गिरिडीह : शहादत दिवस पर याद किए गए जननायक और क्रांतिकारी योद्धा महेंद्र सिंह  

NewsCode Jharkhand | 16 January, 2018 9:59 AM
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लोगों का उमड़ता जनसैलाब

गिरिडीह। विचार और विचारधारा किसी को मारे नहीं मरता, वो चिरकाल तक अमर और अजय है।क्रांतिकारी अभिवादन,बेतहासा भीड़,चारों ओर लाल सलाम की गूंज। सभी उस जननायक को याद करने वर्षो से गिरिडीह के बगोदर में 16 जनवरी को जुटते हैं। उस योद्धा को नमन करते हैं। बगोदर से सीपीआई के विधायक रहे कॉमरेड महेंद्र सिंह का 16जनवरी को शहादत दिवस मनाया जा रहा है। झारखंड में महेंद्र सिंह जननायक से कम नहीं थे। शायद यही कारण है कि आज उनकी हत्या के सालों बाद भी बगोदर में उनकी शहादत दिवस के दौरान हजारों लोग जमा होते है। उनकी याद में लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।

 उग्रवादियों ने की थी हत्या

नक्सलियों ने उस जननायक और क्रांतिकारी योद्धा की हत्या कर दी थी। 16 जनवरी 2005 में सरिया थाना क्षेत्र के दुर्गी-धवैया गांव में गोली मार दी थी। असल में कॉमरेड महेंद्र 2005 के विधानसभा चुनाव के सिलसिले में दुर्गी-धवैया में जनसभा सह चुनावी सभा को संबोधित करने गए थे। तभी कुछ सरफिरों ने गोलियों के दम पर उस गर्जना को शांत करवा दिया।

गिरिडीह : शहादत दिवस पर याद किए गए जननायक और क्रांतिकारी योद्धा महेंद्र सिंह  

नक्सलियों के सामने आकर कहा मैं हूं महेंद्र

माओवादियों का दस्ता जब महेंद्र सिंह की हत्या करने पहुंचा था तो वहां उस वक्त कई लोग थे। उस भीड़ से नक्सलियों ने पूछा था कि इनमें से महेंद्र सिंह कौन है? महेंद्र सिंह खुद आगे आए और कहा मैं हूं महेंद्र सिंह। इसी के बाद नक्सलियों ने ताबड़तोड़ गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

जुल्म के खिलाफ करते थे संघर्ष

कॉमरेड महेंद्र सिंह ताउम्र सामंतवादी जुल्म के खिलाफ संघर्ष करते रहे। झारखंड के जननायकों में शहीद महेंद्र सिंह का नाम बड़े ही अदब के साथ लिया जाता है।1970 के दशक के आखिरी में सीपीआई एमएल लिबरेशन से जुड़कर कॉमरेड सिंह ने अपने पैतृक गांव बगोदर प्रखंड के खंभरा से राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और बेहद तेजी के साथ स्थानीय लोगों से जुड़कर उनकी जिंदगी से जुड़े मुद्दों को लेकर जन आंदोलनों की अगुवाई करने लगे थे।

दुष्कर्म के विरोध में 17 घंटे तक जाम

एक दुष्कर्म की घटना को लेकर वर्ष 1980 में  उन्होंने लगातार17 घंटे तक बगोदर में जीटी रोड को जाम कर दिया था। बलात्कार के आरोपियों को कटघरे में खड़ा कर इतिहास रच दिया था। प्रादेशिक जनवादी अग्रगामी मोर्चा का गठन कर महेंद्र सिंह ने बगोदर क्षेत्र की शोषित पीड़ित जनता के लिए कई ऐतिहासिक जनांदोलन किया।

आईपीएफ गठन में सक्रिय भूमिका

आईपीएफ का गठन वर्ष 1982 में देशभर के करीब 150 वाम संगठनों को एक कर किया गया था। आइपीएफ के गठन में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। तब उन्हें आइपीएफ का बिहार राज्य का प्रांतीय सचिव बनाया गया था। इसी दौरान महेंद्र सिंह को हत्या के एक मामले में गिरिडीह मंडल कारा में बंद कर दिया गया। जेल में भी उन्होंने बन्दी नागरिक सुरक्षा समिति बनाकर बंदियों के हित और अधिकार के लिए संघर्ष किया। जेल में बन्द रहने के दौरान आइपीएफ ने वर्ष 1985 के विधानसभा चुनाव में बगोदर विधानसभा क्षेत्र का प्रत्याशी बनाया। हालांकि इस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। लेकिन जेल से रिहाई के बाद वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बगोदर से शानदार जीत दर्ज कर राजनीति के धुरंधरों को सकते में ला दिया था।

शांत भाव से सुनता था सदन

जानकर बताते हैं कि महेंद्र सिंह जब बिहार विधानसभा में किसी भी सवाल पर बोलते थे तब पूरे सदन में सन्नाटा पसर जाता था। कमोवेश यही स्थिति बाद में  अलग झारखंड राज्य के विधान सभा में भी देखने को मिली थी। वो बोलते थे और सब मौन। वास्तव में कॉमरेड महेंद्र आधुनिक झारखंड के जननायक हैं।

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गिरिडीह : बाबूलाल का भाजपा पर हमला, केस फौजदारियों से नहीं लगता डर

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 10:39 AM
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गिरिडीह। भाजपा न ही लोकतंत्र को मानती है और न ही उसे संविधान की मर्यादा का भान है। सिर्फ जोर जबरजस्ती से बस सत्ता में बने रहना चाहती है। यह कहना है जेवीएम सुप्रीमो सह सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का। बाबूलाल मरांडी गिरिडीह में पत्रकारों से भाजपा विधायकों की खरीद बिक्री मुद्दे पर बात कर रहे थे।

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मौके पर उन्होंने कहा कि सूबे के सबसे ऊंचे ओहदे पर बैठे व्यक्ति के पास शिकायत की है। ऐसे में संबंधित विधायक अगर निर्दोष हैं तो उन्हें जांच की मांग करनी चाहिये थी। लेकिन ये लोग सुर्खियों में बने रहने के लिए थाने की दौड़ लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख समझ रही है।  केस फौजदारियों से उन्हें डर नहीं लगता है। इन्होंने कहा कि अब आर पार की लड़ाई छिड़ गई है। यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक वे सभी के असल चाल-चरित्र को बेनकाब नहीं कर देते।

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गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- केंद्र और राज्य सरकारें बनाएं कानून

NewsCode | 17 July, 2018 11:22 AM
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नई दिल्ली। गोरक्षकों द्वारा हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाएं रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए है। कोर्ट ने चार हफ्ते में केंद्र और राज्यों को लागू करने के आदेश दिए है। कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर कोई भी शख्स कानून को हाथ में नहीं ले सकता है।

केंद्र और राज्य सरकार को गाइडलाइन जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के लिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

अदालत ने कहा कि सरकारें हिंसा की इजाजत नहीं दे सकती हैं। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. एस. नरसिम्हा ने कहा था कि केंद्र सरकार इस मामले में सजग और सतर्क है, लेकिन मुख्य समस्या कानून व्यवस्था की है। कानून व्यवस्था पर नियंत्रण रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। केंद्र इसमें तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक कि राज्य खुद गुहार ना लगाएं।

बता दें कि गोरक्षा के नाम पर हो रही भीड़ की हिंसा पर रोक लगाने के संबंध में दिशानिर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह इस तरह से हो रही भीड़ की हिंसा को रोकें।

गोरक्षा के नाम पर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मॉबोक्रेसी’ को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, और इसे नया नियम नहीं बनने दिया जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक, इससे कड़ाई से निपटना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं के सिलसिले में प्रिवेंटिव, रेमिडियल और प्यूनिटिव दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि संसद को इसके लिए कानून बनाना चाहिए, जिसमें भीड़ द्वारा हत्या के लिए सज़ा का प्रावधान हो। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट अगस्त में करेगा।

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याचिकाकर्ता इंदिरा जयसिह ने कहा कि भारत में अपराधियों के लिए गोरक्षा के नाम पर हत्या करना गर्व की बात बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है और उन्हें जीवन की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारें इस तरह के अपराध करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने में भी विफल रही हैं। इसलिए वक्त की मांग है कि इस बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

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जमशेदपुर : 4 लैंड माइंस गाड़ियों में 3 विगत 2 साल से है खराब, पड़ा है गैरेज में

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 11:00 AM
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जमशेदपुर । नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों से लड़ने के लिये सरकार एन्टी लैंड माइंस गाड़ियां देती है। लेकिन जमशेदपुर जिला का हाल ये है कि 4 लैंड माइंस गाड़ियों में 3 विगत 2 साल से खराब है और गैरेज में पड़ा है।

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अधिकारी और गैरेज की माने तो सरकार के पास मरम्मती के लिए खर्च का ब्यौरा भेजा गया है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं मजबूरी में पुलिस बिना एन्टी लैंड माइंस गाड़ी के हीं नक्सल इलाकों में घूम रही है।

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