बिहार पुलिस दारोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित, यहां चेक करें

NewsCode | 5 May, 2018 11:49 AM
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पटना। बिहार पुलिस के एसआई की पीटी परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिये गये हैं। पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) के 1717 पदों के लिये ली गई परीक्षा के पहले चरण में आयोग ने 29,359 पुरुष एवं महिला अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया गया है। बहाली के लिए इसी साल मार्च और अप्रैल महीने में प्रारंभिक परीक्षा ली गई थी जिसका परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया है। पीटी परीक्षा में उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थी अब मुख्य परीक्षा में शामिल होंगे। बता दें कि दरोगा बहाली में सरकार ने महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत पद पहले से आरक्षित कर रखा है।

आयोग द्वारा घोषित प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में सामान्य वर्ग से 12,240 अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया गया है। जिसमें 5600 महिलाएं हैं। जबकि अनुसूचित जाति वर्ग से 4100 पुरुष व महिलाएं उत्तीर्ण हुई हैं। जिसमें केवल महिलाओं की संख्या 1900 है।

इसी तरह अनुसूचित जनजाति वर्ग में 120 महिला व पुरुष, पिछड़ा वर्ग से 2280 पुरुष व महिलाएं तथा अत्यंत पिछड़ा वर्ग से 3860 पुरुष व महिलाओं को उत्तीर्ण घोषित किया गया है। उल्लेखनीय है कि इस बार पहली दफा दरोगा बहाली में एक प्रतिशत पद राज्य के श्रेष्ठ खिलाडिय़ों के लिए आरक्षित रखा गया है। जिसके लिए लिखित परीक्षा में शामिल होने की अनिवार्यता नहीं है।

बता दें कि राज्य में होने वाली दरोगा बहाली के लिए लिखित परीक्षा में राज्य भर से कुल चार लाख, 28 हजार, 200 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। जिसमें तीन लाख, 59 हजार, 932 अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में भाग लिया था। इनमें 10,044 अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

यहां चेक करें अपना रिजल्ट

अभ्यर्थी अपना रिजल्ट www.bpssc.bih.nic.in पर क्लिक कर के देख सकते हैं। जानकारी के मुताबिक आयोग जल्द ही मेंस की परीक्षा ले सकता है और इसके लिये कुछ ही दिनों में तारीखों का ऐलान होगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, संवैधानिक रूप से आधार वैध है

NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 12:33 PM
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लेकिन बैंक और मोबाइल से लिंक करना जरूरी नहीं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला लिया। केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है, लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार को बैंकों और मोबाइल से लिंक करना जरूरी नहीं है। स्कूलों में दाखिले के लिए भी आधार जरूरी नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनोखा होना बेहतर है। न्यायमूर्ति ए के सीकरी ने प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और अपनी ओर से फैसला सुनाते हुये कहा कि आधार के खिलाफ याचिकाकर्ताओं के आरोप संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर आधारित है, जिनके कारण राष्ट्र शासकीय निगरानी वाले राज्य में बदल जायेगा।

न्यायालय ने कहा कि आधार के लिए यूआईडीएआई ने न्यूनतम जनांकीकीय और बायोमेट्रिक आंकड़े एकत्र किये है। पीठ ने कहा कि आधार समाज के वंचित तबके को सशक्त बनाता है और उन्हें पहचान देता है। न्यायमूर्ति सीकरी ने फैसले में कहा, डुप्लीकेट आधार कार्ड प्राप्त करने की कोई संभावना नहीं है।

उन्होंने कहा कि फैसले में मानव सम्मान के विचार को विस्तार दिया गया है। न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा कि आधार योजना के सत्यापन के लिए पर्याप्त रक्षा प्रणाली है। जितनी जल्दी संभव हो आंकड़ों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र बनाया जाये। पीठ ने निजी कंपनियों को आधार के आंकड़े एकत्र करने की अनुमति देने वाले आधार कानून के प्रावधान 57 को रद्द कर दिया है।

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जमशेदपुर : छुुुुट्टी मांगी, न‍हीं मिली, गर्भावस्‍था के पांंचवें माह में ड्यूूटी करने को मजबूर सुरक्षाकर्मी

NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 3:58 PM
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एमजीएम अस्पताल की संवेदनहीनता

जमशेदपुर। जमशेदपुर का एमजीएम अस्पताल इन दिनों फिर से सुर्खियों में है। वैसे इस बार यह अस्पताल अलग ही तरह के कारनामों को लेकर सुर्खियों में है।

इस अस्पताल की लापरवाही की खबरें तो आम बात है, लेकिन इस बार इस अस्पताल में काम कर रही महिला सुरक्षाकर्मियों की क्या स्थिति है, यह बता रहे हैं।

किस तरह 8 महीने की गर्भवती महिला सुरक्षाकर्मी ड्यूटी करने को मजबूर है। ऐसा नहीं है कि उस महिला कर्मी ने छुट्टी के लिए गुहार नहीं लगाई थी।

इस महिला ने प्रेगनेंसी लीव का आवेदन दिया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन या होमगार्ड  के वरीय अधिकारी इस महिला के आवेदन को निरस्त करते हुए इतना ही कहा कि जब तुम्हें परेशानी होगी तो तुम्हें छुट्टी दे दी जाएगी।

ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही महिला ड्यूूटी करने को मजबूर

अब सवाल यह उठता है कि आखिर 8 महीने की गर्भवती महिला को क्या परेशानी नहीं हो रही होगी ?  क्या एमजीएम अस्पताल प्रबंधन और झारखंड सरकार का गृह रक्षा वाहिनी विभाग इतना संवेदनहीन हो गया है कि जो महिला अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही, उसे अस्पताल की सुरक्षा में लगा दिया गया।

वैसे यह कोई पहली महिला नहीं है, जो गर्भवती होने के बाद भी ड्यूटी बजा रही है, बल्कि इनकी जैसी और भी एक महिला सुरक्षाकर्मी यहां ड्यूटी पर तैनात है।

पांचवें माह से ही प्रेगनेंसी लीव दिए जाने का है प्रावधान

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकारी योजना जिसके तहत महिलाओं को पांचवें माह से ही प्रेगनेंसी लीव दिए जाने का प्रावधान है, उसका उल्‍लंघन हो रहा है। यदि महिला होमगार्ड की जवान के साथ कुछ अनहोनी हो जाए तो उसके लिए कौन जिम्मेवार होगा।

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NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 3:19 PM
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लोहरदगा। शहर के बड़ा तालाब, जामा मस्जिद आदि क्षेत्रों में नगर परिषद की ओर से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। अभियान में लोहरदगा सदर अंचलाधिकारी परमेश्वर कुशवाहा, सदर थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक शैलेश प्रसाद, नगर परिषद के सिटी मैनेजर आफताब आलम सहित कई अधिकारी और पुलिस बल के जवान मौजूद थे। अतिक्रमण अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। अतिक्रमण का दोषी पाए जाने पर, ऑन द स्‍पॉट कई दुकानदारों पर जुर्माना भी लगाया गया। नगर परिषद के इस अभियान से दुकानदारों में भी डर का माहौल देखा जा रहा है।

लोहरदगा : अतिक्रमण हटाओ अभियान से दुकानदारों में हड़कंप

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अतिक्रमण को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए जाने के बाद से नगर परिषद अतिक्रमण हटाने को लेकर अभियान चला रहा है। इस दौरान क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आने पर, अतिक्रमण हटाने को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले नगर परिषद ने कई बार दुकानदारों को चेतावनी देते हुए अतिक्रमण नहीं करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके अतिक्रमण होने की वजह से सड़कें संकरी हो गई थी और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही थी। जिसकी वजह से नगर परिषद और अंचल प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने को लेकर जोरदार अभियान चलाया।

लोहरदगा : टेबल-कुर्सी ही संभालते हैं कार्यालय, मत्स्य अधिकारी रहते हैं गायब 

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