दुमका : मासिक लोक अदालत में दो लाख से अधिक की हुई वसूली 

NewsCode Jharkhand | 23 December, 2017 7:14 PM

दुमका : मासिक लोक अदालत में दो लाख से अधिक की हुई वसूली 

 दुमका। मासिक लोक अदालत में आपसी-सुलह के आधार पर कुल 35 मामले का निपटारा करते हुए 2,29,701 रूपये की वसूली हुई। नालसा और झालसा के निर्देशानुसार माह के अंतिम शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वाधन में लोक अदालत शिविर का समापन हुआ। वसूली की जानकारी देते प्राधिकार सचिव निशांत कुमार ने बताया कि तीन बेंचों के गठन में कुल 35 मामले में आपसी सुलह के आधार पर निष्पादन करते हुए 2,29,701 रूपये की वूसली की गई। बेंच नंबर एक में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय विरेन्द्र प्रताप, अधिवक्ता राजेन्द्र तिवारी एवं किरण तिवारी के न्यायालय में एक वाद का निपटारा हुआ।
बेंच नंबर दो में न्यायिक दंडाधिकारी, प्रथम बंकिम चंद्र चटर्जी, अधिवक्ता मंटू मुर्मू एवं स्थायी लोक अदालत सदस्य धनश्याम प्रसाद के न्यायालय ने पांच वादों का निपटारा करते हुए 2, 21, 201 रूपये की वसूली की। बेंच नंबर तीन में न्यायिक दंडाधिकारी, प्रथम मनीष कुमार मिश्रा, कार्यपालक दंडाधिकारी संजय कुमार चौधरी एवं स्थायी लोक अदालत सदस्य सत्येंद्र कुमार सिंह के न्यायालय ने 29 वादों का निष्पादन करते हुए 8,500 रूपये की वसूली किया। इससे पहले मुख्य अतिथि प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय विरेन्द्र प्रताप के अध्यक्षता में अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी प्रताप चंद्र, न्यायिक दंडाधिकारी, प्रथम निशिथ कुमार एवं अधिवक्ता संघ अध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने व्यवहार न्यायालय परिसर में द्वीप प्रज्जवलित कर शिविर का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय ने आपसी सुलह के आधार पर अधिक से अधिक वादों का करवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन मामलों में किसी पक्ष की हार और जीत नहीं होती है। अधिवक्ता संघ अध्यक्ष सिंह ने कहा कि दूर-दराज गांवों के लोग लोक अदालत के माध्यम से आसानी से कम खर्च में वादों का निष्पादन करवा सकते है। प्राधिकार सचिव ने बताया कि हर शनिवार को मासिक लोक अदालत आयोजन होने की जानकारी दी।
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तूतीकोरिन हिंसा में 12 की मौत, स्टरलाइट प्लांट के विस्तार पर मद्रास हाईकोर्ट ने लगाई रोक

NewsCode | 23 May, 2018 1:22 PM

तूतीकोरिन हिंसा में 12 की मौत, स्टरलाइट प्लांट के विस्तार पर मद्रास हाईकोर्ट ने लगाई रोक

नई दिल्ली। तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में स्टरलाइट प्लांट को बंद करने की मांग को लेकर हो रहे हिंसक प्रदर्शन में 12 लोगों की मौत के बाद मामला काफी संवेदनशील हो गया है। जिसके बाद आज मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई बेंच ने स्टेरलाइट प्लांट के नए कॉपर स्मेल्टर (धातु पिघलाने वाली जगह) के निर्माण पर रोक लगा दी है। वहीं गृह मंत्रालय ने भी राज्य सरकार से इस मामले में रिपोर्ट जमा करने को कहा है।

सीएम खुद मामले पर नजर बनाए हुए हैं। इसके बादसे इस घटना पर राजनीति भी शुरू हो गई है। स्टालिन से लेकर कमल हासन तक अस्पताल में पहुंचकर घायलों से मिले। हासन ने कहा, “हमें पता होना चाहिए कि इस फायरिंग का आदेश किसने दिया था। पीड़ित ये बात जानना चाहते हैं। केवल मुआवजे की घोषणा करना इस परेशानी का समाधान नहीं है। इस प्लांट को बंद करना चाहिए।”

इस घटना पर राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘तमिलनाडू में स्टरलाइट कॉपर यूनिट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 11 की मौत राज्य पोषित आतंकवाद का क्रूर उदाहरण है। इन नागरिकों की हत्या अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए की गई। इन शहीदों और घायलों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदना।’

इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी ने 9 लोगों के मरने की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा कि मरने वालों के परिवारों को 9 लाख रुपये और घायलों को 4 लाख रुपये दिए जाएंगे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि संयंत्र की तरफ बढ़ने से रोके जाने कारण प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और पुलिस के वाहनों को पलट दिया।

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प्रशासन ने घटनास्थल पर अभी धारा 144 लगा रखी है, जबकि पड़ोसी जिलों से 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए भेजे गए हैं। इस प्लांट में हर साल 4,00,000 टन कॉपर कथोड बनता है, जिसे कंपनी बढ़ाकर 8,00,000 करना चाहती है। स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी समस्या इस प्लांट से होने वाले प्रदूषण से है और इसी को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं।

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धनबाद : जेल में बंद महिला बंदियों को दी गई कानूनी जानकारी 

NewsCode Jharkhand | 18 May, 2018 8:26 PM

धनबाद : जेल में बंद महिला बंदियों को दी गई कानूनी जानकारी 

तीन दिवसीय एडवांस पीएलवी ट्रेनिंग कैंप का समापन

धनबाद। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) के निर्देश पर  जेल में बंद महिला कैदियों के लिए दस दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन मंडल कारा धनबाद में किया गया। शिविर का उद्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह अवर न्यायाधीश अविनाश कुमार दुबे ने किया।

शिविर में जेल में बंद महिला बंदियों और उनके साथ रहने वाले नाबालिग बच्चों को विभिन्न अधिकार और सरकारी योजनाओं के विषय में बताया गया। इस बाबत जानकारी देते हुए न्यायाधीश ने बताया कि दस दिनों तक लगातार राज्य के विभिन्न जेलों मे बंद महिला बंदियों के लिए नालसा के निर्देश पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन आज से शुरू किया गया है।

उन्होंने बताया कि‍ इन दस दिनों में मंडल कारा धनबाद में महिला कैदियों को विभिन्न तरह के कानून की जानकारी दी जाएगी। वह किस केस में बंद है। उनकी केस की क्या स्थिति है। कब तारीख पड़ी है। इन सबसे उन्हें अवगत कराया जाएगा। यदि उन्हें मुकदमा लड़ने के लिए अधिवक्ता की आवश्यकता होती है तो प्राधिकार उन्हें मुफ्त अधिवक्ता मुहैया कराएगा।

उन्होंने बताया कि इन दस दिनों में सरकारी विभाग के पदाधिकारी  मंडल कारा आएंगे और उन्हें विभाग संबंधित जानकारी देंगे। उन योजनाओं का लाभ उन्हें पहुंचाएंगे। महिला चिकित्सक रोजाना महिला बंदियों के स्वास्थ्य की जांच करेंगे। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा महिला बंदियों के साथ बंद नाबालिग बच्चों के शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।

उन्होंने बताया कि महिला बंदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए जेल में महिला पारा लीगल वॉलेंटियर की नियुक्ति की जा रही है। वहीं दूसरी ओर 15 मई से शुरू हुए एडवांस पारा लीगल वॉलेंटियर ट्रेनिंग कैंप का आज समापन हुआ।

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सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन अनिल कुमार सिंह, प्राधिकार के सचिव अविनाश कुमार दुबे ने पीएलवी को विभिन्न कानूनों की जानकारी दी। इस मौके पर डालसा के रिटेनर अधिवक्ता सुबोध कुमार, अजय कुमार भट्ट, मिथिलेश कुमार मिश्रा, ज्ञानेश्वर गिरी, नीरज कुमार, सुधीर कुमार सिन्हा, जयप्रकाश दसौंधी ने पीएलवी को प्राधिकार के कार्यों के विषय में बताया।

जेल में लगे विधिक जागरूकता शिविर में रिमांड अधिवक्ता दीपक साह, रंजन कुमार सिन्हा, केवी बंसल, मंडल काराधीक्षक ने महिला बंदियों को विभिन्न तरह की जानकारी दी गयी।

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जमशेदपुर : अरुण नामता हत्याकांड में सतनाम सिंह उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास

Om Prakash | 15 May, 2018 7:31 PM

जमशेदपुर : अरुण नामता हत्याकांड में सतनाम सिंह उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास

जमशेदपुर। टेल्को थाना क्षेत्र के जेम्को स्थित आजाद बस्ती में वर्ष 2014 की 21 जून को हुए अरुण नामता हत्याकांड में न्यायालय ने दोषी सतनाम सिंह उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त छह माह की कारावास होगी। एडीजे- 5 श्रीसुभाष की अदालत ने गोल्डी को आर्म्स एक्ट में भी दोषी पाते हुए पांच वर्ष की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा होगी।

दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मामले में कुल 16 लोगों की गवाही हुई। सभी गवाहों ने केस का समर्थन किया। फिलहाल सजायाफ्ता सतनाम सिंह उर्फ गोल्डी रांची जेल में बंद है। उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के तहत पेशी के दौरान सजा सुनाई गई।

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मामले में अपर लोक अभियोजक ने न्यायालय में हुई सजा पर हुई सुनवाई की जानकारी देते हुए कहा कि मृतक अरुण नामता की पत्नी ने इस मामले में टेल्को थाना में सतनाम और उसके पिता जागीर एवं अंगरक्षक तरुण और प्रीति जायसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया था।

पुलिस ने सतनाम और प्रीति के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया था। जबकि अन्य अभियुक्त के विरुद्ध अनुसंधान जारी रखा था। न्यायालय ने गवाहों और साक्ष्य के आधार पर सतनाम को दोषी पाया था, जबकि प्रीति जायसवाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था।

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