बोकारो : सड़कों पर जलजमाव से मलेरिया को दे र‍हा है दावत

NewsCode Jharkhand | 14 May, 2018 9:48 PM

बोकारो : सड़कों पर जलजमाव से मलेरिया को दे र‍हा है दावत

खेतको पंचायत में डायरिया का प्रकोप

बेरमो(बोकारो)। पेटरवार प्रखंड अंतर्गत खेतको पंचायत में बीते कुछ दिनों से डायरिया का प्रकोप देखने को मिला है। दरअसल डायरिया का प्रकोप पानी की अशुद्धता के कारण देखने को मिली है।  खेतको पंचायत में दर्जनों लोग जिनमें व्यक्ति, महिला वह बच्चे ग्रसित थे जिन का इलाज बोकारो थर्मल अस्पताल स्थित डीवीसी अस्पताल में चल रहा था। खेतको पंचायत में इन दिनों जो भी बीमारियां उत्पन्न हो रही है सभी बीमारियां कहीं ना कहीं प्रदूषण से जुड़ा हुआ है।

खेतको पंचायत में इन दिनों जहां डायरिया का प्रकोप हावी है इससे अब लोगों को यह भय सता रहा है कि सड़कों पर जल जमाव से कहीं मलेरिया का भी दस्तक देखने को ना मिल जाए। दरअसल लोगों में यह डर होना वास्तविक है, क्‍योंकि खेतको पंचायत के गुडीबकरी, खेतको प्रवेश करने का मुख्य सड़क पर जलजमाव देखने को मिल रहा है। सड़कों पर जलजमाव से कहीं मलेरिया का खतरा से लोगों को जूझना ना पड़े।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इन समस्याओं से प्रखंड के आला अधिकारी बीडीओ समय पर उचित कार्य करें। ताकि भविष्य में कोई अप्रिय घटना न घट सके। खेतको पंचायत में सडक पर  जलजमाव होने के का  मुख्य कारण खेतको पंचायत में सड़कों के किनारे नाली का ना होना माना जा सकता है। वहीं दूसरा घरों से निकलने वाला पानी सड़क पर ही बहता छोड़ दिया जाता है, जिससे सड़क पर ही पानी जमा हो जाता है।

ज्ञात हो कि खेतको वासियों के इलाज के लिए ना कोई सरकारी अस्पताल ना ही कोई उप स्वास्थ्य केंद्र जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं इस संदर्भ मे पेटरवार बीडीओ इन्द्रकुमार से मामले से अवगत कराते हुए जानकारी लिया गया तो उन्होने बताया की खेतको पंचायत मे पीडित व्यक्ती के ईलाज के लिए स्वास्थ विभाग से डॉक्टरों की एक टीम जल्द ही भेजा जायेगा।

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सडकों पर जल जमाव की समस्या का समाधन भी सम्भवत: जल्द कर लिया जायेगा। साथ ही खेतको मे इलाज की व्यवस्था के सवाल पर बताया की उक्त मामले को लेकर विभाग के अधिकारियो को रिपोर्ट भेजा जा चुका है।

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  • DEEPAK BESRA

    May 14, 2018

    Thanks sir

रांची : निपाह वायरस- झारखंड में हमारे सामने दो खतरे

NewsCode Jharkhand | 27 May, 2018 5:59 PM

रांची : निपाह वायरस- झारखंड में हमारे सामने दो खतरे

केरल से आने वाली ट्रेन और मोरहाबादी में चमगादड़ों का बसेरा

रांची। निपाह वायरस ने देश में नया भय पैदा कर दिया है। केरल में 11 मौतों के बाद झारखंड में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। राजधानी वासियों के समक्ष दो खतरे हैं। पहला सबसे बड़ा खतरा केरला से आने वाली सीधी ट्रेन हटिया-अर्नाकुलम एक्सप्रेस।

चूंकि, केरल प्रभावित क्षेत्र है, ऐसे में वहां से पीड़ित कोई व्यक्ति रांची आता है तो यहां संक्रमण फैलने की आशंका है। दूसरा खतरा है- मोरहाबादी में निपाह वायरस के वाहकों यानी चमगादड़ों का बसेरा। दिन में किसी भी समय जाकर पेड़ों की टहनियों में चमगादड़ लटके आसानी से देखा जा सकता है।

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चिंता की बात यह है कि यहां यूकलिप्टस के लंबे- लंबे पेड़ सैकड़ों की संख्या में है, जिनकी ऊपरी टहनियों में चमगादड़ (बैट) लटके रहते हैं। दिन में किसी भी समय जाकर इसे आसानी से देखा जा सकता है। नीचे ऑक्सीजन पार्क और खुली जगह हैं, जहां दिन भर लोग घूमते हैं।

चमगादड़ों द्वारा जूठे किए गए फल कोई गलती से भी खा ले तो मामला खतरनाक हो सकता है। क्योंकि चमगादड़ के मुंह में काफी संख्या में बैक्टीरिया होते हैं, जो फलों में चले जाते हैं। झारखंड में स्थिति यह है कि यहां ठीक से इलाज की कोशिश दूर, जांच तक संभव नहीं है। देश में सिर्फ पुणे स्थित लैब में निपाह की जांच हो सकती है। ऐसे में यदि यहां संक्रमित व्यक्ति की जांच रिपोर्ट वहां से आने में एक-डेढ़ माह लग जाएंगे। तब तक पीड़ित का बचना मुश्किल होगा।

 वो सबकुछ, जो आप जानना चाहते हैं

24 घंटे में कोमा में मरीज: धुंधला दिखना, सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और बेहोशी इस बीमारी के लक्षण हैं। तुरंत इलाज न मिले तो 48 घंटे में मरीज कोमा में जा सकता है।

संक्रमण से फैलता है

_फ्रूट बैट या सूअर जैसे जानवर वाहक हैं। संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने या इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन से निपाह वायरस का संक्रमण होता है।

पहले मलेशिया के निपाह में मिला वायरस

एनआईवी वायरस की पहचान सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कामपुंग सुंगाई निपाह में हुई थी। जब वहां सूअरों के जरिए फैला था। 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में भी इस वायरस का संक्रमण फैला था। तब सामने आए 66 केसों में से 45 की मौत हुई थी। 2004 में फ्रूट बैट द्वारा संक्रमित किए गए खजूर खाने से बांग्लादेश में भी लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए थे। 2007 में पश्चिम बंगाल के नदिया में भी निपाह के संक्रमण से पांच लोगों की मौत हो चुकी है।

क्या कहना है झारखंड के स्वास्थ्य विभाग का 

अभी यह कहना जल्दबाजी है। राज्य में एडवाइजरी अलर्ट जारी कर दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर एहतियाती कदम उठाए जाएंगें। इस मामले में केंद्र सरकार हालात की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।

डॉ. सुमंत मिश्रा, निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं, झारखंड

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बड़कागांव : भीषण गर्मी से अस्पतालों में बढ़ रही है मरीजों की संख्या

NewsCode Jharkhand | 27 May, 2018 3:34 PM

बड़कागांव : भीषण गर्मी से अस्पतालों में बढ़ रही है मरीजों की संख्या

बड़कागांव (हजारीबाग)बड़कागांव प्रखंड में भीषण गर्मी और बीच-बीच में मौसम में हो रहे बदलाव के कारण वायरल फीवर, मलेरिया, डायरिया, लू का प्रकोप बढ़ रहा है। बड़कागांव प्रखंड के सभी क्षेत्रों से काफी संख्या में लोगों के वायरल फीवर, मलेरिया, लू की चपेट में है। इससे प्रभावित लोग सर्दी-खांसी-जुकाम उल्टी दस्त लगने की शिकायत लेकर चिकित्सक के पास लगातार आ रहे हैं।

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बड़कागांव के सरकारी अस्पताल के अलावे निजी क्लीनिकों एवं नर्सिंग होम में मरीजों की भीड़ प्रतिदिन बढ़ रही है। बड़कागांव अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर श्याम किशोर कांत के अनुसार गर्मी में लू से बचने के लिए पानी भरपूर मात्रा में पीना चाहिए।

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रांची : बच्चों में टीबी के रोकथाम के लिए समन्वय बनाये- स्‍वास्‍थ्‍य सचिव

NewsCode Jharkhand | 26 May, 2018 8:26 PM

रांची : बच्चों में टीबी के रोकथाम के लिए समन्वय बनाये- स्‍वास्‍थ्‍य सचिव

रांची। नामकुम स्थित आईपीएच में टीबी पुनरीक्षित राष्ट्रीय यक्ष्मा नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सभी जिला की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। जिसकी अध्यक्षता निधि खरे प्रधान सचिव स्वस्थ्य एवं  परिवार कल्याण विभाग ने की।

इस बैठक में प्रधान सचिव ने नोटिफिकेशन को बढ़ाने का निर्देश दिया एवं राज्य के सभी दवा दुकानों से टीबी नोटिफिकेशन हेतु सहयोग लेने का निर्देश दिया। बच्चों में होने वाले टीबी के रोकथाम के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों, कुपोषण केंद्रों से  समन्वय स्थापित का कार्य करने का निर्देश दिया।

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साथ ही साथ प्रधान सचिव ने अन्य विभागो जैसे पंचायती राज, और अन्य विभागो से भी सहयोग लेने का निर्देश दिया ताकि टीबी के बारे में ज्यादा ज्यादा जानकारी लोगो को हो सके। प्रधान सचिव ने टीबी मरीजों को टीबी चैंपियन (टीबी से ठीक हुए रोगी) बना कर उनसे टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में सहयोग का भी निर्देश दिया।

कार्यक्रम में कृपानन्द झा ,अभियान निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन , डॉ  सुमंत मिश्रा  निदेशक प्रमुख  स्वस्थ्य सेवाएं, डॉ राकेश दयाल राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी झारखण्ड, डॉ राजाभाऊ येओले,  विभिन्न ज़िलों से आये जिला यक्ष्मा पदाधिकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे।

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