गिरिडीह : बूंद – बूंद पानी को तरसते लोग, डीप बोरिंग व जलमीनार पर मुखिया का कब्जा

NewsCode Jharkhand | 26 April, 2018 2:20 PM
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गिरीडीह। एक तो बेतहाशा गर्मी, उस पर बूंद – बूंद पानी के लिए तरसते लोग अपने जीवन बचाने के लिए गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। बदरंग सिस्टम का मुजाहिरा करता यह दृश्य है गिरिडीह के गान्डेय प्रखंड अंतर्गत डाडिडीह गांव का।

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गंदे डाढ़ी का पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण

जिस डाढ़ी में मवेशी पानी पीते हैं वही पानी पीते हैं ग्रामीण। इस गांव की तस्वीर तमाम सरकारी दावों को मुंह चिढ़ाने के लिए काफी है। एक ओर सरकार ताल ठोक कर दावा कर रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य जोरों पर चल रहा है। लेकिन गांवों में किसको योजनाओं का लाभ मिल रहा है इसे देखने वाला कोई नही है।

ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा लाभ

अब ऐसा भी नही है कि सरकार पूरी तरह से निष्क्रिय है। कुछ कर नही रही है। योजनाएं गांव तक पहुच रही है लेकिन बिचौलिए और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ग्रामीणों तक योजनाओं का लाभ सीधे सीधे नहीं पहुंच पाता।

इस गांव की दुर्दशा के पीछे भी कुछ ऐसी ही कहानी है

इस इलाक़े की मुखिया यशोदा देवी ने अपने ही घर में जल नल प्रणाली योजना के तहत डीप बोरिंग करवा कर ग्रामीणों को इस योजना के लाभ से वंचित कर दिया है। जलमीनार भी इन्ही के घर में है।मसला यह है कि एक सार्वजनिक लाभ की सरकारी योजना अब इनकी बपौती योजना बन गई है, और ग्रामवासी पानी के लिए कोसों दूर तक भागते दौड़ते हैं। नहीं तो फिर गंदे पानी से ही अपना गुजर बसर करते हैं।

सवाल यह कि क्या ऐसे में हालात में तब्दीली की उम्मीद की जाए ?

बताया गया कि इस डीप बोरिंग को गांव के बीचों – बीच कराना था। लेकिन मुखिया अपने रशुख के दम पर इसे अपनी पर्सनल प्रोपर्टी बना ली हैं। यहां के भोले – भाले ग्रामीणों का कहना है कि इन्होंने मुख्यमंत्री जनसंवाद में 181 नंबर डायल कर शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन उस बड़े दरबार में भी इनकी फरियाद की कुछ सुनवाई नहीं हुई। बहरहाल जब बड़े दरबार में ही गरीबों की फरियाद अनसुनी हो जा रही है तो और कहीं से क्या उम्मीद। अब ग्रामीण इस स्थिति को अपनी नियति मान चुके हैं। सवाल यह कि क्या ऐसे में हालात में तब्दीली की उम्मीद की जाए ?

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कोडरमा : कला की धरा पर कलाकृतियों की बारीकियां बच्चों को सिखा रहे हैं अमर घोष

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 5:47 PM
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कोडरमा। कला की धरा पर कलाकृतियां बिखेरना 68 वर्षीय अमर घोष की खासियत है। अब तक कोडरमा जिले के तकरीबन 500 बच्चों (छात्र-छात्राओं) को ये पेंटिंग, ड्राइंग, मूर्तिकला, पेपरमसवर्क, थर्मोकोल वर्क, पलास्टर ऑफ़ पेरिस, हैंडीक्राफ्ट के क्षेत्र में सभी स्तर की बारिकियों से परिपूर्ण बना उस क्षेत्र में दक्ष बना चुके है। इनका यह अभियान अनवरत जारी है।

कोडरमा : प्रतिदिन सड़क दुर्घटना में जा रही है लोगों की जान, यह है कारण

मौजूदा समय में कला क्षेत्र के धनी अमर घोष तिलैया शहर में रेलवे क्रांसिग के निकट मधुबन काप्लेक्स परिसर में चित्रलिपि के नाम से एक प्रशिक्षण संस्थान चला रहे है। जहाँ सप्ताह में तीन दिन बच्चों को आर्ट क्लास के दौरान उन्हें जानकारियां देकर गढने का काम करते हैं। जिले के कई निजी स्कूलों में भी वे बतौर आर्ट शिक्षक बच्चों को जानकारी देते हैं। ये छात्रों को रिजेक्टेड वाटर बोतल से घर सजाने के हैंडीक्राफ्ट की जानकारी भी देते हैं।

बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनके भीतर आर्ट की बारिकियों को समझने की ललत थी। इस सफर के दौरान उन्होंने इंडियन आर्ट कालेज पश्चिम बंगाल के गोल्ड मेडल प्राप्त प्रध्यापक अजय दास से भी इसके गुर सीखे, बाद के दिनों में 1974-75 में रविन्द्र भारती बंगीय संगीत परिषद धनबाद से उन्होंने आर्ट में डिप्लोमा भी प्राप्त किया है।

मौजूदा समय में उनकी इच्छा है वे ज्यादा से ज्यादा बच्चों को आर्ट की बारिकियां सिखा सके। वे कहते है खासतौर पर छोटे-छोटे नौनिहालों की प्रतिभा निखारने में उन्हें ज्यादा खुशी मिलती है।

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दिल्ली में 14,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘आप’ का चिपका आंदोलन

NewsCode | 24 June, 2018 7:54 PM
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध तेज हो गया है। आम लोगों के साथ अब आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ उतर आई है। आज रविवार को सरोजिनी नगर में पार्टी ने एक बड़े चिपको आंदोलन का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #DelhiChipkoAndolan लगातार ट्रेंड कर रहा है।

दिल्ली सरकार में ‘आप’ के मंत्री इमरान हुसैन ने कई विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पेड़ों से चिपककर विरोध-प्रदर्शन किया। लोग हाथ से लिखे पोस्टर के साथ पेड़ों को बचाने की अपील करने के लिए वहां पहुंचे थे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे जगह शिफ्ट करने की अपील की।

वहीं, पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “जब सारी जनता , दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार पेड़ों के बारे में इतनी चिंतित है तो केन्द्र सरकार प्रोजेक्ट बंद कर दे। अब कोई पेड़ ना काटा जाए”

बता दें कि सरोजिनी नगर में शनिवार को भी पेड़ काटने के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं ने पेड़ से चिपककर उसे बचाने की अपील की।उनका कहना था कि सुंदर नगर में पेड़ कट चुके हैं। अब सरोजिनी नगर व आरकेपुरम में इन्हें काटा जाना है। हम इसका विरोध कर रहे है। सभी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली का नारा पेड़ काटने से पूरा नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली में स्थित सात सरकारी आवसीय कॉलोनियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव बनाया था। केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पुनर्विकास प्लान को वर्ष 2016 में ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ही दक्षिणी दिल्ली में स्थित किदवई नगर में 1123, नेताजी नगर में 2294, नैरोजी नगर में 1454, मोहम्मदपुर में 363 और सरोजनी नगर में 11 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। नैरोजी में पेड़ों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। अब इन पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह जितने पेड़ काटेंगे उससे दोगुना पौधे लगाएं जाएंगे। पूरा पुनर्विकास प्लान ग्रीन प्रोजेक्ट होगा।

1973 में पहली बार हुआ था चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 1973 में हुई थी। तब ग्रामीण किसानों ने राज्य के वन ठेकेदारों द्वारा वनों और जंगलों को काटने के विरोध में चिपको आन्दोलन चलाया था। चिपको आंदोलन का सीधे-सीधे अर्थ है किसी चीज से चिपककर उसकी रक्षा करना। जब यह आंदोलन वहां पर चल रहा था, तब वनों की कटाई को रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं पेड़ों से लिपट जाती थीं और ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने देती थी। इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी।

जानिए क्या है चिपको आंदोलन, जिस पर Google ने बनाया डूडल

इस आंदोलन को चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और ग्रामीणों ने मिलकर अंजाम दिया था। बाद में प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी सुन्दरलाल बहुगुणा ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। जिस समय यह आन्दोलन चल रहा था, उस समय केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया था। इस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम बनाया।

चिपको आंदोलन आज अधिक प्रासंगिक

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धनबाद : झरिया के अस्तित्‍व को बचाने के लिए फिर होगा आंदोलन

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:48 PM
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झरिया को उजाडने की सरकारी मंसूबे को जनता कामयाब नहीं होने देगी

धनबाद (झरिया)। झरिया के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर आंदोलन होगा। इसबार आंदोलन की मुख्‍य भूमिका में पूर्व मंत्री समरेश सिंह रहेंगे। आंदोलन की रुपरेखा तैयार करने के बावत आज झरिया प्रेस क्लब में समरेश सिंह की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें पूर्व में हो चुके झरिया आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने भाग लिया।

बैठक में निर्णय लिया गया कि झरिया को बचाने के लिए यह आखिरी आंदोलन होगा। इस आंदोलन में झरिया की जनता पूरी ईमानदारी से लड़ेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बंद आर एस पी कॉलेज को उसी जगह चालू किया जाएगा जहां वह है। इसके लिए कोर्ट जाना पड़े या कहीं और लेकिन बंद कॉलेज को खुलवाया जाएगा। बैठक में भाग ले रह लोगों ने एकसुर से कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झरिया के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है जिसे यहां की जनता सफल नहीं होने देगी।

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