भय्यूजी महाराज ने गोली मारकर की खुदकुशी, मॉडलिंग छोड़कर बने थे आध्यात्मिक गुरु

NewsCode | 12 June, 2018 3:45 PM

भय्यूजी महाराज को राजनीतिक रूप से ताकतवर संतों में गिना जाता था।

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इंदौर। प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक कार्यकर्ता भय्यूजी महाराज ने मंगलवार को कथित तौर पर खुद को गोली मार ली। उन्हें घायल अवस्था में इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई है। खुदकुशी के कारण का पता अभी तक नहीं चल सका है। बता दें कि भय्यूजी ने पहली पत्नी की मौत के बाद पिछले साल ही दूसरी शादी की थी।

इंदौर पुलिस के इंस्पेक्टर जयंत राठौड़ ने मीडिया को बताया कि भय्यूजी ने खुद को सिर में गोली मारी। अभी पता नहीं चल सका है कि भय्यूजी ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। अस्पताल में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।


ज्ञात हो कि भय्यूजी राजनीति में भी गहरी पैठ रखते थे। हाल ही में शिवराज सरकार ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया था । हालांकि उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने कहा था कि संतों के लिए पद का महत्व नहीं होता। उन्होंने कहा था कि हमारे लिए लोगों की सेवा का महत्व है।

भय्यूजी महाराज को राजनीतिक रूप से ताकतवर संतों में गिना जाता था। उनका असली नाम उदयसिंह देशमुख था और उनके पिता महाराष्ट्र में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं। उनका नाम तब चर्चा में आया था, जब भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे अन्ना हजारे को मनाने के लिए यूपीए सरकार ने उनसे संपर्क किया था।

मॉडल से संत बने भय्यूजी महाराज

जवानी के दिनों में सियाराम शूटिंग-शर्टिंग के लिए पोस्टर मॉडलिंग करने वाले संत भय्यूजी तलवारबाजी, घुड़सवारी और खेती का काम भी करते थे। उनके बारे में एक और दिलचस्प बात यह है कि वह फेस रीडर भी थे।

पिछले साल रचाई थी दूसरी शादी

भय्यूजी ने पहली पत्नी की मौत के बाद पिछले साल ही दूसरी शादी की थी। पहली पत्नी माधवी से उनकी एक बेटी भी है। पत्नी की मौत के बाद भय्यूजी पर आश्रम की ही किसी महिला के साथ कथित तौर पर संबंध का आरोप भी लगा था। उन्होंने पिछले साल 30 अप्रैल को आयुषी नामक महिला से दूसरी शादी रचा ली थी।

जम्मू-कश्मीर: 3 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद 7 SPO का इस्तीफा, गृह मंत्रालय ने बताया- अफवाह

NewsCode | 21 September, 2018 4:29 PM
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का खौफ इस कदर फैल रहा है कि वह खुलेआम पुलिसवालों को मारने की धमकी दे रहे हैं और धमकी के बाद उन्हें मार भी रहे हैं। अब इसी का डर जम्मू-कश्मीर में पुलिसकर्मियों पर भी दिख रहा है। शुक्रवार सुबह जैसे ही खबर आई कि आतंकियों ने 3 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया है। कुछ देर बाद ही एक अन्य पुलिसकर्मी ने अपनी नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया। पुलिस कॉन्स्टेबल मोहम्मद इरशाद बाबा जो कि शोपियां में कार्यरत थे, उन्होंने अपने इस्तीफे का ऐलान किया। इसके बाद अब तक 7 एसपीओ ने इस्तीफा दे दिया है।

पुलिसकर्मी ने इस वीडियो को उन्होंने इंटरनेट पर डाला है। साफ है कि आतंकी घाटी में बेखौफ घूम रहे हैं और उनके कारण ही पुलिसकर्मियों को इस तरह का कदम उठाना पड़ रहा है। इस पहले इस्तीफे के तुरंत बाद तो मानो लाइन ही लग गई। दक्षिण कश्मीर के शोपियां, कुलगाम, कापरां जिले के SPO ने इस्तीफा सौंप दिया है। ये इस्तीफे 3 पुलिसकर्मियों की हत्या के करीब एक-दो घंटों के भीतर ही आए हैं।

गृह मंत्रालय ने बताया- अफवाह

हालांकि, गृह मंत्रालय की तरफ से इस बात का खंडन किया गया है कि किसी भी एसपीओ ने इस्तीफा नहीं दिया है। जो भी खबरें मी़डिया में आ रही हैं वह गलत हैं। गृहमंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 30,000 SPO हैं, जिनकी ड्यूटी लगातार रिव्यू होती रहती है। मंत्रालय ने कहा कि इसी वर्ष में सिर्फ शोपियां में ही 28 आतंकियों को मार गिराया गया है, यही कारण है कि शोपियां में आतंकी बौखलाए हुए हैं।

आतंकियों ने 3 पुलिसकर्मियों को अगवा कर मार डाला

शुक्रवार को आतंकियों ने 4 स्थानीय पुलिसकर्मियों को उनके घर से अगवा किया और उनमें से तीन की हत्या कर दी। आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी को छोड़ भी दिया। जिन तीन पुलिसकर्मियों की हत्या की गई है उनमें दो SPO और कॉन्स्टेबल शामिल हैं। जबकि फयाज़ अहमद भट्ट को आतंकियों ने छोड़ दिया।

आतंकी रियाज़ नाइकू ने दी थी धमकी

हिजबुल आतंकी रियाज़ नाइकू ने चार दिन पहले ही एक ऑडियो जारी कर स्थानीय पुलिसवालों को धमकाया था। ऑडियो क्लिप में नाइकू ने कहा कि हिंदुस्तान की सरकार एक साजिश के तहत लोगों को एसपीओ बना रही है। कई विभागों में रिक्तियां हैं लेकिन पुलिस बल में ही भर्तियां हो रही हैं। नाइकू ने सभी एसपीओ से कहा कि वे उग्रवादियों की सूचना पुलिस को न दें और फौरन पुलिस की नौकरी छोड़ दें वरना नतीजे काफी बुरे होंगे।


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जहाँ मुजावर से उन्होंने शीरनी फातिहा कराई। जिसके बाद स्व. महतो को ज्योंही फांसी के तख्ते पर लटकाया गया, लगातार तीनों बार फांसी का फंदा खुल गया और अंततः उन्हें सजा से मुक्त कर दिया गया। न्यायालय से बरी होते ही नावाडीह के खरपीटो गांव पहुंचे और ढोल ढाक के साथ सहरिया गए।

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सहरिया के मुजावर को लेकर बरई आए और स्थानीय बरगद पेड़ के समीप इमामबाड़ा की स्थापना कर मुहर्रम करने की परंपरा की शुरुआत की, जो आज तक जारी है। लोगों ने बताया कि यहां लंबे समय तक सहरिया के, फिर पलामू दर्जी मौहल्ला के मुजावर असगर अंसारी तथा फिलहाल लहिया के मुजावर इबरास खान द्वारा यहां शीरनी फातिहा की जा रही है ।

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