चाईबासा : सर्वश्रेष्ठ पारालीगल वोलेंटियर की हालत नाजुक, रिम्स रेफर

NewsCode Jharkhand | 26 June, 2018 10:06 PM
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सेवा में जुटा रहा जिला प्रशासन

चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम)।  देश की सर्वश्रेष्ठ पारालीगल वोलेंटियर चाईबासा की बसंती गोप की तबियत बेहद ख़राब हो गयी है। अचानक उसकी हालत नाजुक बन गयी है। कैंसर से जूझ रही बसंती गोप की बिगड़ी हालत की खबर पाते ही जिले के डीसी अरवा राजकमल, डालसा सचिव, जिला सत्र न्यायधीश आदि चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचे और बसंती गोप के स्वास्थ्य की जानकारी ली। पूरा पश्चिम सिंहभूम जिला प्रशासन बसंती की सेवा में जुट गया है।

चाईबासा : बसंती गोप के इलाज के लिए मिला 1.25 लाख का सहयोग राशि

सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है और उसे बेहतर ईलाज के लिए बाहर ले जाने की बात कही है, वही बसंती गोप की ईच्छा है की वह आखरी सांस चाईबासा में ले। बता दें की बसंती गोप ने ताउम्र लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार कर समाजसेवा का ऐसा उदाहरण पेश किया की सुप्रीम कोर्ट तक उसके इस उल्लेखनीय कार्य की सराहना की।

यही वजह रही की बीते साल उसे सर्वश्रेष्ठ पारा लीगल वोलेंटियर घोषित कर केन्द्रीय कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के जज ने सम्मानित किया था। इन सबके बीच किसी को पता नहीं था की बसंती खुद कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी से लड़ रही है और उसकी आर्थिक स्थिति भी बेहद ख़राब है। घर पर मरणासन्न पड़ी बसंती की खबर जब मिडिया में छाई तो उसे बचाने की कवायात तेज हुई। आज उसकी सेवा में पूरा जिला प्रशासन और ज्यूडिसरी के अधिकारी लगे हुए हैं लेकिन वह पल पल मौत के करीब खिंची चली जा रही है।

देश की सर्वश्रेष्ठ पारालीगल वोलेंटियर को पल पल मौत के करीब जाते देख जिले के डीसी अरवा राजकमल भी भावुक हो गए हैं। बता दें की डीसी के अपील पर पुरे जिले से अधिकारी व कर्मचारियों ने मिलकर एक दिन पहले बसंती के ईलाज के लिए डेढ़ लाख रुपये नकद देकर मदद की थी। वही बसंती को देखने के लिये अरुण कुमार राय, सदस्य सचिव झालसा, संतोष कुमार, सचिव, झारखंड हाई कोर्ट लीगल सर्विस कमेटी, सत्य काम डिप्टी सेक्रेटरी झालसा सदर अस्पताल पहुंचे।

साथ में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार के मनोरंजन कवि, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार श्री कृष्ण कांत मिश्रा, व अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी गण तथा प्राधिकार के कर्मचारी गण एवं पारालीगल वालंटियर्स सदर अस्पताल पहुँचें। सभी आला अधिकारियों ने मिल के बसंती गोप के बेहतर इलाज के लिये रिम्स भेज दिया है।

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गोड्डा : पुलिस ने 59 गाय को किया बरामद, 7 तस्कर गिरफ्तार

NewsCode Jharkhand | 23 September, 2018 5:43 PM
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गोड्डा। गो वंशीय पशुओं की तस्करी के रोकने के लिए पुलिस जोर शोर से लगी हुई है। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने 59 गाय समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

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सदर एसडीपीओ रवि भूषण ने बताया कि राजाभीठा थाना क्षेत्र में गाय की तस्करी किया जा रही है। शनिवार को सदर बाजार स्थित बंका हॉट से गो वंशीय पशुओं की खरीदारी करके पड़ोसी जिले पाकुड़ के हिरणपुर स्थित हाट में सोमवार को बेचे जाने की योजना थी।

गो वंशीय पशुओं की तस्करी का खेल लगातार चल रहा था और तस्करी में शामिल लोगों को 700 से लेकर 1400 रुपये तक की मजदूरी दिया जाता था। सदर एसडीपीओ ने बताया कि गिरफ्तार तस्करों से सघन पूछताछ की जा रही है, मामले में 6 अभियुक्तों का नाम भी सामने आ चुका है। अधिकांशतः तस्कर पाकुड़ जिले से ताल्लुक रखते हैं तथा कुछ तस्कर पड़ोसी जिले साहेबगंज के हैं।

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देवघर : रसोइया संघ की हुई बैठक, चार अक्‍टूबर को देंगे धरना

NewsCode Jharkhand | 23 September, 2018 5:39 PM
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देवघर। पुराने सदर अस्पताल परिसर में देवघर जिला रसोइया संघ की बैठक में स्‍कूलों के समायोजन के नाम पर रसोइयों को कार्य से हटाए के खिलाफ आगामी चार अक्‍टूबर को डीएसई कार्यालय के समक्ष धरना देने का निर्णय लिया गया।

बैठक की अध्‍यक्षता करते हुए संघ अध्यक्षा गीता मण्डल ने कहा कि झारखंड सहित देवघर में एक स्‍कूल का दूसरे विद्यालय में समायोजन करने पर रसोइयों के समक्ष भुखमरी की समस्‍या पैदा हो गई है।

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उन्‍होंने कहा कि समायोजित किए गए स्‍कूलों के शिक्षकों समेत छात्र-छात्राओं को दूसरे विद्यालयों में भेज दिया गया है। उन स्‍कूलों में कार्यरत रसोइयों को काम से हटा दिया गया है। इनलोगों का मानदेय भी बन्द कर दिया गया है। संघ ने सरकार के इस कदम की कड़े शब्‍दों में विरोध किया है।

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पितृ पक्ष 2018: श्राद्ध क्रिया में इन खास बातों का रखें ख्याल

NewsCode | 23 September, 2018 5:27 PM
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हिंदू कर्मकांड में श्रद्धा और मंत्र के मेल से पूर्वपुरुषों (पितरों) की आत्मा की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे श्राद्ध कहते हैं। हमारे जिन सगे-संबंधियों का देहांत हो गया है, वे पितृलोक में या यत्र-तत्र विचरण करते हैं, उनके लिए पिंडदान किया जाता है। बच्चों एवं संन्यासियों के लिए पिंडदान नहीं किया जाता। गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी के बाद शुरू होते हैं श्राद्ध। हर साल श्राद्ध भाद्रपद शुक्लपक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक चलते हैं।

अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते तो सूर्य नारायण के आगे अपने दोनों हाथ ऊपर करके ये बोलें : “हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दें) को आप संतुष्ट/सुखी रखें। इस निमित्त मैं आपको अर्घ्य व भोजन करता हूं।” इसके पश्चात् आप भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और भोग लगायें।

 इन बातों का रखें खास ख्याल –

– श्राद्ध में कपड़े और अनाज दान करना ना भूलें। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

– बताया जाता है कि श्राद्ध दोपहर उपरांत ही किया जाना चाहिए। जानकारों के अनुसार जब सूर्य की छाया पैरों पर पड़ने लगे तो श्राद्ध का समय हो जाता है। दोपहर या सुबह में किये गए श्राद्ध का कोई मतलब नहीं होता है।

– जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही उत्तम ब्राह्मणों को निमंत्रण दे दें। परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए।  ब्राह्मण भोज के वक्त खाना दोनों हाथों से परोसें, एक हाथ से खाने को पकड़ना अशुभ माना जाता है।

– श्राद्ध के दिन घर में सात्विक भोजन ही बनना चाहिए। इस दिन खाने में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल  नहीं होना चाहिए। गौर करने वाली बात यह भी है कि पितरों को जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां नहीं चढ़ाई जाती हैं। इनमें अरबी, आलू, मूली, बैंगन और अन्य कई सब्जियों शामिल हैं।

– पूरे विधान में मंत्र का बड़ा महत्व है। श्राद्धकर्म में आपके द्वारा दी गयी वस्तु कितनी भी बेशकीमती क्यों न हो, आपके द्वारा यदि मंत्र का उच्चारण ठीक न हो तो काम व्यर्थ हो जाता है। मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और जिसके निमित्त श्राद्ध करते हों उसके नाम का उच्चारण भी शुद्ध करना चाहिए।

– श्राद्ध के दिन अपने पितरों के नाम से ज्यादा से ज्यादा गरीबों को दान करें।

– पिंडदान करते वक्त जनेऊ हमेशा दाएं कंधे पर रखें।

 पिंडदान करते वक्त तुलसी जरूर रखें।

– कभी भी स्टील के पात्र से पिंडदान ना करें, बल्कि कांसे या तांबे या फिर चांदी की पत्तल इस्तेमाल करें।

– पिंडदान हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके ही करें।

– पिता का श्राद्ध बेटा ही करे या फिर बहू करे। पोते या पोतियों से पिंडदान ना कराएं।

– श्राद्ध करने वाला व्यक्ति श्राद्ध के 16 दिनों में मन को शांत रखें।

– श्राद्ध हमेशा अपने घर या फिर सार्वजनिक भूमि पर ही करे। किसी और के घर पर श्राद्ध ना करें।


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