गिरिडीह : ढिबरी युग से मिली निजात, वंचित गांवों तक पहुंची बिजली

NewsCode Jharkhand | 5 May, 2018 3:15 PM
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लोगों में ख़ुशी की लहर

गिरिडीह । आजादी के बाद भी गिरिडीह शहर से सटा एक गांव ढिबरी युग में जी रहा था। लेकिन केंद्र सरकार की ग्राम स्वराज अभियान की पहल से इस गांव के लोगों की बाछे खिल उठी। असल में आजादी के बाद पहली बार सदर प्रखंड के हरसिंघरायडीह पंचायत स्थित तुरी तोला में बिजली पहुँचा था। बिजली आने से ग्रामीण बेहद खुश थे।

दशकों से हो रही थी मांग

सदर प्रखंड से सटे रहने के कारण इस पंचायत  में विकास की किरण तो काफी पहले ही पहुँच गयी थी, लेकिन यहाँ के लोग बिजली युग से महरूम थे। बिजली नहीं पहुँचने से यहाँ के लोग मायूस भी थे और कई बार आंदोलन कर हुक्मरानो तक अपनी आवाज पहुंचाई थी, लेकिन दशकों तक इनकी  बातों को अनसुना किया गया पर इन सब से इतर अब ग्राम स्वराज्य अभियान ने इनके चेहरे में ख़ुशी ला दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट ग्राम स्वराज्य अभियान के तहत इस गांव में बिजली पहुँच गयी।

गिरिडीह : ढिबरी युग से मिली निजात, वंचित गांवों तक पहुंची बिजली

बिजली आने से ग्रामीणों में ख़ुशी

असल में इन दिनों देश के आखरी गांवों तक बिजली पहुँचाने की सरकारी मुहिम चल रही है।इसी कड़ी में तुरी तोला भी रौशन हो उठा। बिजली पोल, तार, बल्ब आदि को ग्रामीण कौतूहल से निहार रहे थे। मौके पर ग्रामीणों ने इस पर बेहद खुशी जाहिर की।

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बिजली आने से सबसे बड़ी  ख़ुशी बच्चों  में देखी जा रही है।ग्राम स्वराज्य अभियान के तहत बिजली पहुँचने से यहाँ के ग्रामीण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तहे दिल से धन्यवाद दे रहे है।समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की योजना पहुंचाने के लिए तमाम प्रशासनिक अधिकारी लगे हुए है। वरीय अधिकारी भी लगातार विकास योजना की समीक्षा कर रहे है।

गिरिडीह : ढिबरी युग से मिली निजात, वंचित गांवों तक पहुंची बिजली

कई गांवों में पहुंची बिजली

हज़ारीबाग प्रमंडल के आयुक्त वंदना दादेल के  मुताबिक ग्राम स्वराज्य योजना के तहत गिरिडीह के 12  गांव में बिजली पहुंचाई गयी है। बहरहाल, बिजली ने न सिर्फ इन्हें मुख्य धारा से जोड़ा है, बल्कि इनके अनंत इंतिजार को भी समाप्त करवाया है। निश्चित रूप से ग्राम स्वराज अभियान सरकार की एक कारगर पहल है।

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चाईबासा : कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता बागुन सुम्ब्रुई का निधन, शोक की लहर

NewsCode Jharkhand | 22 June, 2018 8:47 PM
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चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)कांग्रेस के वयोवृद्ध आदिवासी नेता बागुन सुम्ब्रुई का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार शाम जमशेदपुर में निधन की खबर जैसे ही लोगों तक पंहुची, शोक की लहर फैल गयी। बागुन आदिवासियों के कद्दावर नेता थे, पांच बार सांसद चार बार विधायक रहे। वहीं एकीकृत बिहार में मंत्री और झारखंड विधानसभा के पहले उपाध्यक्ष भी रहे। उनकी पत्नी मुक्तिदानी सुम्ब्रुई भी बिहार में मंत्री रही।

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बागुन सुम्ब्रुई आजीवन सिर्फ एक धोती व एक गमछा में अपना जीवन बिताया। 5 दशक से भी ज्यादा राजनीतिक जीवन में रहने के बावजूद वे न सिर्फ सादगी पूर्ण जीवन जिये, बल्कि चाईबासा के गांधी टोला में आजीवन अपने ससुर के दिए मकान में ही रहे, अपना घर तक नहीं बनाया ।

आदिवासियों के बीच बेहद लोकप्रिय 94 वर्षीय बागुन सुम्ब्रुई के निधन से न सिर्फ कोल्हान को क्षति हुई बल्कि पूरे झारखंड को एक क्षति हुई है।

बागुन सुम्ब्रुई बेबाक टिप्पणी के लिए खासतौर पर जाने जाते थे। इंदिरा और राजीव गांधी के करीबी माने जाने वाले बागुन सुम्ब्रुई ने सोनिया और राहुल पर निशाना साध कर राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी थी, उसके बाद ही उन्हें कांग्रेस में हाशिये पर डाल दिया गया, अंतिम चुनाव 2009 में लड़ने के बाद उन्होंने राजनीति जीवन से सन्यास ले लिया था और चाईबासा में एकाकी जीवन जी रहे थे।

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देवघर : श्रावणी मेला की तैयारी को लेकर डीआरएम ने जसीडीह स्टेशन का किया दौरा

NewsCode Jharkhand | 22 June, 2018 9:55 PM
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देवघर। विश्‍व प्र‍सिद्ध श्रावणी मेला तैयारी को लेकर आसनसोल रेलवे डिवीजन के डीआरएम पीके मिश्रा सहित अन्‍य अधिकारियों ने जसीडीह स्टेशन का दौरा किया। दौरा के दौरान डीआरएम ने मेला शुरु होने से पहले स्‍टेशन का सौन्‍दर्यीकरण व यात्री सुविधाओं को पूरा कर लेने का आदेश रेलवे अधिकारियों को दिया।

गौरतलब है कि स्‍टेशन सौन्‍दर्यीकरण का काम पहले से चल रहा है तथा मेला आरंभ होने से पहले पूरा कर लिया जाना है। डीआरएम ने पत्रकारों से कहा कि इस दौरा का मकसद मकसद जसीडीह रेलवे स्‍टेशन में श्रावणी मेला को लेकर चल रहे कार्यों का जायजा लेना है।

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उन्‍होंने कहा कि सौन्‍दर्यीकरण का काम मेला शुरु होने से पहले शुरु हुआ था जिसे बहुत जल्‍द पूरा कर लिया जाएगा। जो काम बांकी रह गया है उसे जल्‍द से जल्‍द पूरा करने का निर्देश रेलवे अधिकारियों को दिया गया है। कुछ कार्यों के मेला से पहले पूरा होने पर उन्‍होंने संतोष व्‍यक्‍त किया। डीआरएम ने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए जसीडीह स्टेशन में एलईडी हाई मास्ट टावर तीन लगाये गए हैं।

फुटओवर ब्रिज रैंप का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, इससे मेला में आनेवले वयस्‍क लोगों को सुविधा होगी। स्टेशन के बाहरी परिसर का समतलीकरण किया जा रहा है। यह जगह पहले काफी संकरी थी लेकिन समतलीकरण के बादखुला विशाल परिसर यात्रियों को मिलेगा। एक पड़ाव एरिया बनाया जाएगा जिसमें बरसात के समय लगभग 2500 लोग बैठ सकेंगे और आराम कर पाएंगे।

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कोडरमा : खदान में मजदूर के सिर पर गिरा पत्थर का टुकड़ा, मौके पर मौत

NewsCode Jharkhand | 22 June, 2018 9:22 PM
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कोडरमा। जिले के नवलशाही थाना क्षेत्र अन्तर्गत बच्छेडीह पंचायत के जमडीहा मौजा में संचालित पत्थर खदान में कार्यरत मजदूर के सिर पर पत्थर का टुकड़ा धंसकर गिरने से मौके पर उसकी मौत हो गई, जबकि एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान पवन दास (24 वर्ष) व घायल की पहचान अनिल कुमार दास (28 वर्ष) के रूप में की गई है। दोनों थानाक्षेत्र के जमडीहा के रहनें वाले हैं।

कोडरमा : विकास योजनाओं की समीक्षा, उपायुक्त ने दिए कई निर्देश

घटना शुक्रवार की सुबह सात बजे की बताई गई है। जानकारी अनुसार दोनों मजदूर सुबह खदान में पहुंच कर ड्रिल किये गये होल में ब्लास्टिंग के लिए मशाला भरने का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान ऊपर करीब पैंतीस से चालीस फिट की ऊँचाई से एक बड़ा पत्थर का हिस्सा सीधा पवन के सिर पर गिर गया जिससे सिर पूरी तरह जख्मी हो गया, जिससे पवन ने मौके पर दम तोड़ दिया, जबकि अनिल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद नवलशाही थाना प्रभारी मो शाहीद रजा व एसआई राम कृत प्रसाद मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कोडरमा भेज दिया। तत्पश्चात पुलिस मामले की जांच में जुट गयी।

नहीं था सेफटी का इंतजाम

खदान में कार्यरत मजदरों के सुरक्षा और बचाव के उपाय के इंतजाम नहीं थे। अशोक कुमार गुप्ता और सुरेश चन्द्र साव की उक्त खदान में कार्यरत मजदूरों को न तो खदान संचालक द्वारा सेफटी किट दिये गये थे और ना हीं वहां फस्ट एड की व्यवस्था थी। खदान में बेतरतीब तरीके से कार्य करवाये जा रहे थे और सेफटी नियमों का पूरी तरह उल्लंघन किया जा रहा था। अधिकांश संचालित पत्थर खदानों में यही स्थिति है। जब कोई दुर्घटना होती है तो पत्थर खदान के मालिक या संचालक लाश की सौदेबाजी में जुट जाते हैं और पुलिस को मेल में लेकर मामले को रफा दफा करवा देते है।

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