बिना फीस लिए प्राइवेट अस्पताल ने दुधमुंहे को दिया दूसरा जीवन

NewsCode | 18 November, 2017 1:10 PM
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नई दिल्ली| दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के मधु विहार में रहने वाले फिरोज अहमद के 13 माह के बच्चे मास्टर अमन अहमद को राजापुरी स्थित आकाश सुपर स्पेश्येलिटी हॉस्पिटल्स के चिकित्सकों ने दूसरा जीवन दिया है। मासूम अमन अपने घर में खेलते वक्त पानी की बाल्टी में डूबा गया था और उसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों ने इलाज के खर्च की परवाह किए बगैर बच्चे की जान बचाई।

अमन के पिता व मां सबा के उस वक्त पैरों तले जमीन खिसक गई थी, जब उन्होंने अपने इकलौते दुधमुंहे बच्चे को पानी भरे बाल्टी में डूबा हुआ पाया। फिरोज उसे पास के क्लीनिक में लेकर गए, लेकिन बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया, क्योंकि बच्चे को पीडियाट्रिक आईसीयू की जरूरत थी, जो उस क्लीनिक में उपलब्ध नहीं था।

बच्चा सांस नहीं ले पा रहा था, बेहोश था। फिरोज और सबा उसे लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने इलाज का लंबा-चौड़ा खर्च बताकर पहले फीस जमा करने को कहा। फिरोज ने विनती की, पर सुनी नहीं गई। वहां के चिकित्सक ने बच्चे को सरकारी अस्पताल ले जाने को कहा और बच्चे पर निगाह डालने की फीस के तौर पर 1800 रुपये जमा करने का फरमान सुना दिया।

मजबूर पिता ने फीस चुकाकर वहां से सरकारी अस्पताल का रुख किया। इस बीच बच्चे की हालत लगातार गिरती जा रही थी। उसी दौरान एक दोस्त के सुझाव पर फिरोज बच्चे को इलाके में हाल ही में खुले एक सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचा। इस अस्पताल में चिकित्सकों ने फौरन बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने का फैसला लिया।”

आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इमर्जेसी मेडिकल ऑफिसर, पीडियाट्रिक रजिस्ट्रार और पीडियाट्रिक आईसीयू के प्रभारी डॉ. विक्रम गगनेजा सहित चिकित्सकों का एक समूह तुरंत बच्चे को देखने पहुंचा। इन सभी ने बच्चे की दोबारा जांच करने और आगे के इलाज व जरूरी देखभाल के लिए उसे पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती करने का सुझाव दिया।

विभिन्न जांचों व इलाज में होने वाले खर्च के बारे में सोचकर फलों का जूस बेचने वाला फिरोज निराशा से भर गया। उसने अपनी नम आंखों से हाथ जोड़कर विनती की कि वह एक बेहद गरीब परिवार से है और फलों का जूस बेचकर किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण कर पाता है, इसलिए वह यहां इलाज करवाने में सक्षम नहीं है। वह बच्चे को सरकारी अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगा, तभी एमडी डॉ. आशीष चौधरी ने मजबूर पिता की बात सुनकर बच्चे को बचाने और इलाज का सारा खर्च अस्पताल द्वारा उठाने का निर्णय लिया। इलाज शुरू हुआ और बच्चे की जान बच गई। गरीब माता-पिता ने राहत की सांस ली।

अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विक्रम गगनेजा कहते हैं, “हमें यह बिल्कुल पता नहीं था कि हमारा पीडियाट्रिक आईसीयू एक अनमोल जिंदगी को बचा लेगा। बच्चा उम्मीद से भी ज्यादा तेजी से ठीक हुआ। बच्चे की तंत्रिका प्रणाली व सांस की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। दो दिन बाद ही उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। तीसरे दिन उसके मुंह से ट्यूब हटा दिया गया। वह सामान्य ढंग से खाना खाने लगा और मां से बात भी करने लगा।”

फिरोज ने कहा, “मैं इस अस्पताल के डाक्टरों का हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा। उन्होंने मेरे बच्चे के इलाज का पूरा खर्च उठाया। सात दिनों तक रहने के दौरान अस्पताल ने बच्चे की पूरी देखभाल की। मेरा पूरा परिवार और खासतौर पर मैं आकाश हेल्थकेयर और डॉ. विक्रम व अशीष चौधरी को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मेरे बच्चे की जान बचा ली।”

डॉ. चौधरी के चेहरे पर संतुष्टि का भाव था। उन्होंने कहा, “बच्चे की हालत देख यह साफ था कि उसे बचाने व स्वस्थ्य करने में कई सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट व महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन हमने बच्चे के परिवार से कहा कि खर्च की फिक्र छोड़िए, सिर्फ दुआ कीजिए।”

एक गरीब परिवार के बच्चे की अनमोल जिंदगी बचाने वालों ने यह साबित किया कि चिकित्सा व्यापार नहीं, बल्कि सेवा कार्य है। इस वाकये ने इस मिथक को भी तोड़ दिया कि प्राइवेट अस्पताल गरीबों के लिए नहीं है। साथ ही अस्पताल के नाम पर लूट-खसोट का धंधा चलाने वालों के उन लोगों के गाल पर करारा तमाचा भी है, जो ज्यादा कमाने की होड़ में गरीब मरीजों को तड़पने के लिए छोड़ देते हैं।

(आईएएनएस)

UGC का फरमान- 29 सितंबर को यूनिवर्सिटी मनाएं ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’, कांग्रेस ने की आलोचना

NewsCode | 21 September, 2018 5:34 PM
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नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को 29 सितंबर को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ के तौर पर मनाने का आदेश दिया है। UGC ने सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने के लिए सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में पूर्व सैनिकों से संवाद सत्र, विशेष परेड, प्रदर्शनियों का आयोजन और सशस्त्र बलों को अपना समर्थन देने के लिए उन्हें ग्रीटिंग कार्ड भेजने समेत अन्य गतिविधियां आयोजित करने का सुझाव भी दिया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आयोग ने सभी कुलपतियों को गुरुवार को भेजे एक लेटर में कहा, ‘सभी विश्वविद्यालयों की एनसीसी की इकाइयों को 29 सितंबर को विशेष परेड का आयोजन करना चाहिए जिसके बाद एनसीसी के कमांडर सरहद की रक्षा के तौर-तरीकों के बारे में उन्हें संबोधित करें।’

यूजीसी ने कहा कि विश्वविद्यालय सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में छात्रों को संवेदनशील करने के लिए पूर्व सैनिकों को शामिल करके संवाद सत्र का आयोजन कर सकते हैं।

पत्र में कहा गया है, ‘इंडिया गेट के पास 29 सितंबर को एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह की प्रदर्शनियों का आयोजन राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, अहम शहरों, समूचे देश की छावनियों में किया जा सकता है। इन संस्थानों को छात्रों को प्रेरित करना चाहिए और संकाय सदस्यों को इन प्रदर्शनियों में जाना चाहिए।’

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने की आलोचना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने ट्विटर पर यूजीसी के इस निर्णय की आलोचना की है। उन्होंने लिखा है, ‘यूजीसी ने सभी यूनिवर्सिटीज को 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे के रूप में मनाने का आदेश दिया है। यह लोगों को शिक्षित करने के लिए बना है या बीजेपी के राजनीतिक हित साधने के लिए? क्या यूजीसी 8 नवंबर (नोटबंदी) को गरीबों का निवाला छीनने के सर्जिकल स्ट्राइक दिवस के रूप में मनाने की हिम्मत कर पाएगा? यह एक और जुमला है!

वहीं, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि यूनिवर्सिटीज सर्जिकल स्ट्राइक दिवस को मनाने के लिए बाध्य नहीं हैं। जावड़ेकर ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक को समर्पित इस कार्यक्रम को मनाने का सुझाव हमें कई शिक्षकों और विद्यार्थियों से मिला था, इसलिए हमने इसके आयोजन का फैसला किया है।

गौरतलब है कि भारत ने 29 सितंबर 2016 को PoK में नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादियों के सात अड्डों पर लक्षित कर हमले किए थे। सेना ने कहा था कि विशेष बलों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठ की तैयारी में जुटे आतंकवादियों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भारत के उरी कैंप पर हमला किया और भारत के 19 जवान शहीद हुए थे। उरी हमले के करीब दस दिन बाद 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तहस-नहस कर दिया था।


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चास : पिंड्राजोरा के डाबर गांव में धूमधाम से मनाया गया मुहर्रम

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:14 PM
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चास(बोकारो)। पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के केलिया डाबर में मुहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लाठी खेल का आयोजन किया।

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लाठी खेल में 3 क्लब 5 स्टार क्लब, सनराइज क्लब, लक्की स्टार क्लब ने खेल दिखाया। लक्की स्टार क्लब ने भारत के सैनिक किस तरह से दुश्मन के इलाके में घुस कर आतंकवादियों को मरते है और अपना भारत का झंडा फहराते है ये दिखाया गया है।

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लक्की स्टार क्लब ने देश भक्ति गानों के साथ अपना खेल दिखाया देश कि शान तिरंगा को दुश्मन के इलाके में फहराकर दिखाया। लाठी खेल में दोनों समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। डाबर में लाठी खेल का आयोजन लगभग 20 वर्षो से किया जाता है।

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इस मौके पर अजीत सिंह चौधरी, कामदेव सिंह चौधरी, सुबलचंद्र महतो, यकीन अंसारी, अकबर अंसारी, लतीफ़ अंसारी, आवेदिन अंसारी, यकीन अंसारी, रहमगोल अंसारी, बदल सिंह चौधरी, मिहिर महतो आदि मौजूद थे।

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कोडरमा : मुहर्रम में कई हिन्दू परिवार पूरी श्रद्धा से निकालते है ताजिया और निशान

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:07 PM
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कोडरमाकोडरमा जिले में मुहर्रम के मौके पर कई हिन्दू परिवारों द्वारा पिछले कई पीढियों से ताजिया और निशान (झंडा) निकालने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। समाजिक सौहार्द की प्रतिमूर्ति इन परिवारों में चाराडीह इलाके के उमाशंकर उर्फ तुफानी सिंह गुलशन कुमार, गाँधी स्कूल रोड़ निवासी गजाधर भारती, भादेडीह निवासी जयप्रकाश वर्मा के परिवार शामिल है।

सभी परिवारों को आसपास के ग्रामीण इस कार्य में निष्ठा भाव से परंपरा निर्वहन और क्षेत्र परिभ्रमण के दौरान पुरा सहयोग देते हैं। इस बावत पूछे जाने पर उमाशंकर उर्फ तुफानी सिंह ने बताया कि उनका परिवार पिछले कई पीढ़ियों से यह परंपरा निभा रही है।

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उन्होंने कहा कि उनके पुर्वजों ने अपनी किसी मन्नत के पूरा होने के बाद इसकी शुरूआत की थी जो आज जारी है। हालाकि इस परिवार द्वारा बीती रात तक इसकी सारी तैयारी पूरी कर ली गई थी मगर उमाशंकर के बड़े भाई निर्मल सिंह का आज सुवह निधन हो जाने के कारण इस वर्ष इस परिवार द्वारा आज ताजिया नही निकाला गया।

गांधी स्कूल रोड निवासी गजाधर भारती ने बताया कि उनके दादा स्व. गुरूचरण राम (उत्पाद विभाग में जमादार थे) ने श्रद्धा से 1924 में इस मौके पर निशान (सरकारी झंडा) निकाला था जिस परंपरा का उनके पिता स्व. रामेश्वर राम और अब वे और उनका परिवार निर्वहन कर रहे हैं।

भादेडीह निवासी जयप्रकाश वर्मा ने बताया कि उनके दादा स्व. बुधन सोनार ने ताजिया निकालाना शुरू किया था। फिर उनके पिता स्व. सुखदेव प्रसाद और अब वे इस परंपरा को निभा रहे है। इन दोनों परिवारों के द्वारा आज ताजिया और झंडा निकाला गया।

इसी परिवार के द्वारा यहाँ के इमामबाड़े के लिए भूमि उपलब्ध करा इसकी स्थापना की थी। जहाँ सभी लोग जुटते हैं। उन्होंने बताया कि मुहर्रम के दिन उनके घर चुल्हा नही जलता वे मातम मनाते है। और तीजा के दिन ही सारी औपचारिकताए पूरी की जाती है।

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