मुहर्रम के दिन नहीं होगा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन: ममता बनर्जी

NewsCode | 24 August, 2017 2:42 PM
newscode-image

कोलकाता| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा के बाद होने वाले मूर्ति विसर्जन को लेकर बयान दिया है| पिछले साल की तरह इस बार भी मोहर्रम और दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन एक दिन पड़ रहे हैं| इस मामले पर बुधवार को ममता ने दुर्गा पूजा आयोजकों, मुस्लिम समुदाय और अन्य धर्मों के नेताओं के साथ एक बड़ी बैठक की| इसके पश्चात् उन्होंने मूर्ति विसर्जन को लेकर जो भी आदेश दिए, उन्हें लेकर विवाद हो गया| बीजेपी ने इस पर काफी एतराज जताया है| इसके बाद ममता ने अपने आदेश को लेकर ट्वीट किया|

मीटिंग में ममता ने कहा था कि चार दिन तक चलने वाले दुर्गा पूजा उत्सव की समाप्ति के बाद 30 सितंबर को होने वाले दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के लिए शाम 6 बजे तक की अनुमति दी जाएगी| इसके बाद यह सीधे 2 अक्टूबर को, मोहर्रम की समाप्ति के बाद, फिर से शुरू किया जा सकेगा| 1 अक्टूबर को मोहर्रम के चलते ताज़िए निकाले जाएंगे| ममता ने कहा था- कुछ लोग धार्मिक आधार पर दिक्कत पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं| हर धर्म हमारा है| लेकिन यदि किसी पूजा पंडाल के पास से गुजरते हुए जुलूस के चलते समस्या हो सकती है तो इससे हम प्रभावित हो सकते हैं|

इसके बाद जब ममता के आदेश को लेकर विवाद बढ़ा तो उन्होंने ट्वीटर पर सफाई दी कि “मुहर्रम के दिन 24 घंटे की अवधि को छोड़कर, विसर्जन 2 , 3 और 4 अक्टूबर को हो सकता है|”

इसी तरह पिछले साल भी राज्य सरकार ने मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध जारी किया था| 2016 में 11 अक्टूबर को दशहरा था और 13 अक्टूबर को मोहर्रम| ममता के इस आदेश के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के दौरान कोलकाता हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी|

UGC का फरमान- 29 सितंबर को यूनिवर्सिटी मनाएं ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’, कांग्रेस ने की आलोचना

NewsCode | 21 September, 2018 5:34 PM
newscode-image

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को 29 सितंबर को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ के तौर पर मनाने का आदेश दिया है। UGC ने सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने के लिए सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में पूर्व सैनिकों से संवाद सत्र, विशेष परेड, प्रदर्शनियों का आयोजन और सशस्त्र बलों को अपना समर्थन देने के लिए उन्हें ग्रीटिंग कार्ड भेजने समेत अन्य गतिविधियां आयोजित करने का सुझाव भी दिया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आयोग ने सभी कुलपतियों को गुरुवार को भेजे एक लेटर में कहा, ‘सभी विश्वविद्यालयों की एनसीसी की इकाइयों को 29 सितंबर को विशेष परेड का आयोजन करना चाहिए जिसके बाद एनसीसी के कमांडर सरहद की रक्षा के तौर-तरीकों के बारे में उन्हें संबोधित करें।’

यूजीसी ने कहा कि विश्वविद्यालय सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में छात्रों को संवेदनशील करने के लिए पूर्व सैनिकों को शामिल करके संवाद सत्र का आयोजन कर सकते हैं।

पत्र में कहा गया है, ‘इंडिया गेट के पास 29 सितंबर को एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह की प्रदर्शनियों का आयोजन राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, अहम शहरों, समूचे देश की छावनियों में किया जा सकता है। इन संस्थानों को छात्रों को प्रेरित करना चाहिए और संकाय सदस्यों को इन प्रदर्शनियों में जाना चाहिए।’

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने की आलोचना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने ट्विटर पर यूजीसी के इस निर्णय की आलोचना की है। उन्होंने लिखा है, ‘यूजीसी ने सभी यूनिवर्सिटीज को 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे के रूप में मनाने का आदेश दिया है। यह लोगों को शिक्षित करने के लिए बना है या बीजेपी के राजनीतिक हित साधने के लिए? क्या यूजीसी 8 नवंबर (नोटबंदी) को गरीबों का निवाला छीनने के सर्जिकल स्ट्राइक दिवस के रूप में मनाने की हिम्मत कर पाएगा? यह एक और जुमला है!

वहीं, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि यूनिवर्सिटीज सर्जिकल स्ट्राइक दिवस को मनाने के लिए बाध्य नहीं हैं। जावड़ेकर ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक को समर्पित इस कार्यक्रम को मनाने का सुझाव हमें कई शिक्षकों और विद्यार्थियों से मिला था, इसलिए हमने इसके आयोजन का फैसला किया है।

गौरतलब है कि भारत ने 29 सितंबर 2016 को PoK में नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादियों के सात अड्डों पर लक्षित कर हमले किए थे। सेना ने कहा था कि विशेष बलों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठ की तैयारी में जुटे आतंकवादियों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भारत के उरी कैंप पर हमला किया और भारत के 19 जवान शहीद हुए थे। उरी हमले के करीब दस दिन बाद 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तहस-नहस कर दिया था।


सर्जिकल स्ट्राइक के नए वीडियो पर भड़की कांग्रेस, कहा-बलिदान को वोट में बदलने की कोशिश कर रही BJP

अब झूठ नहीं बोल पाएगा पाकिस्तान, पहली बार सामने आया PoK में टेरर कैंपों पर सर्जिकल स्ट्राइक का Video

जम्मू-कश्मीर: 3 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद 7 SPO का इस्तीफा, गृह मंत्रालय ने बताया- अफवाह

इमरान के खत पर बदला भारत का रुख, UN बैठक के दौरान पाक विदेश मंत्री से मिलेंगी सुषमा

sun

320C

Clear

क्रिकेट

Jara Hatke

Read Also

चास : पिंड्राजोरा के डाबर गांव में धूमधाम से मनाया गया मुहर्रम

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:14 PM
newscode-image

चास(बोकारो)। पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के केलिया डाबर में मुहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लाठी खेल का आयोजन किया।

तेनुघाट : गंदगी में ही बीमारियां पनपती है-रामकिशुन

लाठी खेल में 3 क्लब 5 स्टार क्लब, सनराइज क्लब, लक्की स्टार क्लब ने खेल दिखाया। लक्की स्टार क्लब ने भारत के सैनिक किस तरह से दुश्मन के इलाके में घुस कर आतंकवादियों को मरते है और अपना भारत का झंडा फहराते है ये दिखाया गया है।

चास : पिंड्राजोरा के डाबर गांव में धूमधाम से मनाया गया मुहर्रम

लक्की स्टार क्लब ने देश भक्ति गानों के साथ अपना खेल दिखाया देश कि शान तिरंगा को दुश्मन के इलाके में फहराकर दिखाया। लाठी खेल में दोनों समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। डाबर में लाठी खेल का आयोजन लगभग 20 वर्षो से किया जाता है।

बोकारो : कंपनीकर्मी के साथ दबंगो ने नंगाकर किया मारपीट

इस मौके पर अजीत सिंह चौधरी, कामदेव सिंह चौधरी, सुबलचंद्र महतो, यकीन अंसारी, अकबर अंसारी, लतीफ़ अंसारी, आवेदिन अंसारी, यकीन अंसारी, रहमगोल अंसारी, बदल सिंह चौधरी, मिहिर महतो आदि मौजूद थे।

(अन्य झारखंड समाचार के लिए न्यूज़कोड मोबाइल ऐप डाउनलोड करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)

कोडरमा : मुहर्रम में कई हिन्दू परिवार पूरी श्रद्धा से निकालते है ताजिया और निशान

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:07 PM
newscode-image

कोडरमाकोडरमा जिले में मुहर्रम के मौके पर कई हिन्दू परिवारों द्वारा पिछले कई पीढियों से ताजिया और निशान (झंडा) निकालने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। समाजिक सौहार्द की प्रतिमूर्ति इन परिवारों में चाराडीह इलाके के उमाशंकर उर्फ तुफानी सिंह गुलशन कुमार, गाँधी स्कूल रोड़ निवासी गजाधर भारती, भादेडीह निवासी जयप्रकाश वर्मा के परिवार शामिल है।

सभी परिवारों को आसपास के ग्रामीण इस कार्य में निष्ठा भाव से परंपरा निर्वहन और क्षेत्र परिभ्रमण के दौरान पुरा सहयोग देते हैं। इस बावत पूछे जाने पर उमाशंकर उर्फ तुफानी सिंह ने बताया कि उनका परिवार पिछले कई पीढ़ियों से यह परंपरा निभा रही है।

कोडरमा : केरल में लापता हुए परिजन को खोजने की लगायी गुहार

उन्होंने कहा कि उनके पुर्वजों ने अपनी किसी मन्नत के पूरा होने के बाद इसकी शुरूआत की थी जो आज जारी है। हालाकि इस परिवार द्वारा बीती रात तक इसकी सारी तैयारी पूरी कर ली गई थी मगर उमाशंकर के बड़े भाई निर्मल सिंह का आज सुवह निधन हो जाने के कारण इस वर्ष इस परिवार द्वारा आज ताजिया नही निकाला गया।

गांधी स्कूल रोड निवासी गजाधर भारती ने बताया कि उनके दादा स्व. गुरूचरण राम (उत्पाद विभाग में जमादार थे) ने श्रद्धा से 1924 में इस मौके पर निशान (सरकारी झंडा) निकाला था जिस परंपरा का उनके पिता स्व. रामेश्वर राम और अब वे और उनका परिवार निर्वहन कर रहे हैं।

भादेडीह निवासी जयप्रकाश वर्मा ने बताया कि उनके दादा स्व. बुधन सोनार ने ताजिया निकालाना शुरू किया था। फिर उनके पिता स्व. सुखदेव प्रसाद और अब वे इस परंपरा को निभा रहे है। इन दोनों परिवारों के द्वारा आज ताजिया और झंडा निकाला गया।

इसी परिवार के द्वारा यहाँ के इमामबाड़े के लिए भूमि उपलब्ध करा इसकी स्थापना की थी। जहाँ सभी लोग जुटते हैं। उन्होंने बताया कि मुहर्रम के दिन उनके घर चुल्हा नही जलता वे मातम मनाते है। और तीजा के दिन ही सारी औपचारिकताए पूरी की जाती है।

(अन्य झारखंड समाचार के लिए न्यूज़कोड मोबाइल ऐप डाउनलोड करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.) 

More Story

more-story-image

बोकारो : कंपनीकर्मी के साथ दबंगो ने नंगाकर किया मारपीट

more-story-image

जामताड़ा : ग्रामीण चिकित्सक सेवा संघ की बैठक संपन्न