टेस्टिंग के दौरान दिखी नई रेनो क्विड, देखें तस्वीरें

NewsCode | 25 June, 2018 2:25 PM
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रेनो ने साल 2015 में क्विड हैचबैक को लॉन्च किया था। आकर्षक डिजायन, दमदार फीचर और बेहतर माइलेज की बदौलत लोगों ने इसे हाथों हाथ लिया। क्विड के प्रति ग्राहकों का रूझान देखते हुए कंपनी समय-समय पर इसके अपडेट वर्जन और लिमिटेड एडिशन भी उतारती रही है। अब एक रेनो क्विड को टेस्टिंग के दौरान देखा गया है। डिजायन को छिपाने के लिए इसे अच्छे से कवर किया हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह रेनो क्विड का कॉस्मेटिक अपडेट वर्जन हो सकता है।

Renault Kwid

तस्वीरों पर गौर करें तो इसके आगे वाले डिजायन, पीछे वाले बंपर और साइड फेंडर में मामूली बदलाव नज़र आता है, बाकी का डिजायन मौजूदा मॉडल से मिलता-जुलता है। पीछे की तरफ बाएं वाले हिस्से में एग्जॉस्ट पाइप दिया गया है, जो कवर से ढके होने की वजह से दिखाई नहीं दे रहा है। आगे की तरफ लगे रेनो के लोगों को भी कवर से ढका हुआ है, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यहां चार्जिंग पोर्ट छुपा हुआ हो सकता है। रेनो जोय और निसान लीफ में भी इस जगह चार्जिंग पोर्ट दिया गया है।

Renault Kwid

रेनो ये घोषणा पहले ही कर चुकी है कि वह जल्द ही क्विड इलेक्ट्रिक को लॉन्च करेगी। चर्चाएं हैं कि सबसे पहले इसे चीन में लॉन्च किया जाएगा, इसके बाद इसे भारत में उतारा जाएगा। अब देखने वाली बात ये होगी कि कैमरे में कैद हुई कार रेनो क्विड का अपडेट वर्जन है या फिर इलेक्ट्रिक अवतार है।

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पितृ पक्ष 2018: श्राद्ध क्रिया में इन खास बातों का रखें ख्याल

NewsCode | 23 September, 2018 5:27 PM
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हिंदू कर्मकांड में श्रद्धा और मंत्र के मेल से पूर्वपुरुषों (पितरों) की आत्मा की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे श्राद्ध कहते हैं। हमारे जिन सगे-संबंधियों का देहांत हो गया है, वे पितृलोक में या यत्र-तत्र विचरण करते हैं, उनके लिए पिंडदान किया जाता है। बच्चों एवं संन्यासियों के लिए पिंडदान नहीं किया जाता। गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी के बाद शुरू होते हैं श्राद्ध। हर साल श्राद्ध भाद्रपद शुक्लपक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक चलते हैं।

अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते तो सूर्य नारायण के आगे अपने दोनों हाथ ऊपर करके ये बोलें : “हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दें) को आप संतुष्ट/सुखी रखें। इस निमित्त मैं आपको अर्घ्य व भोजन करता हूं।” इसके पश्चात् आप भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और भोग लगायें।

 इन बातों का रखें खास ख्याल –

– श्राद्ध में कपड़े और अनाज दान करना ना भूलें। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

– बताया जाता है कि श्राद्ध दोपहर उपरांत ही किया जाना चाहिए। जानकारों के अनुसार जब सूर्य की छाया पैरों पर पड़ने लगे तो श्राद्ध का समय हो जाता है। दोपहर या सुबह में किये गए श्राद्ध का कोई मतलब नहीं होता है।

– जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही उत्तम ब्राह्मणों को निमंत्रण दे दें। परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए।  ब्राह्मण भोज के वक्त खाना दोनों हाथों से परोसें, एक हाथ से खाने को पकड़ना अशुभ माना जाता है।

– श्राद्ध के दिन घर में सात्विक भोजन ही बनना चाहिए। इस दिन खाने में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल  नहीं होना चाहिए। गौर करने वाली बात यह भी है कि पितरों को जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां नहीं चढ़ाई जाती हैं। इनमें अरबी, आलू, मूली, बैंगन और अन्य कई सब्जियों शामिल हैं।

– पूरे विधान में मंत्र का बड़ा महत्व है। श्राद्धकर्म में आपके द्वारा दी गयी वस्तु कितनी भी बेशकीमती क्यों न हो, आपके द्वारा यदि मंत्र का उच्चारण ठीक न हो तो काम व्यर्थ हो जाता है। मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और जिसके निमित्त श्राद्ध करते हों उसके नाम का उच्चारण भी शुद्ध करना चाहिए।

– श्राद्ध के दिन अपने पितरों के नाम से ज्यादा से ज्यादा गरीबों को दान करें।

– पिंडदान करते वक्त जनेऊ हमेशा दाएं कंधे पर रखें।

 पिंडदान करते वक्त तुलसी जरूर रखें।

– कभी भी स्टील के पात्र से पिंडदान ना करें, बल्कि कांसे या तांबे या फिर चांदी की पत्तल इस्तेमाल करें।

– पिंडदान हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके ही करें।

– पिता का श्राद्ध बेटा ही करे या फिर बहू करे। पोते या पोतियों से पिंडदान ना कराएं।

– श्राद्ध करने वाला व्यक्ति श्राद्ध के 16 दिनों में मन को शांत रखें।

– श्राद्ध हमेशा अपने घर या फिर सार्वजनिक भूमि पर ही करे। किसी और के घर पर श्राद्ध ना करें।


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सरायकेला : मैथिली गीतों से बंंधा समां, मंत्रमुग्‍ध हुए लोग

NewsCode Jharkhand | 23 September, 2018 5:53 PM
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सरायकेला।  सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर कॉलोनी स्थित बाबू वीर कुंवर सिंह मैदान में मिथिला की मिठास और मैथिली गीतों का समांं ऐसा बंधा कि लोग मंत्रमुग्ध होकर मैथिली गीतों का रसास्वादन करते रहेे।

पिछले 40 सालों से यहां मिथिला संकीर्तन मंडली की ओर से मैथिली गीतों की भजन संध्या आयोजित की जाती रही है जिसमें स्थानीय मिथिला के कलाकार और इस मंडली के ही सदस्य अपनी प्रस्तुति देते हैं।

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वैसे यहां ये भी बताते चलें कि इस संकीर्तन मंडली ने महान विद्यापति कवि के गीतों को अपना राग देनेवाले विभूति प्रेमी जी ने भी कभी इस मंडली का शोभा बढ़ायी थी।

आज उनके पुत्र अशोक झा द्वारा अपने भजनों की प्रस्तुति दी गई। वहीं विनय झा सरीखे कलाकारों ने भी इसी संकीर्तन मंडली से मिथिला केे मिठास सीखेे और आज अपनी प्रतिभा से मिथिला वासियों का मनोरंजन करते नजर आ रहे हैं।

वैसे देर रात तक वीर कुंवर सिंह मैदान में लोग मैथिली गीतों के मिठास में गोते लगाते रहे। इस दौरान काफी संख्या में मिथिला की महिलाएं भी मौजूद रहीं।

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टुण्डी : दुर्गा पूजा को लेकर नई कमेटी गठित

NewsCode Jharkhand | 23 September, 2018 5:49 PM
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टुण्‍डी (धनबाद)। मोहलीडीह पंचायत अन्तर्गत पोखरिया दुर्गा पूजा समिति ने नई कमेटी गठित करने के लिए बैठक की। कमेटी के अध्यक्ष भूपेत मंडल, सचिव राजेश राम और कोषाध्यक्ष अरुण कुमार सर्वसम्मति से चुने गए।

वहीं नरेश महतो, पप्पू मंडल, गौतम रवानी, काजल कुमार, प्रेम कर्मकार, अंकित राम सदस्‍य बनाए गए हैं।

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बैठक की अध्‍यक्षता मोहनलाल मंडल ने की। बैठक में शांतिपूर्ण पूजा व मेले के आयोजन पर चर्चा की गई।

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