देवघर : अटल बिहारी वाजपेयी की स्‍वस्‍थ्‍य कामना के लिए बाबा मंदिर में विशेष पूजा

NewsCode Jharkhand | 13 June, 2018 7:51 PM
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दिल्‍ली के AIMS में चल रहा इलाज

देवघर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे है। दिल्‍ली के AIMS में उनका इलाज चल रह है। अटल बिहारी बाजपेयी के लिए देवघर बाबा मंदिर में 11 पुरोहितों द्वारा स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए विशेष पूजा अर्चना की गई।

बाबा मंदिर में 11 तिर्थपुरोहितों ने बाबा बैद्यनाथ का पूरे मंत्रोचारण के साथ पूरी विधिविधन के साथ विशेष पूजा अर्चना एवं हवन, रुद्राभिषेक, महामिर्तुन्जय जप किया।

देवघर : राज्य की सुख-शांति के लिए बाबा मंदिर में हुई विशेष पूजा

तीर्थ पुरोहितों ने बताया कि देवघर बाबा बैद्यनाथ द्वादस जयोतिर्लिंग में कामना लिंग ज्योतिर्लिंग है। भारत के रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का अस्वस्थ होने के कारण 11 वैदिक पुरोहितों द्वारा शारीरिक कष्ट में शांति हो महामृयुंजय का जाप किया गया। ताकि बाबा की विशेष कृपा उनपर बनी रहे।

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योग डे विशेष : एक ऐसे शख्स की कहानी, जिन्होंने पानी पर योग करने की ठानी

Ramdin Kumar | 21 June, 2018 12:41 PM
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रांची आपने मछली, मगरमच्छ या जलपरी के बारे में तो सुना ही होगा कि इनका जीवन जल के बगैर मुश्किल है, लेकिन आज हम आपको शख्सियत के बारे में बतायेंगे जो ज्यादा समय बीता सकते हैं, उन्हें ‘जलमानव’ कहकर संबोधित करना अनुचित नहीं होगा।

12 घंटे से अधिक समय तक पानी में रह सकते हैं सुरेश

जी हां, रांची के अनगड़ा में रहने वाले सुरेश महतो को पानी से डर नहीं लगता। चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो। सुरेश पानी में तैरते नहीं बल्कि नदी या तालाब में घंटों योग करते हैं।

योग डे विशेष : एक ऐसे शख्स की कहानी, जिन्होंने पानी पर योग करने की ठानी

वह घंटों पानी में योग की मुद्रा में रह सकते हैं। वह लगातार 12 घंटे से अधिक समय तक एक ही स्थति में पानी में रह सकते हैं, इतना ही नहीं हाथ-पांव बांध भी नदी में सुरेश उसी अवस्था में घंटों तैरते रहते हैं।

पानी पर सभी आसन हैं आसान

सुरेश पानी में योग के लगभग सभी आसनी से कर लेते हैं। यही नहीं पानी के अन्दर वो अखबार पढ़ते हैं, शंख बजाते हैं और माउथ ओरगन भी बजाते हैं। ये हैरतअंगेज कारनामा सुरेश बचपन से ही करते आ रहे हैं। पानी में रोज नए-नए कारनामे करके लोगों को हैरत में डाल देते हैं।

योग डे विशेष : एक ऐसे शख्स की कहानी, जिन्होंने पानी पर योग करने की ठानी

सुरेश की कहानी, उन्हीं की जुबानी

जब सुरेश से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जब वे छोटे थे तभी से योग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब वे तैरते थे तब उन्हें लगता था कि पानी में वो कैसे आराम करें। तब उन्होंने योगासन करना शुरू किया। ऐसा करने से उन्हें लगा कि वो पानी में डूब नहीं रहे हैं, उसी समय से उन्होंने पानी में योग करना शुरु कर दिया। आज सुरेश सुरेश घंटों पानी में योग का अभ्यास करते हैं। रांची स्थित गेतलसूद नदी में सुरेश ने कई आसनों को भी करके दिखाया।

रांची : केंद्रीय मंत्री नकवी व सीएम ने 10 हजार लोगों के साथ किया योगाभ्यास

सुरेश जिस अनोखी प्रतिभा के धनी हैं, ऐसे लोग बहुत कम ही होते हैं। जरुरत है इन जैसे लोगों की प्रतिभा को निखारने में मदद करने की। सुरेश जिस तरह बिना कोई मदद के पानी में योग करने की कला को लोगों के बीच पहुंचा रहे हैं, वाकई ये काबिले तारीफ है।

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दिल्ली में 14,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘आप’ का चिपका आंदोलन

NewsCode | 24 June, 2018 7:54 PM
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध तेज हो गया है। आम लोगों के साथ अब आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ उतर आई है। आज रविवार को सरोजिनी नगर में पार्टी ने एक बड़े चिपको आंदोलन का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #DelhiChipkoAndolan लगातार ट्रेंड कर रहा है।

दिल्ली सरकार में ‘आप’ के मंत्री इमरान हुसैन ने कई विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पेड़ों से चिपककर विरोध-प्रदर्शन किया। लोग हाथ से लिखे पोस्टर के साथ पेड़ों को बचाने की अपील करने के लिए वहां पहुंचे थे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे जगह शिफ्ट करने की अपील की।

वहीं, पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “जब सारी जनता , दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार पेड़ों के बारे में इतनी चिंतित है तो केन्द्र सरकार प्रोजेक्ट बंद कर दे। अब कोई पेड़ ना काटा जाए”

बता दें कि सरोजिनी नगर में शनिवार को भी पेड़ काटने के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं ने पेड़ से चिपककर उसे बचाने की अपील की।उनका कहना था कि सुंदर नगर में पेड़ कट चुके हैं। अब सरोजिनी नगर व आरकेपुरम में इन्हें काटा जाना है। हम इसका विरोध कर रहे है। सभी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली का नारा पेड़ काटने से पूरा नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली में स्थित सात सरकारी आवसीय कॉलोनियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव बनाया था। केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पुनर्विकास प्लान को वर्ष 2016 में ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ही दक्षिणी दिल्ली में स्थित किदवई नगर में 1123, नेताजी नगर में 2294, नैरोजी नगर में 1454, मोहम्मदपुर में 363 और सरोजनी नगर में 11 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। नैरोजी में पेड़ों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। अब इन पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह जितने पेड़ काटेंगे उससे दोगुना पौधे लगाएं जाएंगे। पूरा पुनर्विकास प्लान ग्रीन प्रोजेक्ट होगा।

1973 में पहली बार हुआ था चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 1973 में हुई थी। तब ग्रामीण किसानों ने राज्य के वन ठेकेदारों द्वारा वनों और जंगलों को काटने के विरोध में चिपको आन्दोलन चलाया था। चिपको आंदोलन का सीधे-सीधे अर्थ है किसी चीज से चिपककर उसकी रक्षा करना। जब यह आंदोलन वहां पर चल रहा था, तब वनों की कटाई को रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं पेड़ों से लिपट जाती थीं और ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने देती थी। इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी।

जानिए क्या है चिपको आंदोलन, जिस पर Google ने बनाया डूडल

इस आंदोलन को चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और ग्रामीणों ने मिलकर अंजाम दिया था। बाद में प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी सुन्दरलाल बहुगुणा ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। जिस समय यह आन्दोलन चल रहा था, उस समय केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया था। इस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम बनाया।

चिपको आंदोलन आज अधिक प्रासंगिक

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धनबाद : झरिया के अस्तित्‍व को बचाने के लिए फिर होगा आंदोलन

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:48 PM
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झरिया को उजाडने की सरकारी मंसूबे को जनता कामयाब नहीं होने देगी

धनबाद (झरिया)। झरिया के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर आंदोलन होगा। इसबार आंदोलन की मुख्‍य भूमिका में पूर्व मंत्री समरेश सिंह रहेंगे। आंदोलन की रुपरेखा तैयार करने के बावत आज झरिया प्रेस क्लब में समरेश सिंह की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें पूर्व में हो चुके झरिया आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने भाग लिया।

बैठक में निर्णय लिया गया कि झरिया को बचाने के लिए यह आखिरी आंदोलन होगा। इस आंदोलन में झरिया की जनता पूरी ईमानदारी से लड़ेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बंद आर एस पी कॉलेज को उसी जगह चालू किया जाएगा जहां वह है। इसके लिए कोर्ट जाना पड़े या कहीं और लेकिन बंद कॉलेज को खुलवाया जाएगा। बैठक में भाग ले रह लोगों ने एकसुर से कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झरिया के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है जिसे यहां की जनता सफल नहीं होने देगी।

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