धनबाद : प्रशासन ने उम्मीदों को रौंदा, ग्रामीणों ने पहाड़ चीरकर बना दी सड़क

NewsCode Jharkhand | 10 May, 2018 8:05 PM
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गांववालों के जज्बे से पूरा परिदृश्य बदला

धनबाद। बार- बार गुहार… बार-बार आश्वासन… लेकिन परिणाम सिफर। जब प्रशासन ने ग्रामीणों की उम्मीदों को तोड़ दिया तो वे उठ खड़े हुए। तय किया कि खुद पहाड़ से टकरायेंगे और उसका सीना चीरकर रास्ता निकालेंगे। ये आसान नहीं था। लेकिन जब जज्बा हिलोरें मारने लगे तो असंभव सा काम भी संभव हो जाता है। ऐसा कर दिखाया है भेलवाबेड़ा टोला के लोगों ने।

हाथों में टोकरी, बेलचा, डलिया लिए क्या बच्चे क्या बुजुर्ग सब रास्ते बनाने के लिए निकल पड़े। मन में एक ही लगन, पहाड़ का सीना चीरकर सड़क बनानी है। तभी तो गांव में विकास की बयार आएगी। उनको घर नसीब होगा। गांव में बीमारी से अब कोई नहीं मरेगा। उसे इलाज मिल जाएगा। जी हां, भेलवाबेड़ा टोला के ग्रामीण इन दिनों सड़क बनाने में जुटे हैं।

पहाड़ी इलाके से गुजरती है सड़क

 

पश्चिमी टुंडी के पहाड़ों के बीच नक्सल प्रभावित मछियारा पंचायत के बाघमारा गांव से टोला तक सड़क बन रही है। प्रशासन तंत्र ने जब टोले की उम्मीदों को रौंद दिया तो गांववालों ने अपना हाथ, जय जगन्नाथ की तर्ज पर खुद ही सड़क बनाने की ठान ली। ग्रामीणों ने हिम्मत और जज्बे से करीब नब्बे प्रतिशत सड़क बना ली है। कुछ दिनों में इस पर गाड़ियां भी दौड़ने लगेगी।

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43 जनजातीय परिवार रहते हैं यहां

दरअसल भेलवाबेड़ा टोला के ग्रामीण बेहद परेशान थे। सड़क न होने से गांव का विकास अवरुद्ध था। टोले के शिवलाल मुर्मू, रवींद्र मरांडी, करम चंद मुर्मू, सुकुरमनी मंझियाइन, प्रमिला ने बताया कि बाघमारा गांव का भेलवाबेड़ा टोला प्रखंड मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर है। बाघमारा गांव से भेलवाबेड़ा टोला करीब दो किलोमीटर है। दो किलोमीटर का यह इलाका पहाड़ी क्षेत्र है। इस बीहड़ में केवल आदिवासी जनजाति समुदाय के लोग रहते हैं। आबादी करीब 300 के आसपास है। कुल 43 जनजातीय परिवार यहां रहते हैं। पर इलाके में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीण हमेशा से पगडंडी से आवाजाही करते हैं।

इलाज के अभाव में मरा, सड़क बनाने की ठानी

गत माह गांव के छुटूलाल हांसदा की मौत हो गई। उसे एंबुलेंस की जगह खाट पर इलाज के लिए ले जाया जा रहा था। पर वक्त रहते वह अस्पताल नहीं पहुंच सका। उसकी मौत रास्ते में हो गई। तब गांव के लोगों ने सड़क बनाने की ठान ली। ग्रामीणों के जज्बे का अंदाज इस बात से लग सकता है कि गांव के प्रकाश और राहुल समेत कई बच्चे भी पूरी शिद्दत से इस काम में जुटे हैं।

सड़क नहीं होने की वजह से घर नहीं बन रहा

घरौंदा टुंडी प्रखंड में देश की आजादी के पहली बार एक साथ 24 ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण की स्वीकृति मिली है। आवास निर्माण के लिए जरूरी सामग्री लाने में परेशानी हो रही थी। प्रखंड कार्यालय से लाभुकों को बार.बार नोटिस मिल रहा था। जल्द मकान बनवाएं। तब ग्रामीणों ने जिद ठान ली।

सड़क बनाकर रहेंगे। मेहनत रंग लाई। अब सड़क आकार ले रही है। ग्रामीणों ने बताया कि यह इलाका वन क्षेत्र में आता है। वहां के अधिकारियों ने भी सड़क निर्माण पर ध्यान नहीं दिया। वही जिप सदस्य रायमुनी देवी ने कहा की ग्रामीणों के श्रम दान से सड़क का निर्माण हो रहा है । उनका ये जज्बा सराहनीय है।

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बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 4:17 PM
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बोकारो। झारखंड सरकार के मंत्री अमर बाउरी ने स्‍वाधीनता दिवस के मौके पर बोकारो में तिरंगा फहराया लेकिन उन्‍होंने इस दौरान पैरों में चप्‍पलें पहन रखी थी। मान्‍य परंपरा के अनुसार जूते और चप्‍पलें पहन कर तिरंगा फहराना मर्यादा के प्रतिकूल है और राष्‍ट्र ध्‍वज का अपमान है। राज्‍य सरकार के मंत्रियों से कम से कम, राष्‍ट्र ध्‍वज के सम्‍मान में इस प्रकार की लापरवाही की उम्‍मीद नहीं की जा सकती।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गिरिडीह जिले के बीजेपी सांसद रविन्द्र कुमार पांडेय ने भी बोकारो में चप्पल पहनकर ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

तिरंगे के सम्‍मान की अनदेखी की रही-सही कमी बोकारो में कांग्रेस पार्टी के नेता डॉ पी नैय्यर ने पूरी कर दी। बीजेपी के मंत्री और सांसद ने तो चप्‍पलें पहन कर तिरंगा फहराया था लेकिन कांग्रेस के नेता डॉ पी नैय्यर ने जूते पहनकर ही तिरंगा फहराया।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

मतलब साफ है कि तिरंगे का अपमान करने में कोई किसी से कम नहीं रहा। इन माननीयों को उस मिट्टी पर भी, थोड़ी दूर नंगे पैर चलने में कष्‍ट का अनुभव होता है जिस मिट्टी को अमर शहीदों ने अपने खून से सींचा है। जो तिरंगे को फहराने से पहले अपने पैरों से जूते-चप्‍पल नहीं उतार सकते, उनसे ये उम्‍मीद करना बेकार है कि कभी वे इस मिट्टी को अपने माथे से लगाएंगे। कहने को तो ये सभी माननीय जन प्रतिनिधि हैं लेकिन इनके कृत्‍यों से जनता क्‍या सीख लेगी ये विचारणीय है। शायद इन्‍हें ये पता नहीं है कि चाहे राष्‍ट्र ध्‍वज हो या धर्म ध्‍वज, इन्‍हें नंगे पैर फहराया जाता है। ध्‍वज के प्रति सम्‍मान प्रकट करने की ये परंपरा है।

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सरायकेला : ड्यूटी से लौट रहे दो रेलकर्मी सगे भाई की करंट लगने से दर्दनाक मौत

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 4:05 PM
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सरायकेला। सरायकेला थाना के सीनी ओपी अंतर्गत आज  ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे मोटरसाईकिल सवार रेलवे के दो चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की बिजली की नंगी तार की चपेट में आने से मौत हो गयी। मृतक 40 वर्षीय भोला महतो तथा 28 वर्षीय ईश्वर महतो दोनों ही सगे  भाई थे तथा रेलवे में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे।

ड्यूटी खत्म कर लौट रहे थे

बताया जा रहा है, कि आज सुबह दोनों भाई अपनी ड्यूटी खत्म कर मोटरसाईकिल से अपने घर उलीडीह लौट रहे थे, तभी सिंदरी गांव के पास नंगी लटकी बिजली के तार के चपेट में वे दोनों आ गये। जिससे करंट लगने से दोनों की मौत हो गयी।

वहीं तत्काल दोनों  को स्थानीय लोग और पुलिस की मदद से सदर अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उधर इस घटना की सूचना पाकर मृतक के परिजनों के अलावा रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी तथा खरसांवा विधायक दशरथ गागराई सदर अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली। इधर रेलवे अधिकारियों ने भरोसा दिलाया  है कि रेलवे के प्रावधानों के अनुरुप मृतक के परिजनों को सभी लाभ दिये जायेंगे।

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पांच हजार की तत्काल आर्थिक सहायता मिली

वहीं मृत कर्मचारियों के दाह संस्कार व अन्य कार्य के लिए रेलवे वेलफेयर एसोसिएशन ने बीस हजार रुपये तथा इंडियन रेलवे सिग्नल व टेलिकॉम विभाग की ओर से पांच हजार की तत्काल आर्थिक सहायता दी गयी है।  उधर बिजली की नंगी तार सड़क किनारे झूलने तथा इस घटना के होने से लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।

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कैमरे में कैद हुआ टाटा 45एक्स का केबिन

NewsCode | 15 August, 2018 4:01 PM
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टाटा मोटर्स इन दिनों 45एक्स प्रीमियम हैचबैक कॉन्सेप्ट के प्रोडक्शन वर्जन पर काम पर रही है। हाल ही में इसे टेस्टिंग के दौरान देखा गया है। इस बार कार के केबिन से जुड़ी जानकारी हाथ लगी है।

Tata 45X Interior Spied

तस्वीरों पर गौर करें तो 45एक्स में डैशबोर्ड के ऊपरी हिस्से पर बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेंमेंट सिस्टम लगा है। चर्चाएं हैं कि इस में टाटा नेक्सन से बड़ी डिस्प्ले दी जा सकती है। टाटा नेक्सन में 6.5 इंच यूनिट दी गई है, जबकि 45एक्स में 7.0 इंच यूनिट दी जा सकती है। इसके मुकाबले में मौजूद मारूति बलेनो और हुंडई एलीट आई20 में भी 7.0 इंच यूनिट दी गई है। मनोरंजन के लिए इस में टाटा नेक्सन की तरह 8-स्पीकर्स वाला हार्मन साउंड सिस्टम दिया जा सकता है।

Tata 45X

कैमरे में कैद हुई कार के केबिन को ऑल-ब्लैक ट्रीटमेंट दिया गया है। एसी वेंट और एनालॉग इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर पर भी ब्लैक कलर का इस्तेमाल हुआ है।

Tata 45X

बाहरी हिस्से की बात करें तो इसका एक्सटीरियर लेआउट कॉन्सेप्ट से मिलता-जुलता हो सकता है। इसकी लंबाई 4 मीटर से कम हो सकती है, जबकि कॉन्सेप्ट की लंबाई 4.23 मीटर थी। इस में स्वूपिंग रूफलाइन और स्वेपिंग विंडो लाइन दी गई है। साफ-सुथरी कार वाला अहसास लाने के लिए इसके रियर डोर हैंडल को सी-पिलर पर रखा गया है। कैमरे में कैद हुई कार में डमी टेल लैंप्स दिए गए हैं, जबकि प्रोडक्शन मॉडल में एलईडी हैडलैंप्स दिए जा सकते हैं।

इंजन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं मिली है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस में टाटा नेक्सन वाले इंजन दिए जा सकते हैं। टाटा नेक्सन के पेट्रोल वेरिएंट में 1.2 लीटर का टर्बोचार्ज्ड इंजन लगा है, जो 110 पीएस की पावर और 170 एनएम का टॉर्क देता है। डीज़ल वेरिएंट में 1.5 लीटर का इंजन लगा है, इसकी पावर 110 पीएस और टॉर्क 260 एनएम है। दोनों इंजन के साथ 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प रखा गया है।

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