बिरसा मुंडा शहादत दिवस विशेष : रांची जेल में रहस्यमयी तरीके से बिरसा की हुई थी मौत

Om Prakash | 9 June, 2018 12:08 PM
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भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में बिरसा एक मुख्य कड़ी

रांची। मुंडा जाति से संबंध रखने वाले बिरसा मुंडा एक आदिवासी नेता और लोकनायक थे। वर्तमान भारत में रांची और सिंहभूम के आदिवासी बिरसा मुंडा को अब ‘बिरसा भगवान‘ कहकर याद करते हैं। मुंडा आदिवासियों को अंग्रेज़ों के दमन के विरुद्ध खड़ा करके बिरसा मुंडा ने यह सम्मान पाया था। 19वीं सदी में भगवान बिरसा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक मुख्य कड़ी साबित हुए थे।

बिरसा मुंडा शहादत दिवस विशेष : रांची जेल में रहस्यमयी तरीके से बिरसा की हुई थी मौत

मुंडा रीति के अनुसार उनका नाम बृहस्पतिवार के हिसाब से बिरसा हुआ

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को रांची जिले के उलिहतु गाँव में हुआ था। मुंडा रीति रिवाज के अनुसार उनका नाम बृहस्पतिवार के हिसाब से बिरसा रखा गया था। बिरसा के पिता का नाम सुगना मुंडा और माता का नाम करमी हटू था। उनका परिवार रोजगार की तलाश में उनके जन्म के बाद उलिहतु से कुरुमब्दा आकर बस गया जहां वे खेतो में काम करके अपना जीवन चलाते थे। उसके बाद फिर काम की तलाश में उनका परिवार बम्बा चला गया।

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कुछ दिनों में बांसुरी के उस्ताद हो गये

बिरसा बचपन से अपने दोस्तों के साथ रेत में खेलते रहते थे और थोड़ा बड़ा होने पर उन्हें जंगल में भेंड़ चराने जाना पड़ता था। जंगल में भेंड़ चराते वक़्त समय व्यतीत करने के लिए बांसुरी बजाया करते थे और कुछ दिनों में बांसुरी के उस्ताद हो गये थे। उन्होंने कद्दू से एक एक तार वाला वादक यंत्र तुइला बनाया था जिसे भी वो बजाया करते थे। उनके जीवन के कुछ रोमांचक पल अखारा गांव में बीते थे।

धर्म परिवर्तन कर अपना नाम बिरसा डेविड रख दिया

गरीबी के इस दौर में बिरसा को उनके मामा के गांव अयुभातु भेज दिया गया। अयुभातु में बिरसा दो साल तक रहे और वहां के स्कूल में पढने गये थे। बिरसा पढ़ने में तेज थे इसलिए स्कूल चलाने वाले जयपाल नाग ने उन्हें जर्मन मिशन स्कूल में दाखिला लेने को कहा। उस समय जब क्रिस्चियन स्कूल में प्रवेश लेने के लिए इसाई धर्म अपनाना उनके लिये जरुरी हुआ तो बिरसा ने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम बिरसा डेविड रख दिया, जो बाद में बिरसा दाउद हो गया था।

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लोग बिरसा को भगवान का अवतार मानने लगे

बाद में बिरसा के जीवन में एक नया मोड़ आया। उनका स्वामी आनन्द पाण्डेय से सम्पर्क हो गया और उन्हें हिन्दू धर्म तथा महाभारत के पात्रों का परिचय मिला। यह कहा जाता है कि 1895 में कुछ ऐसी आलौकिक घटनाएं घटीं, जिनके कारण लोग बिरसा को भगवान का अवतार मानने लगे। लोगों में यह विश्वास दृढ़ हो गया कि बिरसा के स्पर्श मात्र से ही रोग दूर हो जाते हैं।

जो मुंडा ईसाई बने थे फिर से पुराने धर्म को अपनाया

जन-सामान्य का बिरसा में काफ़ी दृढ़ विश्वास हो चुका था, इससे बिरसा को अपने प्रभाव में वृद्धि करने में मदद मिली। लोग उनकी बातें सुनने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र होने लगे। बिरसा ने पुराने अंधविश्वासों का खंडन किया। लोगों को हिंसा और मादक पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी। उनकी बातों का प्रभाव यह पड़ा कि ईसाई धर्म स्वीकार करने वालों की संख्या तेजी से घटने लगी और जो मुंडा ईसाई बन गये थे, वे फिर से अपने पुराने धर्म में लौटने लगे।

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बिरसा को लोग धरती आबा के नाम से पुकारकर पूजते थे

1 अक्टूबर 1894 को नौजवान नेता के रूप में सभी मुंडाओं को एकत्र कर इन्होंने अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। 1895 में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। लेकिन बिरसा और उसके शिष्यों ने क्षेत्र की अकाल पीड़ित जनता की सहायता करने की ठान ली थी और अपने जीवन काल में ही एक महापुरुष का दर्जा पाया। उन्हें उस इलाके के लोग ‘धरती आबा’ के नाम से पुकारकर पूजते थे। उनके प्रभाव की वृद्धि के बाद पूरे इलाके के मुंडाओं में संगठित होने की चेतना जागी।

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अंग्रजों के खिलाफ लड़ने में कई आदिवासी नेता गिरफ्तार हुये

1897 से 1900 के बीच मुंडाओं और अंग्रेज सिपाहियों के बीच युद्ध होते रहे और बिरसा और उसके चाहने वाले लोगों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। अगस्त 1897 में बिरसा और उसके चार सौ सिपाहियों ने तीर कमानों से लैस होकर खूंटी (अब झारखंड) थाने पर धावा बोला। 1898 में तांगा नदी के किनारे मुंडाओं की भिड़ंत अंग्रेज सेनाओं से हुई जिसमें पहले तो अंग्रेजी सेना हार गयी लेकिन बाद में इसके बदले उस इलाके के बहुत से आदिवासी नेताओं की गिरफ़्तारियां हुईं।

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अंग्रेज सरकार ने मौत का कारण हैजा बताया था

जनवरी 1900 डोमबाड़ी पहाड़ी पर एक और संघर्ष हुआ था जिसमें बहुत से औरतें और बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। बाद में बिरसा के कुछ शिष्यों की गिरफ़्तारियां भी हुई। अन्त में स्वयं बिरसा भी 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर में गिरफ़्तार कर लिये गये।

9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी रहस्यमयी तरीके से मौत हो गयी और अंग्रेज सरकार ने मौत का कारण हैजा बताया था जबकि उनमे हैजा के कोई लक्षण नहीं थे। केवल 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने ऐसा काम कर दिया कि आज भी बिहार, उड़ीसा (अब ओडिशा), झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में बिरसा मुण्डा को भगवान की तरह पूजा जाता है।

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रांची : मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने किया कंफर्ट लाइफ सर्विसेज का शुभारंभ

NewsCode Jharkhand | 2 December, 2018 7:38 PM
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रांची। राज्य के जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने आज मोरहाबादी स्थित पार्क प्लाजा के दूसरे तल्ले में कंफर्ट लाइफ सर्विसेज का फीता काटकर शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने आशा जतायी कि यह सर्विसेज आम जनों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

कंफर्ट लाइव सर्विसेज में फ्लैट खरीद- बिक्री, स्वास्थ्य बीमा, अवधि बीमा, म्युचुअल फंड, एसआईपी एवं वाहनों की बीमा आदि की सुविधा लोगों को प्राप्त हो सकेगी।

शुभारंभ के मौके पर आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो, चंद्रशेखर महतो, संचालक राजेश कुमार, रंजना चौधरी, गीता महतो, कल्पना मुखिया, संतोष  मुखिया, अमित साव एवं अजय श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

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भोगनाडीह : झामुमो ने संथाल को भ्रष्टाचार और बिचौलिया दिया- मुख्यमंत्री

NewsCode Jharkhand | 2 December, 2018 7:36 PM
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भोगनाडीह  में भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए

भोगनाडीह। राज्य को संथाल परगना ने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा से तीन तीन मुख्यमंत्री दिये,  लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री बनाया वो गरीब आदिवासी, वंचित दलित की अनदेखी कर अर्थपेटी और मतपेटी भरने का कार्य किया।

साथ ही संथाल परगना को भ्रष्टाचार और बिचौलिया दिया। सबसे ज्यादा आदिवासियों की जमीन लूटने का काम सोरेन परिवार ने किया है। आज सीएनटी-एस पीटी एक्ट के उल्लंघन कर विभिन्न शहरों में आदिवासियों की जमीन ले ली।

जबकि संथाल परगना समेत राज्य भर में यह कह कर गुमराह किया गया कि अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार आएगी तो आदिवासी की जमीन लूट लेगी। क्या 4 साल सरकार द्वारा किसी आदिवासी की जमीन लूटी गई नहीं। उपरोक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कही।

बरहेट का प्रतिनिधित्व करने वाला कभी विधानसभा में सवाल नहीं उठाया

मुख्यमंत्री ने कहा कि बरहेट का विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले ने कभी भी विधानसभा में क्षेत्र की समस्याओं को लेकर प्रश्न नहीं रखा, क्योंकि उसे पता ही नहीं है कि क्षेत्र की समस्या क्या है ऐसे में विकास के कार्य कैसे सम्पन्न होंगे।

लोगों को यह सोचना चाहिए और स्थानीय उम्मीदवार को प्राथमिकता देनी चाहिए। चाहे वोकिसी पार्टी का हो।

कार्यकर्ता पार्टी का प्राण, पार्टी के लिए राष्ट्र पहले

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता पार्टी के प्राण हैं। यह एक ऐसी पार्टी है जहां वंशवाद और परिवार नहीं। एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री और मजदूर मुख्यमंत्री बन सकता है। मैं भी बूथ स्तर का कार्यकर्ता था।

पार्टी के लिए समर्पण भाव से कार्य करते हुए 1995 में विधायक बना और अब मुख्यमंत्री हूं। आप भी ईमानदारी से कार्य करें। सरकार की योजनाओं को जन जन पहुंचाये। पार्टी के वविभिन्न मोर्चा के लोग इस कार्य में लगे। क्योंकि पार्टी के लिए राष्ट्र पहले है।

इस राष्ट्र को और मजबूत करने के लिए वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बना चुके प्रधानमंत्री  के हाथों को मजबूत करें। इस अवसर पर अनंत ओझा,  धर्मपाल सिंह, हेमलाल मुर्मू समेत अन्य मौजूद थे।

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रांची : अखिल झारखंड छात्र संघ ने चुनाव को लेकर चलाया जनसंपर्क अभियान

NewsCode Jharkhand | 2 December, 2018 7:24 PM
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रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ ने राजधानी स्थित विभिन्न हॉस्टलों एवं लॉजों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया। इस जनसंपर्क अभियान के दौरान आजसू को मिल रहे शुरुआती रुझान से यह साफ तौर पर प्रतीत होता है कि इस बार रांची विश्वविद्यालय के तमाम सभी कॉलेजों में आजसू का पलड़ा भारी रहेगा।

यह सघन जनसंपर्क अभियान सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर शाम 5:00 बजे तक लगातार चला। “वोटर के द्वार” कार्यक्रम के तहत आजसू कि विभिन्न टोलियां विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित करीब करीब 40 हॉस्टलों का दौरा किया।

इस कार्यक्रम की शुरुआत पी. जी. डिपार्टमेंट के चुनाव प्रभारी सौरभ शर्मा के नेतृत्व में मोरहाबादी स्थित पीजी हॉस्टल से की गई। मोरहाबादी क्षेत्र में हॉस्टल भ्रमण के दौरान हरप्रीत सिंह विजय महतो गुलशन तिवारी धीरज कुमार ने अहम योगदान दिया।

एसएस मेमोरियल कॉलेज के प्रत्याशियों के लिए जनसंपर्क अभियान का नेतृत्व अजीत कुमार एकरामुल अंसारी हुसैन अंसारी कर रहे थे। इस दौरान कांके जवाहर नगर चांदनी चौक क्षेत्र का द्वारा किया गया।

आर ए एस वाई कॉलेज के प्रत्याशियों के लिए छात्रों से वोट की अपील करने के अभियान का नेतृत्व चेतन प्रकाश बंटी राय सूरज झा कर रहे थे। इस दौरान कोकर लालपुर कांटा टोली स्थित विभिन्न हॉस्टलों का दौरा किया गया।

महिला कॉलेज के प्रत्याशियों के लिए वोट  की अपील करने के अभियान के तहत गदाधर महतो एवं नीरज वर्मा के नेतृत्व में लालपुर बर्द्धमान कंपाउंड स्थित विभिन्न महिला छात्रावासों में जाकर अधिक से अधिक वोट करने की अपील की गई।

डोरंडा कॉलेज के प्रत्याशियों के पक्ष में वोट मांगते हुए ज्योत्स्ना केरकेट्टा एवं अरविंद कुमार के नेतृत्व डोरंडा, हिनू, शुक्ला कॉलोनी आदि क्षेत्रों के विभिन्न हॉस्टलों में अभियान चलाया गया।

इधर हिंदपीढ़ी स्थित  मारवाड़ी कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने नीतीश सिंह रमेश कपड़िया राहुल तिवारी के संयुक्त नेतृत्व में पूरे जोशो खरोश के साथ हिंदपीरी अपर बाजार मेन रोड किशोरगंज आदि क्षेत्रों का दौरा किया।

वहीं मांडर कॉलेज के प्रत्याशियों ने दीपक साहू, नवीन सिंह, सोहेल अंसारी ,सुक्का उरांव , सौरभ पाठक के नेतृत्व में मांडर आसपास के विभिन्न गांवों का दौरा किया एवं आजसू के प्रत्याशियों के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की। इनके प्रचार करने का तरीका बेहद अद्भुत एवं भव्य था जिसे देखते बन रहा था।

इस अभियान के दौरान आजसू  के प्रदेश प्रभारी हरीश कुमार ने  कहा कि हमारा लक्ष्य जीत और हार से कहीं ऊपर यह है की इस छात्र संघ चुनाव में छात्र संघ की महत्ता को बढ़ाने हेतु ज्यादा से ज्यादा वोटरों को बूथ तक लाकर वोटिंग कराना है ताकि वोट प्रतिशत औसतन बढ़िया रहे और ज्यादा से ज्यादा वोटर जागरूक हो सके।

आज के इस अभियान को सफल बनाने में मुख्य रूप से आजसू के  प्रदेश प्रभारी हरीश कुमार प्रदेश अध्यक्ष गौतम सिंह प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष लाल मनीष नाथ शाहदेव प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष जब्बार अंसारी प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज वर्मा प्रदेश कोषाध्यक्ष गदाधर महतो प्रदेश सचिव ओम वर्मा प्रदेश सचिव ज्योत्स्ना केरकेट्टा प्रदेश सचिव चेतन प्रकाश प्रदेश सचिव अजीत कुमार विश्व विद्यालय प्रभारी उस साहू विश्वविद्यालय अध्यक्ष नीतीश सिंह विश्वविद्यालय महासचिव राजकिशोर महतो आदि का सराहनीय योगदान रहा।

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