‘स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए गूगल से नहीं, चिकित्सक से मिलें’

NewsCode | 10 May, 2018 11:23 AM

‘स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए गूगल से नहीं, चिकित्सक से मिलें’

नई दिल्ली। आजकल जैसी ही हमें कोई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होती है, हम इंटरनेट पर उसके बारे में जानकारी लेना शुरू कर देते हैं। जानकारी तक तो यह बात सही है, लेकिन इससे आगे जाकर इलाज शुरू करना आपके जीवन को जोखिम में डाल सकता है। यह बात एक शोध में सामने आई है। गूगल से जानकारी के बाद इलाज शुरू कर देने को सायबरकॉंड्रिया कहा जाता है। इसमें स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे मे खुद ही ऑनलाइन निदान करने की प्रवृत्ति पैदा हो जाती है।

कभी-कभार इंटरनेट पर हमें स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में सही जानकारी मिल सकती है लेकिन अधिकतर यह ऑनलाइन जानकारी आपकी समस्या को बढ़ा सकती है।

इंडस हेल्थ प्लस की आरोग्यसेवा विशेषज्ञ कांचन नायकवडी कहती हैं, “खुद से जांच शुरू कर देना और दवाइयां लेना बहुत सामान्य बात हो गई है। इसकी कई वजहे हैं जिसमें समय की कमी, आर्थिक विषमता, जागरूकता कि कमी, आकर्षक विज्ञापन और औषधियों का आसानी से उपलब्ध होना शामिल। इन सभी कारणों से खुद से इलाज करने का चलन बढ़ रहा है।”

उन्होंने कहा, “खुद से दवाइयां लेने से बीमारी का गलत इलाज, दवाइयों के शरीर पर होने वाले गंभीर परिणाम, चिकित्सक की सलाह से वंचित हो जाना, दवाओं के दुष्प्रभाव व फर्जी दवाओं के प्रयोग की संभावना होती है। ऐसे में इससे बचने की जरूरत है।”

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आईएएनएस

कोडरमा : लायंस क्लब ने अस्थमा जांच कर नि:शुल्क बांटी दवाईयां

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 9:34 PM

कोडरमा : लायंस क्लब ने अस्थमा जांच कर नि:शुल्क बांटी दवाईयां

कोडरमालायंस क्लब के द्वारा स्थनीय ब्लॉक रोड स्थित डॉ. राजन कुमार के क्लिनिक में शुक्रवार को मुफ्त अस्थमा जांच शिविर लगाया गया। शिविर में कई रोगियों का मुफ्त स्पिरोमेट्री जांच किया गया तथा उसी अनुरूप दवाएं भी दी गई। शिविर में लायंस अध्यक्ष सुजीत अंबष्ट, लायंस के पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र राम एवं लायंस डॉ. राजन भी मौजूद थे।

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अध्यक्ष सुजीत अंबष्ट ने बताया कि लायंस क्लब आगामी माह में चेचक एवं खसरा के टीकाकरण हेतु जागरूकता के कई कार्यक्रम करने जा रही है।

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निपाह वायरस से बचने के लिए WHO ने किया आगाह, भूलकर भी न खाएं ये 3 फल

NewsCode | 25 May, 2018 6:12 PM

निपाह वायरस से बचने के लिए WHO ने किया आगाह, भूलकर भी न खाएं ये 3 फल

नई दिल्ली। केरल में निपाह वायरस के कारण मरने वालों की संख्‍या बढ़ रही है। जबसे निपाह वायरस से जुड़ी खबरें आ रही हैं लोगों में डर का माहौल है। निपाह वायरस का सबसे बड़ा खतरा अब फलों से भी पैदा हो गया है।

क्‍या है निपाह वायरस?

निपाह वायरस को NiV इन्‍फेक्‍शन भी कहा जाता है। ये जूनोटिक बीमारी है। यानी ऐसी बीमारी जो जानवरों से इंसान में फैलती है। इस बार इसके फैलने का कारण फ्रूट बैट्स (चमगादड़) कहे जा रहे हैं।

कैसे फैलता है?

WHO के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ की एक नस्ल में पाया जाता है। यह वायरस उनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है, चमगादड़ जिस फल को खाता है, उनके अपशिष्ट जैसी चीजों के संपर्क में आने पर यह वायरस किसी भी अन्य जीव या इंसान को प्रभावित कर सकता है। ऐसा होने पर ये जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है। ऐसे में केरल से आने वाले फलों को विशेषकर ध्‍यान से खाया जाएं।

शरीर में वायरस का प्रवेश कैसे होता है?

NiV शरीर में खाद्य पदार्थ के माध्‍यम से प्रवेश करता है। प्रभावित चमगादड़ द्वारा झूठे किए गए फलों, बेरी या फूलों के सेवन से ये वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। या घरेलू पशु जिन्‍होंने ऐसे खाद्य पदार्थ का सेवन किया हो या चमगादड़ के संपर्क में आए हों, उनसे भी ये फैलता है। प्रभावित व्‍यक्ति के संपर्क में आने से ये वायरस दूसरे के शरीर में प्रवेश कर जाता है।

क्या हैं निपाह (NiV) के लक्षण मनुष्‍यों में निपाह वायरस, encephalitis से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है. बुखार, सिरदर्द, चक्‍कर, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत, इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। 24-28 घंटे में यदि लक्षण बढ़ जाए तो इंसान को कोमा में जाना पड़ सकता है। कुछ केस में रोगी को सांस संबंधित समस्‍या का भी सामना करना पड़ सकता है।

इन तीन फलों से फैल सकता है निपाह वायरस

खजूर– धोकर खाएं खजूर और आम। रमजान के महीने में खजूर सबसे ज्यादा खाए जाते हैं। भारत में कई जगह बड़ी मात्रा में केले और खजूर केरल से मंगाए जाते हैं। निपाह वायरस से प्रभावित केरल के कालीकट और मल्लापुरम जिले में केले और खजूर की बड़ी मात्रा उत्‍पाद किए जाते है।

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केला- निपाह वायरस लोगों में फलों के जरिए फैल सकता है इसलिए केरल से जो केले आ रहे हैं, उनको खाने से बचें। अगर खाना ही है तो अच्छे से धोकर खाएं। क्योंकि, उत्तर भारत में ज्यादातर केले, केरल से आते हैं। ऐसे में इन्हें खाना मौजूदा हालात में सही नहीं है।

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बड़कागांव : 26 जून से शुरू होगा खसरा, रूबेला टीकाकरण अभियान

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 5:54 PM

बड़कागांव : 26 जून से शुरू होगा खसरा, रूबेला टीकाकरण अभियान

बड़कागांव (हजारीबाग)बड़कागांव प्रखंड में खसरा, रूबेला टीकाकरण को लेकर प्रखंड कार्यालय में प्रमुख राजमुनी देवी की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसका संचालन चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर श्याम किशोर कांत ने किया। कहा कि बीएलडी आयोजित किया जायेगा।

अभियान को सफल बनाने के लिए जल सहिया, महिला स्वास्थ्य कर्मी, महिला स्वयं सहायता समूह सभी धर्म के धर्मगुरु जनप्रतिनिधि अन्य विभागों को जोड़ने का निर्णय लिया गया है ताकि अभियान के तहत घर-घर जाकर जागरूक करने, 9 माह से 15 वर्ष के बच्चों को खसरा और रूबेला बीमारी से बचने के लिए टीकाकरण लगवाने का अपील किया गया।

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खसरा रोग के कारण बच्चों में अपंगता और मृत्यु दर में वृद्धि खसरा बहुत घातक रोग है। इसका लक्षण तेज बुखार के साथ त्वचा पर दिखाई पड़ने वाले लाल चकत्ते, खाँसी, बहती नाक और लाल आंखे रूबेला रोग सीसीआरएस जन्मजात रूबेला सिंड्रोम विकसित हो सकता है। जो भ्रूण और नवजात शिशुओं के लिए गंभीर और घातक साबित हो सकता है।

इस बीमारी से गर्भवती महिलाओं में गर्भपात, अकाल प्रसव और मृत प्रसव की संभावना बढ़ जाती है ताकि उक्त बीमारी से बच सके। बैठक में प्रखंड विकास पदाधिकारी अलका कुमारी, महिला पर्यवेक्षिका अनुराधा पासवान, स्वास्थ्य प्रशिक्षक सुशील प्रसाद,  बीपीएल नवीन कुमार, संगणक संजय साव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थिति थे।

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