गिरिडीह : शहीदी का मांगा जा रहा प्रमाण पत्र, पत्नी को अब तक नहीं मिला मुआवजा

NewsCode Jharkhand | 14 June, 2018 12:33 PM
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गिरिडीह। जब सर्जिकल स्ट्राइक पर विपक्ष ने सबूत मांगा तो सत्ता पक्ष आग बबूला हो उठा। कइयों को देश द्रोही तक घोषित कर दिया गया। लेकिन सरहद पर शहीद होने वाले जांबाज से जब उसके शहादत का सुबूत मांगा जाता हो तब शायद देश भक्ति की आकाल मृत्यु हो चुकी होती है। जी हां ,कुछ ऐसे ही मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजर रहीं हैं कश्मीर की सरहद पर अपनी जान कुर्बान करने वाले शहीद सीताराम उपाध्याय की धर्मपत्‍नी।

मुआवजा व अन्य सुविधाओं के लिए इनसे पति के शहीद होने का सुबूत मांगा जा रहा है। असल में बॉर्डर पर पिछले दिनों देश की रक्षा में तैनात सीताराम दुश्मन सैनिकों की गोली के शिकार हो गए थे। इनका शव जब गिरिडीह पहुँचा तो पूरा गिरिडीह उस वीर बाँकुरे के अंतिम दर्शन को उमड़ पड़ा। अंतिम संस्कार में कई जनप्रतिनिधी, पदाधिकारी व कई खासों आम पालगंज पहुंच कर शहीद के परिजनों को आश्वासन दिया।

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सरकार द्वारा घोषित आश्वासन की पुलिंदा लेकर शहीद की विधवा रश्मि देवी जब गिरिडीह उपायुक्त कार्यलय पहुंची तो पहले उन्हें आम मुलाकाती के तरह चैम्बर के बाहर इन्तजार करना पड़ा।  बाद में उपयुक्त से जब इनकी मुलाकात हुई तो डीसी ने इनसे किसी भी तरह के मदद के लिए बीएसएफ से शहादत का प्रमाण पत्र देने को कहा।

सिर्फ एलान किया गया नहीं मिली मदद

इधर शहीद के रिश्‍तेदार शरद भक्त का कहना है कि शहादत के बाद मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक कई तरह के मदद का ऐलान किया था। लेकिन अब तक इस परिवार को किसी तरह की मदद नसीब नहीं हुई है यह चिंताजनक है। उन्होंने जल्द से जल्द इस परिवार को मुआबजा दिलवाने की मांग सरकार प्रशासन से की।

2 लाख रूपए मुआवजा राशि देने का सरकारी प्रावधान

इस मामले में गिरिडीह उपायुक्त का कहना है कि सरकारी प्रावधान के मुताबिक 2 लाख रूपए मुआवजा राशि देने का सरकारी प्रावधान है। साथ ही उनके पास शहीद सीताराम के शहादत का प्रमाण पत्र नहीं मिला है लिहाजा जैसे ही मृत्यु प्रमाण पत्र मिलेगा अनुकंपा के आधार पर नौकरी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

पेचीदा सिस्‍टम में फंसा वीरों का सम्‍मान

बहरहाल,यह कोई नई कहानी नहीं है। देश की रक्षा में कुर्बान होने वाले सैनिकों के लिए पूरा देश श्रद्धा और सम्मान का भाव रखता है। लेकिन सिस्टम की पेचिदिगीयों में आर्थिक सहायता का मामला फंसता रहता है। जरूरत है वीरों के शहादत के सम्मान में सिस्टम में थोड़ा लचीलापन लाने की।

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तेनुघाट : गंदगी में ही बीमारियां पनपती है-रामकिशुन

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 5:31 PM
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तेनुघाट(बोकारो)। गोमिया के साड़म पूर्वी पंचायत अंतर्गत हरिजन टोला में कांग्रेस के बोकारो जिला महासचिव रामकिशुन रविदास के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान लोगों ने मोहर्रम एवं दुर्गा पूजा को देखते हुए पूरे मोहल्ले की गंदगी का सफाई किया गया है।

बोकारो : धूम-धाम से मनाया गया करमा पूजा

कांग्रेस के जिला महासचिव रामकिशुन रविदास ने कहा कि पूरे देश में 15 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इस सफाई अभियान के तहत लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाना है, क्योंकि गंदगी ही सारी बीमारियों की जड़ है।

गंदगी में ही बीमारियां पनपती है।उन्होंने लोगो से  साफ सफाई के प्रति विशेष ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि इससे वातावरण स्वच्छ रहने के साथ साथ बीमारियां भी दूर भागती है। इस अवसर पर राजेश रंजन,प्रभाकर रंजन,विनोद कुमार, अनिल कुमार, रविकांत दास,विक्रम कुमार सहित कई लोग मौजूद थे।

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लोहरदगा : जंगल छोड़ गांव में पहुंचे गजराज, ग्रामीणों में भय के साथ कौतूहल

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 5:37 PM
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लोहरदगा। पिछले एक सप्ताह से जंगली हाथियों का दल जिले के विभिन्‍न क्षेत्रों में विचरण कर रहा है जिससे ग्रामीणों के बीच भय का वातावरण बना हुआ है। भंडरा थाना क्षेत्र के कचमची महुआटोली में शुक्रवार की सुबह हाथियों का दल पहुँच गया है। इस दल में करीब 18 हाथी हैं जिनमें कई बच्‍चे भी शामिल हैं।

जंगली हाथियों से जहां स्थानीय लोग भयभीत हैं वहीं उन्‍हें अपने आसपास विचरते देख उनके मन में कौतूहल भी उत्‍पन्‍न हो रहा है। हाथियों के झुंड को देखने के लिए भीठा, भंडरा, कचमची, चट्टी, कोटा, नागजुआ सहित दर्जनों गांव के ग्रामीण कचमची महुआटोली पहुंच रहे हैं। वहीं हाथियों के झुंड के साथ सेल्फी लेने की युवाओं में होड़ लगी है। भंडरा थाना की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को वहाँ से हटा दिया ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

इधर हाथियों के झुंड ने कई किसानों के खेत मे लगे मक्का व धान की फसल को क्षति पहुंचाई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद भी, अभी तक वन विभाग की ओर से हाथियों को जंगल की ओर ले जाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

लोहरदगा : करमा पूजा धूमधाम से संपन्‍न, सुखदेव भगत ने बजाया मांदर

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UGC का फरमान- 29 सितंबर को यूनिवर्सिटी मनाएं ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’, कांग्रेस ने की आलोचना

NewsCode | 21 September, 2018 5:34 PM
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नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को 29 सितंबर को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ के तौर पर मनाने का आदेश दिया है। UGC ने सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने के लिए सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में पूर्व सैनिकों से संवाद सत्र, विशेष परेड, प्रदर्शनियों का आयोजन और सशस्त्र बलों को अपना समर्थन देने के लिए उन्हें ग्रीटिंग कार्ड भेजने समेत अन्य गतिविधियां आयोजित करने का सुझाव भी दिया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आयोग ने सभी कुलपतियों को गुरुवार को भेजे एक लेटर में कहा, ‘सभी विश्वविद्यालयों की एनसीसी की इकाइयों को 29 सितंबर को विशेष परेड का आयोजन करना चाहिए जिसके बाद एनसीसी के कमांडर सरहद की रक्षा के तौर-तरीकों के बारे में उन्हें संबोधित करें।’

यूजीसी ने कहा कि विश्वविद्यालय सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में छात्रों को संवेदनशील करने के लिए पूर्व सैनिकों को शामिल करके संवाद सत्र का आयोजन कर सकते हैं।

पत्र में कहा गया है, ‘इंडिया गेट के पास 29 सितंबर को एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह की प्रदर्शनियों का आयोजन राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, अहम शहरों, समूचे देश की छावनियों में किया जा सकता है। इन संस्थानों को छात्रों को प्रेरित करना चाहिए और संकाय सदस्यों को इन प्रदर्शनियों में जाना चाहिए।’

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने की आलोचना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने ट्विटर पर यूजीसी के इस निर्णय की आलोचना की है। उन्होंने लिखा है, ‘यूजीसी ने सभी यूनिवर्सिटीज को 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे के रूप में मनाने का आदेश दिया है। यह लोगों को शिक्षित करने के लिए बना है या बीजेपी के राजनीतिक हित साधने के लिए? क्या यूजीसी 8 नवंबर (नोटबंदी) को गरीबों का निवाला छीनने के सर्जिकल स्ट्राइक दिवस के रूप में मनाने की हिम्मत कर पाएगा? यह एक और जुमला है!

वहीं, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि यूनिवर्सिटीज सर्जिकल स्ट्राइक दिवस को मनाने के लिए बाध्य नहीं हैं। जावड़ेकर ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक को समर्पित इस कार्यक्रम को मनाने का सुझाव हमें कई शिक्षकों और विद्यार्थियों से मिला था, इसलिए हमने इसके आयोजन का फैसला किया है।

गौरतलब है कि भारत ने 29 सितंबर 2016 को PoK में नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादियों के सात अड्डों पर लक्षित कर हमले किए थे। सेना ने कहा था कि विशेष बलों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठ की तैयारी में जुटे आतंकवादियों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भारत के उरी कैंप पर हमला किया और भारत के 19 जवान शहीद हुए थे। उरी हमले के करीब दस दिन बाद 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तहस-नहस कर दिया था।


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