गिरिडीह : आदिवासी बहुल इलाकों में योग की बयार, सिखाया जा रहा योग प्राणायाम

NewsCode Jharkhand | 27 April, 2018 5:54 PM

गिरिडीह : आदिवासी बहुल इलाकों में योग की बयार, सिखाया जा रहा योग प्राणायाम

गिरिडीह । पतंजलि हरिद्वार में प्रशिक्षण प्राप्त महिला पतंजलि की योग शिक्षिका पुष्पा शक्ति के  द्वारा पीरटॉड कन्या उच्च विद्यालय में छात्र-छात्राओं को योग अभ्यास कराया जा रहा है। योग शिक्षिका मंजू इस काम में इनका हाथ बटा रही है।

बताया गया कि उक्त विद्यालय में फरवरी माह से योग सेवा बच्चों को दी जा रही है। यहाँ के बच्चें बहुत ही आनंद के साथ योग सिख रहे हैं। शिक्षिका द्वारा योग के साथ-साथ आयुर्वेद व स्वदेशी की भी जानकारियां दी जाती है।

दी जा रही  है कई जानकारीयाँ

इस बाबत पुष्प शक्ति ने कहा कि अगर बच्चे प्रत्येक दिन गिलोय का काढ़ा बनाकर सेवन करेंगे तो कभी बीमार नहीं पड़ेंगे। खून की कमी दूर होगी, शरीर मे ताजगी के साथ एनर्जी भी मिलेगा, मलेरिया, डेंगू ,टायफाइड  आदि बीमारी नहीं होगी।

नमक, हल्दी और सरसों तेल से दाँत साफ करने से पैरिया ठीक हो जाता है, इसी प्रकार से कई आयुर्वेदिक जानकारियां दी जा रही है। इसके अलावे यौगिक जौगिंग के बारह पोज, सूक्ष्म व्यायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, कपाल भांति प्रणायाम, उज्जयी प्रणायाम, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उद्गीत, प्रणव प्रणायाम आदि के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के आसन भी बताये जा रहे हैं।

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कपाल भांति प्रणायाम को प्रत्येक दिन करने से पेट की समस्या नहीं होती है, पेट दर्द, पथरी की समस्या, किडनी, यूट्रस, गैस आदि की समस्याओं में लाभ मिलता है। भस्त्रिका और अनुलोम विलोम करने से हृदय घात, ट्यूमर, माईग्रेन, सिर दर्द, ब्लॉकेज आदि की समस्याओं में लाभ मिलता है। डिप्रेसन तनाव आदि से बचते है।

गिरिडीह : आदिवासी बहुल इलाकों में योग की बयार, सिखाया जा रहा योग प्राणायाम

उज्जयी करने से थायरॉइड, टॉन्सिल, हकलाना तुतलाना, खराटे लेना आदि से छुटकारा मिलता है। पढ़ाई में भी मन लगता है, याददास्त शक्ति मजबूत होती है। योग करने से तन और मन दोनों ही स्वस्थ्य रहता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक घण्टा योग जरूर करना चाहिए।

शिक्षिका द्वारा पीरटांड़ के अलावे उत्क्रमित उच्च विद्यालय बन्दरकुप्पी, उत्क्रमित कन्या उर्दू उच्च विद्यालय पतरोडीह आदि विद्यालय में भी योग सेवा दी जा रही है। बताया गया कि पतंजलि योगपीठ द्वारा हजारों लोगों पर इसका प्रयोग किया गया है।

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जमशेदपुर : प्लास्टिक मुक्त बनेगा हरिजन बस्‍ती, नुक्‍कड़ नाटक कर लोगों को मिली जानकारी

NewsCode Jharkhand | 27 May, 2018 7:59 PM

जमशेदपुर : प्लास्टिक मुक्त बनेगा हरिजन बस्‍ती, नुक्‍कड़ नाटक कर लोगों को मिली जानकारी

पर्यावरण संरक्षण पर जोर

जमशेदपुर। मानगो अधिसूचित क्षेत्र समिति के विशेष पदाधिकारी राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता के दिशा-निर्देश एवं नगर प्रबंधक एस रहमान ने पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता अभियान चलाया। दीपाशाही हरिजन बस्ती एवं मछुआ टोला वर्कर्स कॉलेज के समीप प्रदूषण पर रोक, प्लास्टिक पर रोक के लिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया।

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नगर प्रबंधक ने बस्तीवासियों को पर्यावरण संरक्षण के लाभ एवं प्लास्टिक के उपयोग से होने वाली हानि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि मानगो क्षेत्र के सभी मलिन बस्तियों, चौक-चौराहों एवं बाजारों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के लिए  लोगों को जागरूक किया जाएगा। समाजसेवी उत्तम चक्रवर्ती ने प्लास्टिक मुक्त मानगो एवं पर्यावरण संरक्षण में लोगों से  सहयोग की अपील की।

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बोकारो : आद्रा रेल मंडल में नारी सुरक्षा पर चला विशेष अभियान

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 7:51 PM

बोकारो : आद्रा रेल मंडल में नारी सुरक्षा पर चला विशेष अभियान

बोकारो। दक्षिण पूर्व रेलवे, आद्रा मंडल में रेल सुरक्षा बल द्वारा महिला सुरक्षा पर  विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के अंतर्गत आर.पी.एफ पोस्ट बोकारो से रेल सुरक्षा बल के अधिकारी एवं महिला कर्मचारियों ने बोकारो स्टेशन एवं ट्रेन संख्या 13304(रांची-धनबाद इंटरसिटी एक्सप्रेस) में महिला यात्रियों को सेक्युरिटी हेल्प लाइन नंबर 182 के बारें में जानकारी देकर उन्हें जागरूक किया।

वही बर्नपुर पोस्ट के अधिकारीगण एवं कर्मचारियों ने बर्नपुर स्टेशन एवं ट्रेन संख्या 18183(टाटा-दानापुर एक्सप्रेस), 68055(आसनसोल-टाटा पैसेंजर), 63594(आसनसोल-पुरूलिया पैसेंजर), 68067(आद्रा-आसनसोल पैसेंजर) एवं 58017(खड़गपुर-आसनसोल पैसेंजर) में महिला यात्रियों को महिला सेक्युरिटी हेल्प लाइन 182 के बारें में जानकारी दिया।

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इसी क्रम में भोजूडीह पोस्ट, महुदा पोस्ट एवं कोटशिला पोस्ट के अधिकारीगण एवं कर्मचारियों ने भी स्टेशन एवं ट्रेनों में महिला यात्रियों को सचेत किया।

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निपाह वायरस से बचने के लिए WHO ने किया आगाह, भूलकर भी न खाएं ये 3 फल

NewsCode | 25 May, 2018 6:12 PM

निपाह वायरस से बचने के लिए WHO ने किया आगाह, भूलकर भी न खाएं ये 3 फल

नई दिल्ली। केरल में निपाह वायरस के कारण मरने वालों की संख्‍या बढ़ रही है। जबसे निपाह वायरस से जुड़ी खबरें आ रही हैं लोगों में डर का माहौल है। निपाह वायरस का सबसे बड़ा खतरा अब फलों से भी पैदा हो गया है।

क्‍या है निपाह वायरस?

निपाह वायरस को NiV इन्‍फेक्‍शन भी कहा जाता है। ये जूनोटिक बीमारी है। यानी ऐसी बीमारी जो जानवरों से इंसान में फैलती है। इस बार इसके फैलने का कारण फ्रूट बैट्स (चमगादड़) कहे जा रहे हैं।

कैसे फैलता है?

WHO के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ की एक नस्ल में पाया जाता है। यह वायरस उनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है, चमगादड़ जिस फल को खाता है, उनके अपशिष्ट जैसी चीजों के संपर्क में आने पर यह वायरस किसी भी अन्य जीव या इंसान को प्रभावित कर सकता है। ऐसा होने पर ये जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है। ऐसे में केरल से आने वाले फलों को विशेषकर ध्‍यान से खाया जाएं।

शरीर में वायरस का प्रवेश कैसे होता है?

NiV शरीर में खाद्य पदार्थ के माध्‍यम से प्रवेश करता है। प्रभावित चमगादड़ द्वारा झूठे किए गए फलों, बेरी या फूलों के सेवन से ये वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। या घरेलू पशु जिन्‍होंने ऐसे खाद्य पदार्थ का सेवन किया हो या चमगादड़ के संपर्क में आए हों, उनसे भी ये फैलता है। प्रभावित व्‍यक्ति के संपर्क में आने से ये वायरस दूसरे के शरीर में प्रवेश कर जाता है।

क्या हैं निपाह (NiV) के लक्षण मनुष्‍यों में निपाह वायरस, encephalitis से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है. बुखार, सिरदर्द, चक्‍कर, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत, इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। 24-28 घंटे में यदि लक्षण बढ़ जाए तो इंसान को कोमा में जाना पड़ सकता है। कुछ केस में रोगी को सांस संबंधित समस्‍या का भी सामना करना पड़ सकता है।

इन तीन फलों से फैल सकता है निपाह वायरस

खजूर– धोकर खाएं खजूर और आम। रमजान के महीने में खजूर सबसे ज्यादा खाए जाते हैं। भारत में कई जगह बड़ी मात्रा में केले और खजूर केरल से मंगाए जाते हैं। निपाह वायरस से प्रभावित केरल के कालीकट और मल्लापुरम जिले में केले और खजूर की बड़ी मात्रा उत्‍पाद किए जाते है।

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केला- निपाह वायरस लोगों में फलों के जरिए फैल सकता है इसलिए केरल से जो केले आ रहे हैं, उनको खाने से बचें। अगर खाना ही है तो अच्छे से धोकर खाएं। क्योंकि, उत्तर भारत में ज्यादातर केले, केरल से आते हैं। ऐसे में इन्हें खाना मौजूदा हालात में सही नहीं है।

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