मिलिये सुज़ुकी की नई जिम्नी से…

NewsCode | 7 July, 2018 5:12 PM
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सुज़ुकी ने चौथी जनरेशन की जिम्नी को जापान में लॉन्च कर दिया है। कंपनी का कहना है कि साल के आखिर तक इसे यूरोप समेत कई दूसरे देशों में भी लॉन्च किया जाएगा।

Suzuki Jimny

नई सुज़ुकी को बॉक्सी और ऑफ-रोडर कार वाला डिजायन दिया गया है। इसका डिजायन पहली और दूसरी जनरेशन की जिप्सी से प्रेरित है। सुज़ुकी ने इस में कई नए फीचर जोड़े हैं, इनकी जानकारी इस प्रकार है…

Suzuki Jimny

  • लाइटें: ऑटो एलईडी प्रोजेक्टर हैडलैंप्स, डे-टाइम रनिंग एलईडी लाइटों के साथ दिए गए हैं। हाई-बीम असिस्ट, मल्टी-रिफलेक्टर हैलोजन फॉग लैंप्स और रेग्यूलर इंसिडेंट बल्ब वाले टेल लैंप्स भी दिए गए हैं।

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  • व्हील: 15 इंच गनमैटल फिनिश व्हील, 195/80 क्रॉस सेक्शन टायर के साथ।
  • इंफोटेंमेंट सिस्टम: सुज़ुकी का 7.0 इंच स्मार्टप्ले सिस्टम, जो एंड्रॉयड ऑटो, एपल कारप्ले और नेविगेशन सपोर्ट करता है।

Suzuki Jimny

  • कंफर्ट फीचर: ऑटो क्लाइमेट कंट्रोल, पावर विंडो, ड्राइवर ऑटो अप/डाउन, ऑटो डोर लॉक, पैसिव की-लैस एंट्री और पुश-बटन इंजन स्टार्ट-स्टॉप बटन जैसे फीचर शामिल हैं।
  • सेफ्टी: छह एयरबैग, एबीएस, ईबीडी, ब्रेक असिस्ट, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम, ट्रेक्शन कंट्रोल, ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग और लैन डिपार्चर वार्निंग जैसे फीचर शामिल हैं।

Suzuki Jimny

  • ऑफ-रोड: रिसर्कुलेटिंग बॉल पावर स्टीयरिंग, हिल लॉन्च असिस्ट, हिल डिसेंट कंट्रोल, ब्रेक एलएसडी और शिफ्ट-ऑन-फ्लाई पार्ट-टाइम ऑल-व्हील-ड्राइव, लॉ रेंज ट्रांसफर गियर के साथ।

Suzuki Jimny: Old vs New

अंतरराष्ट्रीय मॉडल में नया 1.5 लीटर के15बी 4-सिलेंडर पेट्रोल इंजन मिलेगा। यही इंजन जल्द लॉन्च होने वाली फेसलिफ्ट सियाज़ और नई अर्टिगा में भी देखने को मिलेगा। पुराने मॉडल की तरह नई जिम्नी को भी बॉडी-ऑन-फ्रेम पर तैयार किया गया है, इसका वज़न करीब एक हजार किलोग्राम के आसपास है। जापान में लॉन्च हुई जिम्नी में 1.5 लीटर इंजन के अलावा 660 सीसी पेट्रोल इंजन का विकल्प भी रखा गया है।

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इंजन और परफॉर्मेंस

इंजन 1.5 लीटर के15बी पेट्रोल
पावर 102 पीएस
टॉर्क 130 एनएम
गियरबॉक्स 5-स्पीड एमटी/4-स्पीड एटी
ड्राइव पार्ट-टाइम ऑल-व्हील-ड्राइव
माइलेज 14.70 किमी प्रति लीटर (एमटी)/13.33 किमी प्रति लीटर (एटी)

भारतीय कार बाजार की बात करें तो यहां मारूति की जिप्सी को बदलाव की दरकार है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी इसे जल्द ही बंद करने वाली है। ऐसे में चर्चाएं हैं कि कंपनी जिप्सी की जगह नई जिम्नी को भारत ला सकती है। भारत में जिम्नी को 2019 में लॉन्च किया जा सकता है। इसे मारूति के प्रीमियम डीलरशिप नेक्सा के जरिये बेचा जा सकता है।

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पितृ पक्ष 2018: श्राद्ध क्रिया में इन खास बातों का रखें ख्याल

NewsCode | 23 September, 2018 5:27 PM
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हिंदू कर्मकांड में श्रद्धा और मंत्र के मेल से पूर्वपुरुषों (पितरों) की आत्मा की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे श्राद्ध कहते हैं। हमारे जिन सगे-संबंधियों का देहांत हो गया है, वे पितृलोक में या यत्र-तत्र विचरण करते हैं, उनके लिए पिंडदान किया जाता है। बच्चों एवं संन्यासियों के लिए पिंडदान नहीं किया जाता। गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी के बाद शुरू होते हैं श्राद्ध। हर साल श्राद्ध भाद्रपद शुक्लपक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक चलते हैं।

अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते तो सूर्य नारायण के आगे अपने दोनों हाथ ऊपर करके ये बोलें : “हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दें) को आप संतुष्ट/सुखी रखें। इस निमित्त मैं आपको अर्घ्य व भोजन करता हूं।” इसके पश्चात् आप भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और भोग लगायें।

 इन बातों का रखें खास ख्याल –

– श्राद्ध में कपड़े और अनाज दान करना ना भूलें। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

– बताया जाता है कि श्राद्ध दोपहर उपरांत ही किया जाना चाहिए। जानकारों के अनुसार जब सूर्य की छाया पैरों पर पड़ने लगे तो श्राद्ध का समय हो जाता है। दोपहर या सुबह में किये गए श्राद्ध का कोई मतलब नहीं होता है।

– जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही उत्तम ब्राह्मणों को निमंत्रण दे दें। परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए।  ब्राह्मण भोज के वक्त खाना दोनों हाथों से परोसें, एक हाथ से खाने को पकड़ना अशुभ माना जाता है।

– श्राद्ध के दिन घर में सात्विक भोजन ही बनना चाहिए। इस दिन खाने में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल  नहीं होना चाहिए। गौर करने वाली बात यह भी है कि पितरों को जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां नहीं चढ़ाई जाती हैं। इनमें अरबी, आलू, मूली, बैंगन और अन्य कई सब्जियों शामिल हैं।

– पूरे विधान में मंत्र का बड़ा महत्व है। श्राद्धकर्म में आपके द्वारा दी गयी वस्तु कितनी भी बेशकीमती क्यों न हो, आपके द्वारा यदि मंत्र का उच्चारण ठीक न हो तो काम व्यर्थ हो जाता है। मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और जिसके निमित्त श्राद्ध करते हों उसके नाम का उच्चारण भी शुद्ध करना चाहिए।

– श्राद्ध के दिन अपने पितरों के नाम से ज्यादा से ज्यादा गरीबों को दान करें।

– पिंडदान करते वक्त जनेऊ हमेशा दाएं कंधे पर रखें।

 पिंडदान करते वक्त तुलसी जरूर रखें।

– कभी भी स्टील के पात्र से पिंडदान ना करें, बल्कि कांसे या तांबे या फिर चांदी की पत्तल इस्तेमाल करें।

– पिंडदान हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके ही करें।

– पिता का श्राद्ध बेटा ही करे या फिर बहू करे। पोते या पोतियों से पिंडदान ना कराएं।

– श्राद्ध करने वाला व्यक्ति श्राद्ध के 16 दिनों में मन को शांत रखें।

– श्राद्ध हमेशा अपने घर या फिर सार्वजनिक भूमि पर ही करे। किसी और के घर पर श्राद्ध ना करें।


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गिरिडीह :  प्रधानमंत्री ने अपनी बहनों को भेजा तोहफा, राखी के बदले आया स्मार पत्र

NewsCode Jharkhand | 23 September, 2018 6:08 PM
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गिरिडीह।  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गिरिडीह की दो बहनों को रक्षाबंधन का तोहफा भेजा है।  मोहलीचुआ की रहने वाली रामबाबू साहू की पुत्री सेजल कुमारी और चाहत कुमारी ने प्रधानमंत्री को राखी भेजी थी।

राखी मिलने के बाद पीएमओ से इन दोनों बहनों के लिए स्मार पत्र आया है। बताया गया कि पिछले साल भी इन दोनों बहनों ने प्रधानमंत्री को राखी भेजी थी और पिछले साल भी उन्हें स्मार पत्र मिला था।

इस बार भी स्मार पत्र मिलने से दोनों बहनें बेहद खुश हैं। इनका कहना है कि प्रधानमंत्री सहृदय व्यक्ति हैं और उन्होंने दिल से राखी स्वीकार की। इसी वजह से वहां से प्रमाण पत्र भेजा गया है।

स्मार पत्र मिलने से परिवार  के  सदस्य भी हर्षित हैं। बताया गया कि ये दोनों बहनें हर साल देश के सैनिकों को भी राखी भेजती हैं ताकि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की कलाईयाँ सूनी न रह जाए।

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रांची : पीएम की तस्वीर बनाकर भेंट करना चाहती थी छात्रा, सुरक्षा गार्ड ने रोका

NewsCode Jharkhand | 23 September, 2018 6:06 PM
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रांची। नरेंद्र मोदी देश वासियों के चहेते प्रधानमंत्री हैं। मोदी वैसे तो बच्चों और छात्रों में काफी लोकप्रिय है लेकिन पीएम मोदी के सभा स्थल से एक छात्रा को निराश होकर लौटना पड़ा। दरअसल प्रधानमंत्री का कार्यक्रम रांची के धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में हो रहा था।

कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ बीमा योजना का शुभारम्भ कर रहे थे। इस एतिहासिक पल का साक्षी बनाने के लिए सभा स्थल पर लाखों लोग मौजूद थे। वैसे भी मोदी जहाँ जाते है तो उनके चाहने वाले लोगों की ख़ुशी देखते ही बनती है।

रांची : प्रधानमंत्री ने रांची से की आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत

पीएम हमेशा छात्र हितों की बात करते है शायद इसी लिए मोदी से मिलने के लिए रातू रोड की डिम्पी नाम की छात्रा सभा स्थल तक पहुंची, लेकिन डिम्पी को प्रधानमंत्री के सुरक्षा गार्ड ने रोक दिया। डिम्पी के हाथ में नरेंद्र मोदी की तस्वीर थी जिसे डिम्पी ने खुद अपने हाथों से बड़े अरमान से बनाई थी। मोदी की तस्वीर में बड़े ही प्यार से रंग भरी लेकिन सुरक्षा गार्ड द्वारा रोके जाने के कारण मोदी के तस्वीर के साथ डिम्पी के अरमानों के रंग भी फीके पड़ गए।

फिलहाल डिम्पी रांची मारवाड़ी कॉलेज बायोटेक की छात्रा है। मैट्रिक 70% अंक से पास है, डिम्पी पढ़ाई में भी काफी अच्छी है इसके बावजूद डिम्पी अपने चहेते प्रधानमंत्री से नही मिल पायी क्योंकि उसके पास पीएम से मिलने के लिए कागज के टुकड़े वाले पास नही थे।

डिम्पी मोदी से मिलने के लिए सुरक्षा कर्मियों से लाख बिनती करती रही लेकिन किसी ने उस छात्रा की फरियाद तक नही सुनी और पीएम से अगली बार मुलाकात करने की उम्मीद लिए डिम्पी निराश होकर अपने घर पैदल लौट गई।

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