चतरा : इटखोरी में 1 साल से बंद पड़ी है पेयजलापूर्ति, पीने के लिए नहीं मिल रहा पानी

NewsCode Jharkhand | 14 May, 2018 12:00 PM
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 महाने नदी में बना इंटेक वेल डेड

चतरा। इटखोरी प्रखंड मुख्यालय में पिछले एक वर्ष से पेयजल की आपूर्ति ठप है। वाटर सप्लाई के लिए महाने नदी में बना इंटेक वेल डेड हो चुका है। लिहाजा लोगों के घरों तक नल का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। मालूम हो कि यहां एक दशक पूर्व वाटर सप्लाई के लिए पेयजल आपूर्ति योजना का निर्माण किया गया था। इसके तहत जलमीनार, वाटर फिल्टर प्लांट तथा महाने नदी में इंटेक वेल का निर्माण हुआ था।

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पीने के पानी की घोर समस्‍या

करीब पांच-छह वर्ष तक पेयजल आपूर्ति योजना से लोगों को सप्लाई का पानी मिलता रहा। बाद में महाने नदी में बनाए गए इंटेक वेल में बालू भर जाने के कारण पेयजल की आपूर्ति अक्सर बाधित होने लगी। इधर पिछले एक वर्ष से पेयजल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। पेयजल की आपूर्ति ठप होने से प्रखंड मुख्यालय में रहने वाले लोगों के समक्ष पीने के पानी की समस्या गहरा गई है।

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धनबाद : पानी-बिजली की किल्‍ल्‍त से परेशान ग्रामीण उतरे सड़क पर

Baidyanath Jha | 24 June, 2018 5:45 PM
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धनबाद। जिले में पानी व बिजली की समस्या से परेशान आम लोग अब सड़क पर उतरकर प्रशासन का विरोध करने लगे हैं। ताजा मामला धनबाद केंदुआ का है जहां लोगों ने आज एनएच 32 को घंटों जाम कर पानी व बिजली की मांग की।

मिली जानकारी के अुनसार एनएच 32 सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण रोड निर्माण कंपनी द्वारा पाईप लाइन क्षतिग्रस्त कर दिए जाने के कारण केंदुआ, करकेंद और कुसुंडा क्षेत्र में घोर पानी की किल्लत कई दिनों से बनी हुई है।

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पानी नहीं मिलने से परेशान स्‍थानीय महिलाओं ने हाथ में बर्तन लेकर एनएच 32 को जाम कर पानी देने की मांग करने लगे।

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दिल्ली में 14,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘आप’ का चिपका आंदोलन

NewsCode | 24 June, 2018 7:54 PM
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध तेज हो गया है। आम लोगों के साथ अब आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ उतर आई है। आज रविवार को सरोजिनी नगर में पार्टी ने एक बड़े चिपको आंदोलन का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #DelhiChipkoAndolan लगातार ट्रेंड कर रहा है।

दिल्ली सरकार में ‘आप’ के मंत्री इमरान हुसैन ने कई विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पेड़ों से चिपककर विरोध-प्रदर्शन किया। लोग हाथ से लिखे पोस्टर के साथ पेड़ों को बचाने की अपील करने के लिए वहां पहुंचे थे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे जगह शिफ्ट करने की अपील की।

वहीं, पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “जब सारी जनता , दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार पेड़ों के बारे में इतनी चिंतित है तो केन्द्र सरकार प्रोजेक्ट बंद कर दे। अब कोई पेड़ ना काटा जाए”

बता दें कि सरोजिनी नगर में शनिवार को भी पेड़ काटने के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं ने पेड़ से चिपककर उसे बचाने की अपील की।उनका कहना था कि सुंदर नगर में पेड़ कट चुके हैं। अब सरोजिनी नगर व आरकेपुरम में इन्हें काटा जाना है। हम इसका विरोध कर रहे है। सभी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली का नारा पेड़ काटने से पूरा नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली में स्थित सात सरकारी आवसीय कॉलोनियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव बनाया था। केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पुनर्विकास प्लान को वर्ष 2016 में ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ही दक्षिणी दिल्ली में स्थित किदवई नगर में 1123, नेताजी नगर में 2294, नैरोजी नगर में 1454, मोहम्मदपुर में 363 और सरोजनी नगर में 11 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। नैरोजी में पेड़ों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। अब इन पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह जितने पेड़ काटेंगे उससे दोगुना पौधे लगाएं जाएंगे। पूरा पुनर्विकास प्लान ग्रीन प्रोजेक्ट होगा।

1973 में पहली बार हुआ था चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 1973 में हुई थी। तब ग्रामीण किसानों ने राज्य के वन ठेकेदारों द्वारा वनों और जंगलों को काटने के विरोध में चिपको आन्दोलन चलाया था। चिपको आंदोलन का सीधे-सीधे अर्थ है किसी चीज से चिपककर उसकी रक्षा करना। जब यह आंदोलन वहां पर चल रहा था, तब वनों की कटाई को रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं पेड़ों से लिपट जाती थीं और ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने देती थी। इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी।

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इस आंदोलन को चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और ग्रामीणों ने मिलकर अंजाम दिया था। बाद में प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी सुन्दरलाल बहुगुणा ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। जिस समय यह आन्दोलन चल रहा था, उस समय केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया था। इस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम बनाया।

चिपको आंदोलन आज अधिक प्रासंगिक

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धनबाद : झरिया के अस्तित्‍व को बचाने के लिए फिर होगा आंदोलन

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:48 PM
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झरिया को उजाडने की सरकारी मंसूबे को जनता कामयाब नहीं होने देगी

धनबाद (झरिया)। झरिया के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर आंदोलन होगा। इसबार आंदोलन की मुख्‍य भूमिका में पूर्व मंत्री समरेश सिंह रहेंगे। आंदोलन की रुपरेखा तैयार करने के बावत आज झरिया प्रेस क्लब में समरेश सिंह की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें पूर्व में हो चुके झरिया आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने भाग लिया।

बैठक में निर्णय लिया गया कि झरिया को बचाने के लिए यह आखिरी आंदोलन होगा। इस आंदोलन में झरिया की जनता पूरी ईमानदारी से लड़ेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बंद आर एस पी कॉलेज को उसी जगह चालू किया जाएगा जहां वह है। इसके लिए कोर्ट जाना पड़े या कहीं और लेकिन बंद कॉलेज को खुलवाया जाएगा। बैठक में भाग ले रह लोगों ने एकसुर से कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झरिया के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है जिसे यहां की जनता सफल नहीं होने देगी।

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