बोकारो : काम पर लौटे डॉक्‍टर, बहाल हुई सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा

NewsCode Jharkhand | 14 March, 2018 3:18 PM
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बोकारो। मंगलवार को सदर अस्पताल में चर्म रोग के ओपीडी में तैनात डॉ रजनी कुमारी के साथ एक मरीज के परिजन द्वारा की गई दुव्‍यर्वहार के बाद चिकित्सकों द्वारा ओपीडी सेवा ठप कर दी गयी थी। जो पुनः बुधवार को बहाल हो गई। चिकित्सकों द्वारा ओपीडी में कार्य प्रारंभ कर दी गयी। दुव्‍यर्वहार के बाद चिकित्सक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नराज हो गए थे।

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जिसके बाद मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इलाज के बिना मरीजों को लौटना पड़ा। चिकित्सीय व्‍यवस्था बहाल होने के बाद मरीजो ने राहत महसूस किया है। सिविल सर्जन ने बताया कि उपायुक्त ने सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने का आश्वासन दिया है। बुधवार को सभी ओपीडी के ताले खोले गए व चिकित्सक भी काम पर लौट आए।

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सिमडेगा : कोलेबिरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दो चिकित्सक छह माह से हैं लापता

NewsCode Jharkhand | 20 September, 2018 8:21 PM
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सिमडेगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलेबिरा में पदस्थापित डॉ. शशि जसवाल एवं डॉ. रोशन प्रवीण खलखो विगत कई महीनों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गायब हैं। राज्य सरकार द्वारा 6 माह पूर्व इन दोनों चिकित्सकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलेबिरा में पदस्थापित किया गया था। इनमें से डॉक्टर शशि जायसवाल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलेबिरा में अपना योगदान देने के बाद मात्र दो-तीन दिन तक ड्यूटी की। इसके बाद लगभग 6 महीने से वे गायब हैं। वहीं डॉक्टर रोशन प्रवीण खलखो जिला में योगदान देने के बाद भी आज तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलेबिरा नहीं पहुंचे।

इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रखंड के विभिन्न गांवों से  प्रतिदिन 300 से भी अधिक मरीज इलाज कराने आते हैं। केंद्र में दो ही चिकित्सक हैं जिसके चलते उन्हें काफी परेशानी होती है। एक अन्य चिकित्सक डॉक्टर मुरारी प्रसाद को भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलेबिरा में पदस्थापित किया गया था किंतु वे 14 फरवरी से गायब हैं। ग्रामीणों ने इस संबंध में झारखंड सरकार एवं उपायुक्त से उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

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चास : पिंड्राजोरा के डाबर गांव में धूमधाम से मनाया गया मुहर्रम

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:14 PM
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चास(बोकारो)। पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के केलिया डाबर में मुहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लाठी खेल का आयोजन किया।

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लाठी खेल में 3 क्लब 5 स्टार क्लब, सनराइज क्लब, लक्की स्टार क्लब ने खेल दिखाया। लक्की स्टार क्लब ने भारत के सैनिक किस तरह से दुश्मन के इलाके में घुस कर आतंकवादियों को मरते है और अपना भारत का झंडा फहराते है ये दिखाया गया है।

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लक्की स्टार क्लब ने देश भक्ति गानों के साथ अपना खेल दिखाया देश कि शान तिरंगा को दुश्मन के इलाके में फहराकर दिखाया। लाठी खेल में दोनों समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। डाबर में लाठी खेल का आयोजन लगभग 20 वर्षो से किया जाता है।

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इस मौके पर अजीत सिंह चौधरी, कामदेव सिंह चौधरी, सुबलचंद्र महतो, यकीन अंसारी, अकबर अंसारी, लतीफ़ अंसारी, आवेदिन अंसारी, यकीन अंसारी, रहमगोल अंसारी, बदल सिंह चौधरी, मिहिर महतो आदि मौजूद थे।

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कोडरमा : मुहर्रम में कई हिन्दू परिवार पूरी श्रद्धा से निकालते है ताजिया और निशान

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:07 PM
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कोडरमाकोडरमा जिले में मुहर्रम के मौके पर कई हिन्दू परिवारों द्वारा पिछले कई पीढियों से ताजिया और निशान (झंडा) निकालने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। समाजिक सौहार्द की प्रतिमूर्ति इन परिवारों में चाराडीह इलाके के उमाशंकर उर्फ तुफानी सिंह गुलशन कुमार, गाँधी स्कूल रोड़ निवासी गजाधर भारती, भादेडीह निवासी जयप्रकाश वर्मा के परिवार शामिल है।

सभी परिवारों को आसपास के ग्रामीण इस कार्य में निष्ठा भाव से परंपरा निर्वहन और क्षेत्र परिभ्रमण के दौरान पुरा सहयोग देते हैं। इस बावत पूछे जाने पर उमाशंकर उर्फ तुफानी सिंह ने बताया कि उनका परिवार पिछले कई पीढ़ियों से यह परंपरा निभा रही है।

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उन्होंने कहा कि उनके पुर्वजों ने अपनी किसी मन्नत के पूरा होने के बाद इसकी शुरूआत की थी जो आज जारी है। हालाकि इस परिवार द्वारा बीती रात तक इसकी सारी तैयारी पूरी कर ली गई थी मगर उमाशंकर के बड़े भाई निर्मल सिंह का आज सुवह निधन हो जाने के कारण इस वर्ष इस परिवार द्वारा आज ताजिया नही निकाला गया।

गांधी स्कूल रोड निवासी गजाधर भारती ने बताया कि उनके दादा स्व. गुरूचरण राम (उत्पाद विभाग में जमादार थे) ने श्रद्धा से 1924 में इस मौके पर निशान (सरकारी झंडा) निकाला था जिस परंपरा का उनके पिता स्व. रामेश्वर राम और अब वे और उनका परिवार निर्वहन कर रहे हैं।

भादेडीह निवासी जयप्रकाश वर्मा ने बताया कि उनके दादा स्व. बुधन सोनार ने ताजिया निकालाना शुरू किया था। फिर उनके पिता स्व. सुखदेव प्रसाद और अब वे इस परंपरा को निभा रहे है। इन दोनों परिवारों के द्वारा आज ताजिया और झंडा निकाला गया।

इसी परिवार के द्वारा यहाँ के इमामबाड़े के लिए भूमि उपलब्ध करा इसकी स्थापना की थी। जहाँ सभी लोग जुटते हैं। उन्होंने बताया कि मुहर्रम के दिन उनके घर चुल्हा नही जलता वे मातम मनाते है। और तीजा के दिन ही सारी औपचारिकताए पूरी की जाती है।

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