बेंगाबाद : पंसस की मासिक बैठक आयोजित, वनों की कटाई पर जताई गई नाराजगी

NewsCode Jharkhand | 2 May, 2018 7:26 PM
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बैठक में शामिल नहीं होने वालों पर शो-कॉज प्रस्ताव पारित  

बेंगाबाद (गिरिडीह)। बेंगाबाद प्रखण्ड मुख्यालय स्थित किसान भवन में बुधवार को पंचायत समिति की मासिक बैठक सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रखण्ड प्रमुख रामप्रसाद यादव ने किया।

बैठक में विभिन्न विभागों की विषयवार समीक्षा की गई और अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों से जानकारी तलब की गई। बैठक में पंसस सदस्यों ने वनों की कटाई,  वन भूमि पर अतिक्रमण आदि का मुद्दा उठाया गया।  वहीं अंधाधुंध  कटाई पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए अधिकारी से इस पर अविलंब रोक लगाने की मांग की।

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प्रमुख रामप्रसाद यादव ने रेंजर को वनों की हो रही कटाई की ओर ध्यान देते हुए इसके विरुद्ध कार्यवाई करने का निर्देश दिया। वहीं प्रमुख ने प्रखण्ड अंतर्गत चल रहे अन्य विकास योजनाओं से संबंधित पदाधिकारियों से जानकारी ली और सभी आवश्यक निर्देश दिया। बैठक में देर से आने वाले और बैठक में भाग नहीं लेने वाले पदाधिकारियों को शो-कॉज करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

इस बैठक में उप प्रमुख उपेंद्र कुमार, बी डी ओ कुमार अभिषेक सिंह, सी ओ शम्भू राम, रेंजर एस के रवी के अलावे अन्य विभागों के पदाधिकारीगण एवं प्रतिनिधि सहित, कई पंचायत समिति सदस्य मौजूद थे।

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लोहरदगा : जंगल छोड़ गांव में पहुंचे गजराज, ग्रामीणों में भय के साथ कौतूहल

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 5:37 PM
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लोहरदगा। पिछले एक सप्ताह से जंगली हाथियों का दल जिले के विभिन्‍न क्षेत्रों में विचरण कर रहा है जिससे ग्रामीणों के बीच भय का वातावरण बना हुआ है। भंडरा थाना क्षेत्र के कचमची महुआटोली में शुक्रवार की सुबह हाथियों का दल पहुँच गया है। इस दल में करीब 18 हाथी हैं जिनमें कई बच्‍चे भी शामिल हैं।

जंगली हाथियों से जहां स्थानीय लोग भयभीत हैं वहीं उन्‍हें अपने आसपास विचरते देख उनके मन में कौतूहल भी उत्‍पन्‍न हो रहा है। हाथियों के झुंड को देखने के लिए भीठा, भंडरा, कचमची, चट्टी, कोटा, नागजुआ सहित दर्जनों गांव के ग्रामीण कचमची महुआटोली पहुंच रहे हैं। वहीं हाथियों के झुंड के साथ सेल्फी लेने की युवाओं में होड़ लगी है। भंडरा थाना की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को वहाँ से हटा दिया ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

इधर हाथियों के झुंड ने कई किसानों के खेत मे लगे मक्का व धान की फसल को क्षति पहुंचाई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद भी, अभी तक वन विभाग की ओर से हाथियों को जंगल की ओर ले जाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

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गावां : कागजों पर ही सीमित रहा कानून, बगैर लैब, लाइब्रेरी और शिक्षक के पढ़ रहे छात्र

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 5:47 PM
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गावां (गिरिडीह)। राज्य सरकार ने पिछले कुछ सालों के भीतर प्राइमरी-मिडिल स्कूलों का उत्क्रमित कर उन्हें हाई और हाई स्कूलों को उपग्रेड कर हायर सेकंडरी में तब्दील कर के सिर्फ वाहवाही लूटी है।

स्कूलों को अपग्रेड कर सरकार ने कागजी तौर पर सूबे में उच्च शिक्षा के नाम पर जनता को बेवकूफ बनाया है। कागजी रिकॉर्ड में सरकार ने हर पांच किमी के दायरे में हाई स्कूल की व्यवस्था कर दी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

स्कूलों के अपग्रेड होने के वर्षो बाद भी आज तक हाई और हायर सेकंडरी के लिए ना तो भवन बनाया और न ही लैब और लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं कई स्कूलों में तो अब तक एक भी शिक्षक की नियुक्ती नही की गई है।

ऐसे में प्राईमरी और मीडिल स्कूल के शिक्षकों के भरोसे ही हाई और सेकंडरी स्कूलों के बच्चों के भविष्य का जिम्मा है।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत गावां प्रखंड के छह प्राईमरी-मीडिल स्कूल को अपग्रेड कर हाई स्कूल में और दो हाई स्कूल को अपग्रेड कर हायर सेकंडरी में तब्दिल किया गया है। परंतु अपग्रेशन के चार-पांच वर्ष बाद भी अब तक इन न्यू अपग्रेड हायर सेकंडरी स्कूलों में ना तो भवन, ना ही लाइब्रेरी और ना लैब की व्यवस्था की गई है।

इतना ही नहीं गावां के नौ हाई स्कूल और दो प्लस टू स्कूल में से पांच हाई स्कूल और एक प्लस टू स्कूल शिक्षक विहीन है। ऐसे में प्रखंड की माध्यमिक शिक्षा की बदतर व्यवस्था का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

प्रखंड के नौ हाई स्कूलों में उत्क्रमित हाई स्कूल जमडार को छोड़कर बाकी के आठ हाई स्कूल और दो प्लस टू स्कूल में ना तो लैब और ना ही लाईब्रेरी की मुक्कमल व्यवस्था।

बगैर लैब के इन स्कूलों में अध्ययनरत्त नौवीं से बारहवीं के साईंस के छात्र-छात्राओं को कैसी शिक्षा मिल रही है इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। जबकि आलाधिकारी यहां के स्कूलों के संसाधनों से वाकिफ है।

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UGC का फरमान- 29 सितंबर को यूनिवर्सिटी मनाएं ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’, कांग्रेस ने की आलोचना

NewsCode | 21 September, 2018 5:34 PM
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नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को 29 सितंबर को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ के तौर पर मनाने का आदेश दिया है। UGC ने सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने के लिए सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में पूर्व सैनिकों से संवाद सत्र, विशेष परेड, प्रदर्शनियों का आयोजन और सशस्त्र बलों को अपना समर्थन देने के लिए उन्हें ग्रीटिंग कार्ड भेजने समेत अन्य गतिविधियां आयोजित करने का सुझाव भी दिया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आयोग ने सभी कुलपतियों को गुरुवार को भेजे एक लेटर में कहा, ‘सभी विश्वविद्यालयों की एनसीसी की इकाइयों को 29 सितंबर को विशेष परेड का आयोजन करना चाहिए जिसके बाद एनसीसी के कमांडर सरहद की रक्षा के तौर-तरीकों के बारे में उन्हें संबोधित करें।’

यूजीसी ने कहा कि विश्वविद्यालय सशस्त्र बलों के बलिदान के बारे में छात्रों को संवेदनशील करने के लिए पूर्व सैनिकों को शामिल करके संवाद सत्र का आयोजन कर सकते हैं।

पत्र में कहा गया है, ‘इंडिया गेट के पास 29 सितंबर को एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह की प्रदर्शनियों का आयोजन राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, अहम शहरों, समूचे देश की छावनियों में किया जा सकता है। इन संस्थानों को छात्रों को प्रेरित करना चाहिए और संकाय सदस्यों को इन प्रदर्शनियों में जाना चाहिए।’

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने की आलोचना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने ट्विटर पर यूजीसी के इस निर्णय की आलोचना की है। उन्होंने लिखा है, ‘यूजीसी ने सभी यूनिवर्सिटीज को 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे के रूप में मनाने का आदेश दिया है। यह लोगों को शिक्षित करने के लिए बना है या बीजेपी के राजनीतिक हित साधने के लिए? क्या यूजीसी 8 नवंबर (नोटबंदी) को गरीबों का निवाला छीनने के सर्जिकल स्ट्राइक दिवस के रूप में मनाने की हिम्मत कर पाएगा? यह एक और जुमला है!

वहीं, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि यूनिवर्सिटीज सर्जिकल स्ट्राइक दिवस को मनाने के लिए बाध्य नहीं हैं। जावड़ेकर ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक को समर्पित इस कार्यक्रम को मनाने का सुझाव हमें कई शिक्षकों और विद्यार्थियों से मिला था, इसलिए हमने इसके आयोजन का फैसला किया है।

गौरतलब है कि भारत ने 29 सितंबर 2016 को PoK में नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादियों के सात अड्डों पर लक्षित कर हमले किए थे। सेना ने कहा था कि विशेष बलों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठ की तैयारी में जुटे आतंकवादियों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भारत के उरी कैंप पर हमला किया और भारत के 19 जवान शहीद हुए थे। उरी हमले के करीब दस दिन बाद 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तहस-नहस कर दिया था।


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