चाईबासा : गुणवत्ता परियोजनाओं में टाटा स्टील के ओएमक्यू डिवीजन को एक्सीलेंस अवार्ड

400 से अधिक टीमों ने लिया हिस्‍सा

NewsCode Jharkhand | 8 December, 2017 11:27 AM

चाईबासा : गुणवत्ता परियोजनाओं में टाटा स्टील के ओएमक्यू डिवीजन को एक्सीलेंस अवार्ड

चाईबासा। क्वालिटी सर्किल फोरम ऑफ इंडिया द्वारा मैसूर में 30 नवंबर से 4 दिसंबर तक आयोजित नेशनल कन्वेंशन ऑन क्वालिटी कॉन्सेप्ट्स-2017 (NCQC-2017) में ओएमक्यू डिवीजन, टाटा स्टील ने अपने विभिन्न गुणवत्ता परियोजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उच्च श्रेणी के एक्सीलेंस अवार्ड जीता है।
ड्राई प्लांट ऐंड लॉजिस्टिक्स, जोडा ईस्ट आयरन माइन, प्रोसेसिंग प्लांट, नोआमुंडी आयरन माइन ऐंड लॉजिस्टिक्स और नोआमुंडी आयरन माइन को उत्पादकता, पर्यावरण और सुरक्षा में उनके योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया।

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इक्विपमेंट मेंटेनेंस, नोआमुंडी आयरन माइन से ‘मंथन अब शॉप फ्लोर (मास)’ की एक टीम को भी कार्यस्थल पर अर्गोनॉमिक्स में सुधार की दिशा में इसके योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया। इस एनसीक्यूसी में विभिन्न प्रतिष्ठानों से 400 से अधिक टीमों ने हिस्सा लिया।

बैंक घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, डायमंड पॉवर की 1122 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की

NewsCode | 24 April, 2018 7:51 PM

बैंक घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, डायमंड पॉवर की 1122 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को 2,654.40 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में वड़ोदरा स्थित डायमंड पॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (डीपीआईएल) कंपनी की 1,122 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त कर ली।

ईडी ने डीपीआईएल व इससे जुड़ी कंपनियों डायमंड पॉवर ट्रांसफार्मर लिमिटेड (डीपीटीएल), डायमंड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, मेफेयर लीजर्स व नार्थवे स्पेसेज की संपत्तियों को जब्त किया है।

ईडी के एक अधिकारी ने कहा, जब्त की गई संपत्तियों में संयत्र, मशीनरी, इमारतें व वड़ोदरा में डीपीटीएल व डीपीआईएल की जमीन व भुज में तीन विंडमिल जब्त की है। इसमें नॉर्थवे स्पेसेज के बिना ब्रिकी के फ्लैट, मेफेयर लीजर्स का एक निर्माणाधीन होटल डीपीआईएल से जुड़ी कंपनियों के भूखंड, सभी को जब्त किया गया है। यह सभी वड़ोदरा में स्थित हैं।

ईडी ने धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत डायमंड पॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों-निदेशकों-सुरेश नारायण भटनागर, उनके दोनों बेटों अमित सुरेश भटनागर व सुमित सुरेश भटनागर की कुछ आवासीय बंगलों व फ्लैट को भी जब्त किया है।

डीपीआईएल केबल व दूसरे बिजली के उपकरणों के व्यापार से जुड़ी है। डीपीआईएल पर कथित तौर पर साल 2008 से धोखाधड़ी से उधार की सुविधा का लाभ लेने का आरोप है। कंपनी पर 29 जून, 2016 तक 2,654.40 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है, जिसे बैंकों के एक संघ व निजी संगठन द्वारा मंजूर किया गया था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज किए जाने के 23 दिनों बाद 18 अप्रैल को राजस्थान के उदयपुर से तीनों को गिरफ्तार किया था। सीबीआई मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों की भी जांच कर रही है।

सीबीआई द्वारा दाखिल प्राथमिकी के आधार पर दायर धनशोधन मामले के तहत ईडी वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रहा है।

ईडी की जांच में अब तक खुलासा हुआ है कि डीपीआईएल कई पक्षों के साथ बड़ी राशि के हेरफेर में लिप्त है। इसमें डीपीआईएल से जुड़े पक्ष भी शामिल हैं, जिन्हें बिना किसी सामान के खरीद या ब्रिकी के बगैर फर्जी बिल जारी किए गए।

उन्होंने कहा, “इसे सीईएनवीएटी कर्ज धोखाधड़ी के साथ-साथ वित्तीय रिकार्ड में बैंक के समक्ष कारोबार में बढ़ोतरी को दिखाने की दोहरी मंशा के साथ किया गया। डीपीआईएल ने अपने देनदारों से 1,000 करोड़ रुपये के करीब अपने लेखा खातों में प्राप्त होने की फर्जी प्रविष्टि दिखाई और डीपीआईएल ने इसी लेखा खातों के आधार पर बैंकों से कर्ज लेना जारी रखा।”

ईडी ने कहा, “इसमें से ज्यादातर आकड़े बढ़ाचढ़ाकर दिखाए गए हैं।”

इसमें कहा गया कि डीपीआईएल अपने संबंधित पक्षों के जरिए बैंकों से प्राप्त लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधा में गड़बड़ी करके 261 करोड़ रुपये की राशि फर्जी तरीके से प्राप्त करने में सक्षम थी।

इसमें कहा गया, “डीपीआईएल ने कर्ज के तौर पर प्राप्त की गई भारी राशि का इस्तेमाल नॉर्थवे स्पेसेज व मेफेयर लीजर्स जैसी रियल एस्टेट कंपनियों में किया।”

ईडी ने कहा कि भटनागर परिवार, अपनी वेब कंपनियों व पूरे स्वामित्व के जरिए मुख्य निर्णय निर्माता के तौर पर पाए गए और इस तरह से वे डीपीआईएल व इससे जुड़ी सभी कंपनियों के मालिक हैं।

सीबीआई ने 26 मार्च को डीपीआईएल व इसके निदेशकों के खिलाफ 11 बैंकों के संघ के साथ धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज किया। इनके द्वारा लिए गए कर्ज को 2016-17 में गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित किया गया था।

बैंकों के संघ द्वारा कर्ज सीमा की मंजूरी के समय यह कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक की डिफाल्टरों की सूची में तथा एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉर्प ऑफ इंडिया (ईसीजीसीआई) की सतर्कता सूची में शामिल थी, फिर भी यह मियादी कर्ज व ऋण सुविधा हासिल करने में सफल रही थी।

कर्ज देने वालों की सूची में बैंक ऑफ इंडिया 670.51 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर, इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा (348.99 करोड़ रुपये), आईसीआईसीआई (279.46 करोड़ रुपये), एक्सिस बैंक (255.32 करोड़ रुपये), इलाहाबाद बैंक (227.96 करोड़ रुपये), देना बैंक (177.19 करोड़ रुपये), कॉरपोरेशन बैंक (109.12 करोड़ रुपये), एग्जिम बैंक ऑफ इंडिया (81.92 करोड़ रुपये), आईओबी (71.59 करोड़ रुपये) व आईएफसीआई (58.53 करोड़ रुपये) शामिल हैं।

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सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया है कि डीपीआईएल अपने संस्थापकों व निदेशकों के जरिए विभिन्न बैंकों के अज्ञात बैंक अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश में शामिल रही है। डीपीआईएल ने इन बैंकों के साथ फर्जी खातों, फर्जी दस्तावेजों के जरिए सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की है।

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आईएएनएस

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अभी से शुरू करें रिटायरमेंट प्लानिंग, ये हैं निवेश के सही विकल्प

NewsCode | 24 April, 2018 12:58 PM

अभी से शुरू करें रिटायरमेंट प्लानिंग, ये हैं निवेश के सही विकल्प

पूरी जिंदगी तो पैसा कमाने और जिम्मेदारियां निभाने में बीत जाती है। इसके बाद हर किसी को अगर कुछ चाहिए होता है तो वो है सुकून भरा रिटायरमेंट। लेकिन, अमूमन देखा जाता है कि बच्चों के माता-पिता उनकी पढ़ाई, शादी, घर खरीदने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग तो करते हैं, लेकिन रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करना भूल जाते हैं।

जो लोग कुछ प्लानिंग करते भी हैं, वह अक्सर उनकी भावी जरूरतों और जीवन शैली को देखते हुए नाकाफी ठहरती है। इसलिए बहुत जरूरी है कि रिटायरमेंट की प्लानिंग करते वक्त दिमाग को पूरी तरह खुला रखा जाए और एक सुलझा हुआ रवैया अपनाते हुए ऐसी योजना तैयार की जाए कि बाद में पछताना और परेशानियों का सामना न करना पड़े। ऐसा न करने पर लोग अपनी रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को मुश्किल में डाल देते हैं।

इसलिए बेहतर यह होगा कि करियर की शुरुआत से ही हमें अपने रिटारमेंट के लिए बचत करनी शुरू कर देनी चाहिए। अपने रिटायरमेंट के लक्ष्य को पाने के लिए निवेश के सही विकल्पों को चुनना जरूरी है।

1. शेयर

लंबी अवधि के नजरिए से शेयर निवेश का सबसे बढ़िया विकल्प हैं। लेकिन शेयरों में सीधा निवेश करने के लिए वक्त और विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है। इसलिए बेहतर होगा की शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले किसी विशेषज्ञ से जानकारी ले ली जाए और उसके बाद शेयर में निवेश किया जाए।

2. एंप्लॉइई प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ)

नौकरीपेशा लोगों के लिए ईपीएफ रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अच्छा जरिया है। अनिवार्य निवेश होने की वजह से रिटायरमेंट के वक्त ईपीएफ से अच्छे खासे पैसे मिल सकते हैं। सैलरी में से 12 फीसदी ईपीएफ में जाता है। इसकी ब्याज दर 8.75 फीसदी है।

ये रिटयरमेंट सेविंग्स स्कीम है। सैलरी पाने वाले ही इसका फायदा उठा सकते हैं। लेकिन आप पूरी रिटायरमेंट प्लानिंग नहीं कर सकते। इसमें निवेश, रिटर्न और मैच्योरिटी पर टैक्स नहीं लगता है। ईपीएफ में निवेश का सबसे बड़ा फायद यह है कि इससे किसी भी समय पैसा निकाला जा सकता है।

3. पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)

लंबी अवधि के निवेश के लिए पीपीएफ भी बेहतरीन विकल्प है।  इसमें सिर्फ पैसा जमा करना है और इसपर ब्याज लेना है। पीपीएफ में मैच्योरिटी के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में निवेश बनाए रखने की सुविधा भी है। इसका ब्याज पूरा टैक्स फ्री होता है। इसकी ब्याज दर 8.7 फीसदी है।  पीपीएफ आसान और सुरक्षित निवेश का जरिया है जिसके लिए आपको बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाकर इसकी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

4. म्यूचुअल फंड

छोटे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड निवेश का सबसे अच्छा जरिया है। अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश लक्ष्य के हिसाब से निवेशक म्यूचुअल फंड स्कीम का चुनाव कर सकते हैं। अगर लंबी अवधि के लिए निवेश करना है तो म्यूचुअल फंड में एसआईपी कर सकते हैं। इसमें भी 2 विकल्प हैं। चाहें तो आप म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं और चाहे तो इक्विटी में सीधा निवेश भी कर सकते हैं।

5. फिक्स्ड डिपॉजिट

फिक्स्ड डिपॉजिट आम लोगों के बीच खासा लोकप्रिय विकल्प है जिससे नियमित मासिक आय प्राप्त की जा सकती है। टैक्स के लिहाज से चाहे निवेश का बेहतरीन विकल्प न हो, लेकिन निवेश से ऊंची ब्याज दरों का फायदा उठाना है तो फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करना आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। मगर इस बीच यह बता दें कि बैंक ब्याज से होने वाली 10 हजार या इससे अधिक की आय पर 10 फीसदी टीडीएस काटता है। यानी ब्याज से होने वाली आय टैक्स स्लैब के मुताबिक कर योग्य होती है।

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6. इक्विटी

इक्विटी के जरिए लंबी अवधि में अच्छा कोष इक्ट्ठा कर सकते हैं, हालांकि इसमें थोड़ा जोखिम है और इसमें आपको अपने निवेश के ऊपर नजर रखनी होती है। इक्विटी निवेश में बड़े जोखिम के साथ बड़े मुनाफे का फंडा काम करता है। इक्विटी खरीदने के पहले शेयर की कीमत जरूर देख लें। शेयर निवेश के पहले बाजार की बुनियादी जानकारी रखना जरूरी है।

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भारत में अभी भी 19 करोड़ लोगों के पास बैंक खाता नहीं, क्या कहते हैं पाकिस्तान और चीन के आंकड़े

विश्व बैंक का कहना है कि दुनियाभर में कुल 1.7 अरब वयस्क बैंकिंग सेवाओं से वंचित हैं और उनका किसी बैंक या वित्तीय संस्था में कोई खाता नहीं है।

NewsCode | 23 April, 2018 2:29 PM

भारत में अभी भी 19 करोड़ लोगों के पास बैंक खाता नहीं, क्या कहते हैं पाकिस्तान और चीन के आंकड़े

नई दिल्ली। दुनिया तेजी से डिजिटल होती जा रही है। एक जमाना था, जब हर काम नकदी से होता था, लेकिन अब क्रेडिट और डेबिट कार्ड चलता है। सरकार भी ‘डिजिटल इंडिया’ को जोर-शोर से प्रमोट करती है और कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि आज के जमाने में कोई व्यक्ति ऐसा भी होगा, जिसका कोई बैंक खाता नहीं है।

मगर सच्चाई यह है कि दुनिया की एक बड़ी आबादी बैंकिंग सेवाओं से महरूम है और ऐसे वंचित लोगों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी भारत में है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के करीब 19 करोड़ वयस्कों का कोई बैंक खाता नहीं है, जबकि यह चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। हालांकि देश में खाताधारकों की संख्या वर्ष 2011 में 35 फीसदी से बढ़कर 2017 में 80 फीसदी हो चुकी है।

विश्व बैंक द्वारा जारी ‘वैश्विक फाइंडेक्स रिपोर्ट’ में कहा गया है, “हालांकि भारत में वित्तीय समावेशन में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और खाताधारकों की संख्या जो 2011 में 35 फीसदी थी वह 2014 में बढ़कर 53 फीसदी हो गई और अब 2017 में बढ़कर 80 फीसदी हो गई है। लेकिन देश की 80 फीसदी आबादी द्वारा बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने के बावजूद बहुत बड़ी आबादी है, जो बैंकिंग सेवाओं से वंचित है और यह हाल केवल अपने देश का नहीं है, बल्कि चीन में ऐसे लोगों की संख्या कहीं ज्यादा है, जिनके पास बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।”

चीन और पाकिस्तान की क्या है स्थिति ?

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में 22.5 करोड़ वयस्क बैंकिंग सेवाओं से वंचित है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 19 करोड़ का है। इसके बाद पाकिस्तान में 10 करोड़ और इंडोनेशिया में 9.5 करोड़ वंचित आबादी है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, “इन चार अर्थव्यवस्थाओं के साथ तीन अन्य देश नाइजीरिया, मैक्सिको और बांग्लादेश को मिलाने पर बैंकिंग सेवाओं से वंचित दुनिया की आधी आबादी बनती है।”

विश्व बैंक का कहना है कि दुनियाभर में कुल 1.7 अरब वयस्क बैंकिंग सेवाओं से वंचित हैं और उनका किसी बैंक या वित्तीय संस्था में कोई खाता नहीं है। दुनिया की उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में विरले ही कोई वयस्क मिलेगा, जिसके पास बैंक में खाता न हो। इसलिए बैंकिंग सेवाओं से विहीन आबादी ज्यादातर विकासशील देशों- जैसे चीन, भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मैक्सिको, नाइजीरिया और पाकिस्तान में पाई जाती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों में बैंकिंग सेवाओं के मामले में भी लिंगभेद दिखता है। वैश्विक स्तर पर 72 फीसदी पुरुषों और 65 फीसदी महिलाओं के पास बैंक खाते हैं, इस तरह लैिंगक भेद 7 फीसदी का है, जबकि विकासशील देशों में बैंक खाते रखने के मामलों में लैंगिक भेद 9 फीसदी का है। वहीं, भारत में पुरुषों की तुलना में बैंकिंग सेवाओं से वंचित महिलाओं की संख्या करीब 56 फीसदी हैं।

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की सह-अध्यक्ष मेलिंडा गेट्स का कहना है, “हमें महिलाओं तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि उनके जीवन में बदलाव आ सके। जब सरकार समाज कल्याण योजनाओं का भुगतान या अन्य सब्सिडी का भुगतान सीधे महिलाओं के बैंक खातों में करती है, तो इससे उन्हें अपने घरों में निर्णय लेने की हैसियत प्राप्त होती है। विभिन्न वित्तीय टूल्स की मदद से, वे अपने परिवार की समृद्धि के लिए निवेश करती हैं, जिससे व्यापक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।”

विश्व बैंक के आंकड़ों में हालांकि कहा गया है कि भारत सरकार की ‘जन धन योजना’ नीति से देश में खाताधारकों की संख्या नाटकीय रूप से बढ़ी है।

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, जन धन खाताधारकों की संख्या साल 2017 के मार्च में 28.17 करोड़ थी, जो 2018 के मार्च में बढ़कर 31.44 करोड़ हो गई। देश में 2015 के मार्च में कुल चालू और बचत खातों की संख्या 122.3 करोड़ थी, जो 2017 के मार्च में बढ़कर 157.1 करोड़ हो गई। साथ ही 2017 की तुलना में 2017 में बैंक खातों के मामले में लैंगिक भेद कम हुआ है और अब 83 फीसदी पुरुषों व 77 फीसदी महिलाओं के पास बैंक खाते हैं।

विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष जिम योंग किम का कहना है, “पिछले कुछ सालों में हमने लोगों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं से जोड़ने में बड़ी प्रगति देखी है। वित्तीय समावेशन से लोगों को पारिवारिक जरूरतों के लिए या व्यापार में मदद के लिए ऋण हासिल होता है, साथ ही यह किसी आपातस्थिति में भी संबल का काम करता है।”

उन्होंने कहा, “वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच मुहैया कराना गरीबी और असमानता को मिटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नए आंकड़ों से पता चलता है लोगों कि मोबाइल फोन और इंटरनेट तक पहुंच बढ़ी है। इसलिए, वित्तीय समावेशन को प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का अभूतपूर्व अवसर सामने खड़ा है।”

साल 2014 से 2017 के बीच दुनियाभर में 51.4 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं।

आईएएनएस

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