बोकारो : 85 वर्षीय मोहन भाई का महादान, रिसर्च के लिए रिम्स को दिया अपना देह

NewsCode Jharkhand | 6 January, 2018 9:57 PM

बोकारो : 85 वर्षीय मोहन भाई का महादान, रिसर्च के लिए रिम्स को दिया अपना देह

घरवालों को शव पहुंचाने के लिए दे रखे हैं पैसे

बोकारो। चास  के रहने वाले 85 वर्षीया मोहन भाई कुंडलिया ने महादान किया है। अपने शरीर को रिम्स को दान कर दिया। उनके मानना है कि मृत्यु के बाद अगर शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए काम आ जाये तो उससे बड़ा कोई काम नहीं हो सकता।  मोहन भाई ने मृत शरीर को रांची पहुंचाने के लिए भी राशि भी घर वालों को दे रखी है। घरवाले भी उनसे सहमत हैं। उनको प्रेरणा स्त्रोत मान अपना भी शरीर दान देने की बात कह रहे हैं।

दूसरों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत

मोहन भाई के इस निर्णय के बाद समाजसेवी गोपाल मुरारका ने भी अपना शरीर दान देने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने अपना ऑर्गन भी दान देने के लिए निबंधन करा लिया। इससे समाज में लोगों के बीच एक अच्छा मैसेज गया है।

मोहन भाई का जीवन

चास के रहने वाले और गुजराती समाज से ताल्लुक रखने वाले मोहन भाई अपने छोटे भाई के परिवार के साथ रहते हैं। वे इस उम्र में भी लोगों की सेवा करने के लिए एक निजी फार्म में काम करते हैं। मिलने वाली तनख्वाह से वो समाज सेवी गोपाल मुरारका के साथ मिल कर असहाय लोगों के लिए मदद का साधन जुटाते हैं।  मोहन भाई बीते एक वर्ष से बीमार रहने लगे तो उन्होंने अपना शरीर चिकित्सा के पढ़ाई करने वाले छात्रों को रिसर्च के लिए देने का मन बनाया। इसके बाद उन्होंने पहले धनबाद स्थित मेडिकल कालेज से सम्पर्क किया। लेकिन वहां इस तरह की व्यवस्था नहीं रहने की बात कही गयी। इसके बाद उन्होंने बोकारो उपायुक्त को 8 जुलाई 2016 को आवेदन दिया था। उसके बाद उन्होंने रिम्स रांची से संपर्क कर इस आवेदन प्रक्रिया को पूरा किया गया। सभी प्रक्रिया को पूरा करते हुए 8 मई 2017 को उपायुक्त ने इसकी सहमति प्रदान की। इस प्रक्रिया में 9 महीने का समय लगा।

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20 हजार की रकम भतीजे को दिया 

मोहन भाई ने मृत्यु के बाद पार्थिव शरीर को रांची पहुँचाने के लिए बीस हजार की रकम अपने भतीजे जीतन कुंडलिया को दे रखा है। उन्होंने कहा कि मरने के बाद उनके ऊपर एक पैसा भी खर्च नहीं किये जायें।

परोपकार है मुख्य लक्ष्य

मोहन भाई समाज के लिए सदा काम करते रहे हैं। उन्होंने अंतिम समय में भी शरीर समाज और देश के लिए दान कर परोपकार सोच का नमूना पेश किया है। उनका मानना है की उन्हें अब किसी भी चीज की जरुरत नहीं है। समाज सेवा से बढ़ कर कोई काम नहीं है। वो इस निर्णय से बहुत खुश हैं।

वहीं उनकी बहू एनी कुंडलिया ने बताया कि मोहन भाई ने आज तक अपने लिए कुछ नहीं किया । वे हमेशा दूसरों के लिए ही सोचते और करते आये हैं। उनके फैसले के साथ पूरा परिवार खड़ा है | बहू ने भी इसी तरह से शरीर दान देने की बात कही है। समाजसेवी गोपाल मुरारका ने कहा कि आज के समय में शरीर का रिसर्च जरुरी है, जो खरीदने से भी नहीं मिलता है। उनका ये कदम सराहनीय है।

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गढ़वा : हवलदार की गोली मारकर हत्या, छुट्टी नहीं मिलने से नाराज जवान ने दिया अंजाम

NewsCode Jharkhand | 21 April, 2018 10:10 AM

गढ़वा : हवलदार की गोली मारकर हत्या, छुट्टी नहीं मिलने से नाराज जवान ने दिया अंजाम

गढ़वा। जिले में आज एक लोमहर्षक घटना घटित हुई। एक पुलिस जवान ने खुद के कंपनी के हवलदार की गोली मार कर हत्या कर दी। घटना के बाबत आपको बताएं कि निकाय चुनाव कराने आये आईआरबी की एक कंपनी जो नामधारी कॉलेज स्थित मतगणना केंद्र की सुरक्षा में तैनात थी।

हवलदार अफ़रोज़ शमद की गई जान

कल मतगणना समाप्त होने के साथ आज कंपनी यहां से कूच करने की तैयारी में थी कि अहले सुबह सभी को गोली चलने की आवाज सुनायी देती है। सभी उस आवाज की दिशा में दौड़ते हैं तो वहां देखते हैं कि उनके कंपनी का हवलदार मुंगेर निवासी अफ़रोज़ शमद मृत पड़े हुए हैं।

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IRB जवान गोली मारकर फरार

जवान और अधिकारियों ने मालूम किया तो जानकारी मिली कि मझिआंव थाना क्षेत्र निवासी आईआरबी जवान मुक्ति नारायण सिंह द्वारा उक्त हवलदार को गोली मारी गयी है और उसे हथियार ले कर भागते देखा गया है।

छुट्टी नहीं मिलने से नाराज था मुक्ति नारायण

एक जवान द्वारा हत्या क्यों कि गयी इसका कारण बताया गया कि उक्त जवान द्वारा लगातार छुट्टी मांगा जा रहा था। छुट्टी नहीं मिलने से नाराज जवान द्वारा हवलदार की हत्या जैसी घटना को अंजाम दिया गया।

 

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रांची : कोयला मंत्रालय ने चेयरमैन को दी जानकारी

NewsCode Jharkhand | 21 April, 2018 9:07 AM

रांची : कोयला मंत्रालय ने चेयरमैन को दी जानकारी

रांची। कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया चेयरमैन को अप्‍वाइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट के निर्णय की जानकारी दी है। इसके अनुरूप व्‍यवस्‍था करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय के अवर  सचिव संजीब भट्टाचार्य ने इस बाबत 20 अप्रैल को पत्र लिखा था। उन्‍होंने कहा है कि मंत्रालय के अपर सचिव सुरेश कुमार को तत्‍काल प्रभाव से कोल इंडिया चेयरमैन का प्रभाव सौंपा गया है। वह अगले आदेश या इस पद पर नियमित नियुक्ति होने तक बने रहेंगे। जानकारी हो कि 19 अप्रैल को मंत्रीमंडल नियुक्ति समिति सचिवालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। कुमार अब वर्तमान प्रभारी चेयरमैन गोपाल सिंह से इस पद का प्रभार लेंगे।

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बड़ा सवाल : अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो…

Rakesh Kumar | 20 April, 2018 11:48 PM

बड़ा सवाल : अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो…

रांची। हाल के दिनों में कुछ लोगों के जुबां से इस बात का जिक्र किया जा रहा है कि— अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो…. ।

इस मुद्दे पर अगर गहराई से बात की जाए तो कई सवाल खड़े हो गए हैं।

झारखंड में इस संदर्भ में जब हम चर्चा करते हैं तो इसपर बहस तेज हो जाती है। सवाल यह खड़ा होता है कि यहां युवतियां कितनी सुरक्षित हैं। हाल के दिनों झारखंड में जिस तरह से लड़कियों के साथ रेप और उसके बाद हत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे समाज में असुरक्षा की भावना तेजी से पनपने लगी है। इसके साथ साथ मामलों के उद्भेदन और निष्पादन करने में कमी दिखाई पड़ी है, उससे पुलिसिया कार्रवाई पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। युवतियों की हत्या के कई मामले ऐसे हैं, जिसमें पुलिस का निशाना उसके नजदीकी लोगों पर ही है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या युवतियां अपनों के बीच सुरक्षित हैं या नहीं ।

राजधानी की कुछ घटनाएं इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि लड़कियां खुद को सुरक्षित नहीं मान रही हैं। हाल के दिनों में अरगोड़ा के पास की रहनेवाली अफसाना परवीन की हत्या ने समाज के लोगों को हिला कर रख दिया है। हत्या के पीछे के कारणों को खंगालने में पुलिसिया तंत्र लगी हुई है लेकिन इस हत्या ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर अफसाना की हत्या उसके किसी अपने के ही हाथों तो नहीं की गई है। यह एक बड़ा सवाल है कि लड़कियां अपने नजदीकी लोगों पर कैसे भरोसा करे।

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अफसाना का मामला पहला मामला नहीं है जिसकी गुत्थी सुलक्ष नहीं पाई है। बूटी मोड के एक इंजीनियंरिग कालेज की छात्रा जया की हत्या भी जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। मामले की जांच अब सीबीआई के द्वारा की जा रही है, लेकिन एक साल के अधिक का समय बीतने के बाद भी इस हत्या के कारणों के साथ साथ हत्यारों का गिरफ्त में नहीं आना एक बड़ा सवाल है।

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अगर हम आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले राज्य एक साल में 1300 से अधिक रेप के के मामले पुलिस में दर्ज कराए गए। इस तरह से हर दिन एक बलात्कार की घटना जरुर हो रही है। इससे साफ है कि समाज में बड़ी विकृति आ रही है, जो लड़कियों को असुरक्षित कर रही हैं।

जानकार इस बात की जद्दोजेहद में लगे हुए हैं कि इस तरह की विकृति के क्या कारण हो सकते हैं। लेकिन समाज के सामने एक बड़ा सवाल है कि आखिर हम कैसे समाज का निर्माण करें, जिससे बेटियां सुरक्षित रह सके।

पिछले एक साल में रेप के मामलों के आंकड़े

मार्च 17         99

अप्रैल 17        120

मई 17         141

जून 17         122

जुलाई 17        138

अगस्त 17      103

सितंबर 17       112

अक्टूबर 17       106

नवंबर 17            62

दिसंबर 17       116

जनवरी 17       90

फरवरी 17        108

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