Eid 2018: इस बार ईद पर पारंपरिक सेवइयों को दें नया ज़ायका

NewsCode | 15 June, 2018 11:31 AM
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नई दिल्ली। इन दिनों दुनिया भर में मुसलमान पूरे रोज़ा रख रहे हैं। इस पाक महीने को रमज़ान के नाम से भी जाना जाता है। आज संभवतः इस साल का आखिरी रोज़ा होगा और कल 16 जून को धूमधाम से ईद-उल-फितर मनाया जाएगा। ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है।  इस दिन लोग खास इबादत करते हैं और एकदूसरे से गले मिलते हैं। मीठी ईद के मौके पर सेवइयां बनाई जाती है जिसे इस दिन खूब चाव से खाया जाता है।
जानकार बताते हैं कि ईद के मुबारक मौके पर जो सेवई परोसी जाती है, उसे बनाने में बहुत मेहनत लगती है। आमतौर पर इस खुशी के मौके पर अच्छा स्वाद पाने के लिए लोग पूरी रात सेवई बनाते हैं। सेवई दो तरह से बनाई जाती है- प हला शीर और दूसरा किमामी सेवई। शीर खाने में बहुत ही लजीज़ होती है जिसे दूध और मेवा के साथ पकाया जाता है, वहीं किमामी सेवई सूखी होती है और इसे चाशनी में पकाया जाता है। हालांकि लोगों ने इसे कई अन्य तरीको से बनाने शुरू कर दिया है।
तो चलिए आज हम भी आपको सेवई की कुछ ऐसी बेहतरीन रेसिपीज़ बताते हैं जिन्हें इस साल आप ईद के मौके पर बना सकते हैं।

शीर कुर्मा

ईद के अवसर पर सेवइयां जरूर बनाई जाती है, शीर कुर्मा सेवई, खूजर, दूध, नारियल, इलाइची, खस और बादाम से तैयार की जाती है। शीर का अर्थ फारसी और कुर्मा का मतलब खजूर है। यह रेसिपी आपकी ईद और रमजान को और भी स्पेशल बना देगी।

किमामी सेवई

इसमें सेवई को घी में भुना जाता है, शहद और चीनी के साथ इसमें स्वाद के लिए जायफल भी डाला जाता है तो इस बार ईद पर किमामी सेवई बनाकर घर आने वाले मेहमानों का दिल जीतें।

गुलकंद सेवई

ईद के इस त्योहार को और मीठा बनाने के लिए सेवई में आप चीनी के साथ गुलकंद डालकर इसे ट्विस्ट दें सकते हैं। आपको सेवई का यह स्वाद बेहद ही पसंद आएगा। साथ ही गुलकंद सेवई में गुलाब जल डालना न भूलें।

पारसी सेव

 
यह एक बेहतरीन डिजर्ट रेसिपी है, सेवइयां की इस रेसिपी में वनिला एसेंस, चीनी, इचाइची, किशमिश और बादाम डाले जाते हैं। पारसी सेव की यह रेसिपी इस बार घर आए गेस्ट्स को जरूर सर्व करें. ध्यान रहे इसे आप गर्म सर्व करें।

सेवई विद पीच मुरब्बा

 
यह सेवई का एक और नया वर्जन है जिसमें सेवई को मक्खन, मसाले, चीनी और आड़ू के मुरब्बे में पकाया जाता है। यह सुनने में एक विदेशी डेज़र्ट की तरह लगता है? खैर, इसका स्वाद आपको बहुत पसंद आएगा। इस सेवई में डबल क्रीम, पाइन नट्स, लौंग और गुड़ भी डाला जाता है।

आॅरेंज किनोआ सेवई

सेवई एक लोकप्रिय इंडियन डिज़र्ट है जिसे आॅरेंज किनोआ का ट्विस्ट देकर तैयार किया गया है।  गुड़ और नट्स इसके स्वाद को और भी बढ़ा देते हैं।

सेवई की बर्फी

यह एक बहुत ही बढ़िया फेस्टिवल डिज़र्ट है, सेवई की बर्फी रोस्टड सेवई, चीनी, दूध और खोए से तैयार की जाती है। ड्राई फ्रूट्स इसके स्वाद को और भी बढ़ा देते हैं।

रांची : मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पर विशेष तीर्थयात्री रेलगाड़ी से जाएंगे अजमेर

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 2:28 PM
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रांची। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत बीस नवंबर को हटिया रेलवे स्टेशन से दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के दो सौ बीस चयनित तीर्थयात्री विशेष रेलगाड़ी से अजमेर शरीफ की यात्रा पर जाएंगे।

मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत रांची, खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा और गुमला जिले के मुस्लिम धर्मावलंबी तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं। इस संबंध में झारखंड पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक द्वारा भेजे गये पत्र के आलोक में रांची जिले के उपायुक्त ने सभी जिले के प्रखंड विकास पदाधिकारियों को सुयोग्य, बीपीएल कार्डधारी वरिष्ठ मुस्लिम नागरिकों को चिन्हित कर उनका आवेदन भेजने का आदेश दिया है।

सरकार की महत्वकांक्षी मुख्यमंत्री तीर्थयोजना के तहत रांची जिले के 60, खुटी जिले के 40, लोहरदगा जिले  के 40, सिमडेगा जिले के 40 एवम् गुमला जिले के 40  मुस्लिम धर्मावलंबी तीर्थ दर्शन के लिए अजमेर शरीफ जाएगें।

उपरोक्त विषय को लेकर झारखण्ड टुरिजम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिडेट राँची के प्रबंध निदेशक द्वारा भेजे गए पत्र के आलोक में उपायुक्त रांची ने सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारीयों को निर्देश जारी किया है। जिसमे  सुयोग्य बीपीएल धारी वरिष्ठ मुस्लिम नागरिकों को चयनित कर विहित प्रपत्र में आवेदन समर्पित करने को कहा है।

निर्देश में ये भी कहा गया है  कि विहित प्रपत्र में आवेदन के साथ भेजे जाने वाले नागरिकों का चिकित्सा  प्रमाण पत्र भी संलग्न करना जरूरी है। विदित हो  कि सूची  के आधार पर चयनित रांची जिले के 60  वरिष्ठ मुस्लिम धर्मावलंबी  नागरिकों को 20 नवम्बर 2018 को हटिया स्टेशन से तीर्थ दर्शन के लिए रवाना किया जाएगा।

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पलामू : अर्घ्य देने के लिए नहाने के क्रम में पानी में डूबने से अधेड़ की मौत

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 8:24 PM
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पलामू। लेस्लीगंज तालाब में छठ पर्व पर अर्ध्य देने के लिए नहाने के दौरान डूबने से अधेड़ की मौत हो गयी। तीन से चार घंटे की मशक्कत के बाद तालाब से शव बाहर निकाला जा सका। शव की पहचान लेस्लीगंज निवासी कुंज बिहारी भुइयां (58वर्ष) के रूप में हुई है।

कुंज बिहारी भुइयां की पत्नी छठ व्रत की थी। सुबह करीब पांच बजे उदीयमान सूर्य के अर्ध्य लेने के लिए कुंज बिहारी तालाब में नहा रहा था। तालाब में इस पार से उस पार जाने के क्रम में कुंजबिहारी पानी की गहराई में समा गया। काफी देर तक जब उसका कुछ अता-पता नहीं चला तो उसकी खोजबीन शुरू की गयी। पूर्वाहन में उसका शव तालाब से बरामद किया जा सका।

कल तक छठ व्रत पर खुशी-खुशी भगवान सूर्य को अर्ध्य देने की तैयार में जुटा कुंजबिहारी के परिवार के सदस्यों को उसकी मौत की सूचना जैसे ही मिली, उनके बीच चीख-पुकार मच गयी। पत्नी और बच्चे दहाड़ मारकर रोने लगे।

सूचना मिलने पर लेस्लीगंज बीडीओ विजय प्रकाश मरांडी और थाना प्रभारी वीरेन मिंज मौके पर पहुंचे। बाद में गोताखोरों को बुलाकर तालाब में छानबीन की गयी। शव मिलने के बाद पुलिस ने उसे कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में कराया। कुंजबिहारी भुईयां के तीन लड़के व दो लड़कियां हैं, सभी शादीशुदा हैं।

मौके पर भाजपा नेता अमित उपाध्याय, लेस्लीगंज मुखिया धर्मेंद्र सोनी, कोट पंचायत मुखिया संतोष मिश्रा, तारकेश्वर पासवान सहित कई लोगों ने शव को निकलवाने में पहल की।

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कहीं समारोह तक ही सीमित न रह जाये स्थापना दिवस- योगेन्द्र प्रताप

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 8:05 PM
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रांची। झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा की धरती माने जाने वाला झारखंड आज अपनी 18वीं सालगिरह मना रहा है। कह सकते हैं कि आज हमारा झारखंड बालिग हो गया। झाविमो की ओर से सर्वप्रथम भगवान बिरसा को नमन।

हर साल सरकार स्थापना दिवस तो धूमधाम से मनाती है परंतु अफसोस यह आयोजन महज एक समारोह तक ही सीमित होकर रह जाता है। सरकार जो संकल्प लेती है, जिन योजनाओं की घोषनाएं या शिलान्यास करती है वह धरातल पर कितनी उतर पाती हैं, पूर्व की घोषनाओं का कितना लाभ जनमानस को मिला है, सरकार को कभी उसकी भी समीक्षा कर लेनी चाहिए।

2014 के बाद के भाजपा सरकार द्वारा 2015 से लेकर 2017 यानि तीन स्थापना दिवस के मौके पर की गयी घोषनाओं पर गौर डाला जाय तो उनमें से अधिकांशतः घोषनाएं हवा-हवाई ही साबित हुई है, कुछ धरातल पर उतरी भी तो बाद में उसका हश्र भी बुरा ही हुआ।

मुख्यमंत्री तो घोषणा इतनी कर चुके हैं कि अगर आधी भी सरजमीं पर उतर गई होती तो अब तक झारखंड समृद्ध हो गया होता। 2015 के समारोह में सीएम ने कहा था कि जनता राम-सीता है और वे हनुमान हैं। वे जनता के सेवक हैं तथा जनता और उनके बीच दूरी नहीं होगी।

अब जो सरकार अपने ही गृहनगर के दूसरे पायदान का दर्जा रखने वाले एक मंत्री से चार वर्षो में दूरी नहीं पाट सके, जनता की दूरी भला क्या पाटेंगे। पिछले तीन स्थापना दिवस के दौरान और भी कई बातें हुई।

झारखंड को निवेशकों की पहली पसंद बनाने, औद्योगिक घरानों के लिए एक लाख हेक्टेयर भूमि चिन्ह्ति करने की बात हुई। सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बतानी चाहिए कि किन निवेशकों ने राज्य में कितने का निवेश किया है और किस उद्योग को कितनी जमीन आवंटित की गई तथा इससे जनता को क्या लाभ हो रहा है।

एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक स्मार्ट सड़क, केन्द्र से 10000 करोड़ की सड़क निर्माण, जोहार योजना, मुख्यमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना, जनता के लिए लांच किये 15 मोबाईल एप, कृषि रथ, बेरोजगारी व पलायन रोकने के लिए कौशल विकास योजना, 25 डाइविंग ट्रेनिंग सेंटर, 2017 गरीब कल्याण वर्ष, 37 नदियां जलमार्ग में विकसित की योजना, 108 एंबुलेंस, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, हरमू फ्लाईओवर आदि तमाम योजनाओं का आज क्या हश्र है।

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा में 50 हजार से लेकर दो लाख तक निःशुल्क इलाज की बात है परंतु यहां रिम्स में महज 50 रूपये के लिए मौत हो रही है। एंबुलेंस के बिना मरीज मर रहे हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

तमाम योजनाएं महज कागजी हैं परंतु सरकार केवल अपनी पीठ खुद थपथपाने की आदी हो चुकी है। झाविमो का मानना है कि राज्य अलग होने की सार्थकता तभी होगी जब राज्य की जनता वास्तव में खुशहाल होगी न कि केवल घोषनाओं से।

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