बोकारो : पहले अपने गिरेबां में झांके बड़बोले नेतागण- अमर बाउरी

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चंदनकियारी (बोकारो)। कुछ लोगो का काम हैं जनता को दिकभ्रमित करना। जनता को दिकभ्रमित कर अपनी राजनीतिक सेकना इनकी मुख्य पेशा हैं। इसलिए ऐसी बड़बोले नेता पहले अपना गिरेवां में झांककर देखे। उक्त बातें चंदनकियारी के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भैरवनाथ मंदिर पोलकिरी भोजूडीह में झारखण्ड सरकार के मंत्री अमर बाउरी बोल रहे थे। मंत्री भैरव महोत्सव तैयारी का जायजा लेने गए थे।

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उन्होंने आजसू पार्टी के आडे हाथ लेते हुए कहा कि जिन लोगो के द्वारा यह अफवाह फैलाये जा रहा है कि चंदनकियारी में नाच गान कर सरकारी पैसो का दुरूपयोग किया जा रहा हैं। कभी ऐसे लोगो के हाथ में भी यह विभाग थी तब केवल अपने विधानसभा क्षेत्र सिल्ली में ही पर्यटन व कला संस्कृति का मद् खर्च किया जाता था। आज हमारी सरकार झारखण्ड के सभी जगहों में महोत्सव कर झारखण्ड के पर्यटन स्थान को विश्व पटल पर रखने का काम किया हैं।

जिस जगह का नाम लोग वर्षो तक नहीं जानते उन जगहों का नाम विश्व के मानचित्र पर आने लगा है। इस बार भव्य रूप से भैरव महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव के अवसर पर एक बडा शिव भगवान की एक मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि हमें राजनीतिक करने के लिए नहीं बल्कि जनता के सेवा के लिए जनता ने चुना हैं। उसके बाद पोलकोरि गांव में आयोजित क्रिकेट टूर्नामेंट के फ़ाइनल खेल का उद्घाटन भी किया गया।

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इस हरकत की वजह से सोशल मीडिया पर हुई एयरटेल की फजीहत

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नई दिल्ली। देश की मशहूर टेलीकॉम कंपनी एयरटेल एक नये विवाद में फँस गयी है। इस विवाद के कारण कंपनी सोशल मीडिया पर फजीहत झेल रही है। दरअसल, ट्विटर पर पूजा सिंह नाम के एक यूजर ने एयरटेल को टैग करते हुए कंपनी की सेवाओं से जुड़ी एक शिकायत ट्वीट की। जवाब में कंपनी की ओर से शोएब नाम के एक कर्मचारी ने यूजर की शिकायत को दूर करने का आश्वासन दिया। लेकिन मामला यहाँ खत्म नहीं हुआ।

इसके बाद शिकायतकर्ता पूजा ने एयरटेल कर्मचारी को जवाब देते हुए कहा कि, ” प्रिय शोएब, चूँकि तुम मुस्लिम हो, इसलिए मुझे तुम्हारी कार्य पद्धति पर भरोसा नहीं है। हो सकता है कि कुरान में अलग तरह की ग्राहक सेवा करना सिखाया गया हो, इसलिए किसी हिंदू ग्राहक सेवा अधिकारी से मेरी समस्या का समाधान कराओ।”

एयरटेल से यहीं बड़ी चूक हो गयी। कंपनी ने अपने मुस्लिम कर्मचारी और उसके अधिकारों का बचाव करने की बजाय उसके बदले गगनजीत नामक दूसरे ग्राहक सेवा अधिकारी को शिकायत सुलझाने के लिए आगे कर दिया।

ट्विटर पर कंपनी की इस शुतुरमुर्गी रवैये की कड़ी आलोचना शुरू हो गयी। कई लोगों ने एयरटेल को अपने कर्मचारी के पक्ष में खड़ा न होने के लिए दुत्कार और फटकार लगाई। कुछ लोगों ने यहाँ तक कह डाला कि वह एयरटेल की इस हरकत से नाराज हैं और अपना नंबर पोर्ट करने जा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करते हुए लिखा, “एयरटेल की इस हरकत को उन्होंने अपनी टाइमलाइन पर देखा है। मैं ऐसी कंपनी को एक भी पैसा देने से परहेज करूँगा जो धार्मिक आधार पर भेदभाव को रोकने की बजाय इसे बढ़ावा देती हो। मैं अपना नंबर दूसरी कंपनी में पोर्ट करवाने जा रहा हूँ। साथ ही डीटीएच और ब्रॉड बैंड कनेक्शन भी कटवा रहा हूँ।”

इसके बाद कई यूजर्स ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी और एयरटेल की निंदा और मलामत की।

सोशल मीडिया पर किरकिरी होने के बाद एयरटेल ने सफाई देते हुए कहा कि, “कंपनी कर्मचारियों, ग्राहकों और साझेदारों के साथ जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती है। मैं आपसे (शिकायतकर्ता से) भी अनुरोध करता हूँ कि आप भी ऐसा न करें। शोएब और गगनजीत दोनों ही हमारी टीम का हिस्सा हैं और उपलब्धता के आधार पर लोगों की शिकायतों का निपटारा करते हैं। आपकी समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा।”

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कोडरमा : नाबालिग ने लगाया यौन शोषण का आरोप, मामला दर्ज

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कोडरमा। तिलैया थाना क्षेत्र के झलपो ईदगाह मुहल्ला निवासी एक नाबालिग लड़की ने अपने परिचित पर बेहतर शिक्षा दिलाने के नाम पर मुंबई ले जाने व यौन शोषण, प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। आवेदन में पीड़िता ने कहा कि झलपो निवासी मो. अमजद व साबरा खातून ने उनके परिजनों को विश्वास में लेकर उसे उच्च शिक्षा दिलाने के बहाने अपने साथ मुंबई ले गये।

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वहां दोनों आरोपियों ने उसको प्रताड़ित करते हुए दिन रात काम कराया। साथ ही आरोपी अमजद ने कई बार उसका शारीरिक शोषण भी किया। जिससे पीड़िता गर्भवती हो गई। इसके बाद आरोपियों ने उसे उसके माता-पिता के पास लाकर छोड़ दिया।

जिसके बाद पीड़िता ने पूरी घटना की जानकारी परिजनों को दी। इसके बाद स्थानीय समाज ने आरोपियों को मामले का दोषी पाते हुए तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जिसके बाद आरोपी ने 2 माह का समय मांगते हुए रुपये पीड़िता को देने की बात कही लेकिन बाद में आरोपी अपने वादे से मुकर गया और भाग गया। आवेदन के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

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रांची। अडानी पावर को फायदा पहुंचाने के लिये सरकार ने बदले नियम- डॉ अजय

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सरकार ने कहा था जन कल्याण के लिये है अडानी पावर प्लांट

रांची। झारखंड के कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने रघुवर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने गोड्डा में अडानी पावर प्लांट लगाने की अनुमति जन कल्याण की बातें कह कर दी, लेकिन  अफसोस इसकी बिजली गोड्डा या झारखंड के लिए नहीं होगी बल्कि सीमा पार बांग्लादेश भेजा जाएगा और इसीलिये सरकार ने नियम तक बदल दिये। कोयले से चलने वाली, अडानी पावर लिमिटेड 1600 मेगावॉट की क्षमता वाली एक ऊर्जा संयंत्र बैठा रही है जिसका सीधा फायदा कंपनी को पहुंचेगा।

सरकारी नीति के अनुसार राज्य को मिली चाहिये 25 फीसदी बिजली

सरकारी नीति के अनुसार झारखंड में लगने वाले और कोयले से चलने वाले किसी भी ऊर्जा संयंत्र की 25 फीसदी बिजली राज्य सरकार को मिलती है, जो इसे एक तय दर पर खरीदती है। ‘अडानी पावर लिमिटेड’ कहती है कि वो इस शर्त को पूरा करेगी, लेकिन किसी दूसरे स्रोतों के जरिये। विडंबना है कि इस स्रोत के बारे में कंपनी ने कुछ नहीं बताया।

झारखंड को मिलने वाली ऐसी बिजली सस्ती नहीं

ये सत्य है कि झारखंड को मिलने वाली ऐसी बिजली सस्ती नहीं होगी। 2016 में झारखंड ने अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव किया था। इससे अडानी पवर लिमिटेड को झारखंड में चल रहे दूसरे ऊर्जा संयंत्रों के मुकाबले सरकार को ज्यादा कीमत पर बिजली बेचने की इजाजत मिल गई।

क्या कहती थी पहले की नीति ?

पहले की नीति पर अगर गौर करें तो, 2012 में बनी राज्य की ऊर्जा नीति के तहत राज्य सरकार उनसे जो 25 फीसदी बिजली खरीदती थी उसमें से 12 फीसदी की कीमत परिवर्तनीय यानी सिर्फ उसे बनाने में लगे ईंधन यानी कोयले की कीमत के बराबर होती थी। बाकी 13 फीसदी बिजली की कीमत के दो घटक होते थे- परिवर्तनीय और स्थिर। यानी इसमें ईंधन की लागत के साथ-साथ परियोजना को बनाने और चलाने में लगा खर्च भी जोड़ा जाता था। यह दर वास्तव में कितनी होगी, इसका निर्धारण राज्य विद्युत नियामक आयोग करता था।

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…2016 में जब सरकार ने पहले चरण का समझौता किया था

अडानी पावर लिमिटेड के साथ झारखंड सरकार ने 2016 में जो पहले चरण का समझौता किया था उसकी शर्तें पुरानी ऊर्जा नीति के मुताबिक ही थीं। इसमें कहा गया था कि झारखंड मौजूदा प्रावधानों के हिसाब से कंपनी से 25 फीसदी बिजली खरीदेगा। लेकिन समझौते के दूसरे चरण में कंपनी ने शर्तों में बदलाव की मांग की। कंपनी चाहती थी कि 12 फीसदी बिजली वैरियेबल कॉस्ट पर पाने के लिए सरकार उसे सस्ती कीमत पर कोयला उपलब्ध कराए नहीं तो वह पूरी 25 फीसदी बिजली पूरी कीमत (वैरियेबल+फिक्सड) पर खरीदे। दूसरे शब्दों में कहें तो पूरी 25 फीसदी बिजली उस दर पर खरीदे जिस पर पहले वह 13 फीसदी बिजली खरीदती थी।

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और…सरकार तथा अडानी पावर ने 21 अक्टूबर को साईन कर दिये

वर्ष 2016 में झारखंड सरकार के साथ अपने पत्राचार में अडानी पावर लिमिटेड ने इसी बदलाव का हवाला देते हुए गोड्डा परियोजना की शर्तों में बदलाव की मांग की। छह अक्टूबर 2016 को झारखंड बीजेपी की सरकार ने राज्य की ऊर्जा नीति में वही बदलाव कर दिए जिनका प्रस्ताव कंपनी ने दिया था। इन बदलावों को आधार बनाकर अगले ही दिन दूसरे चरण के समझौते का प्रारूप तैयार कर लिया गया। इस समझौते पर सरकार और अडानी पावर ने 21 अक्टूबर को साईन कर दिये।

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