमशेदपुर : 4 लैंड माइंस गाड़ियों में 3 विगत 2 साल से है खराब, पड़ा है गैरेज में

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 11:00 AM
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जमशेदपुर । नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों से लड़ने के लिये सरकार एन्टी लैंड माइंस गाड़ियां देती है। लेकिन जमशेदपुर जिला का हाल ये है कि 4 लैंड माइंस गाड़ियों में 3 विगत 2 साल से खराब है और गैरेज में पड़ा है।

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अधिकारी और गैरेज की माने तो सरकार के पास मरम्मती के लिए खर्च का ब्यौरा भेजा गया है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं मजबूरी में पुलिस बिना एन्टी लैंड माइंस गाड़ी के हीं नक्सल इलाकों में घूम रही है।

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