बड़कागांव : अनवर जीते जी नहीं कर सका वतन वापसी, परिजन कर रहे शव का इंतजार

NewsCode Jharkhand | 9 July, 2018 12:19 PM
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बड़कागांव (हजारीबाग) । बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत पंचायत बलिया के निवासी अनवर मलिक पिता निजामुद्दीन मलिक, ग्राम चोबदार बलिया थाना बड़कागांव जिला हजारीबाग झारखंड का स्थाई निवासी था जो भारत जीते जी नहीं पहुंच सका । अब शव के आने का इंतजार किया जा रहा है । अरबी कंपनी आरबीसी बल में  अनवर मलिक  रोजी-रोटी की जुगाड़ में अपने देश की सरहद पार गया था।

हजारीबाग के अनवर के परिजनों एवं उसके भाई कामिल से पूछे जाने पर बताया कि मेरे भाई अनवर कुवैत में मुसीबत में फंसे हुए हैं। हालांकि अनवर को माइग्रेन की बीमारी थी यह सूचना उसके भाई कलीम ने खुद  बताया था।  अनवर मलिक वतन वापसी के लिए लंबे समय से कोशिश कर रहा था ।  इससे पहले कि उसकी कोई मदद कर पाता और वह वतन वापस लौट पाता उसके पहले हीं उसकी मौत कुवैत में होने की खबर आ गई।

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उसे काम पर रखने वाले कंपनी का कहना है कि अनवर ने आत्महत्या कर ली है । अनवर के परिजन मामले की जांच की गुहार लगा रहे हैं । वहीं दूसरी ओर मौत के बाद लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अनवर का शव बड़कागांव प्रखंड के बलिया पंचायत नहीं पहुंच सका है । 2 जुलाई सोमवार को उसकी मौत की सूचना घर परिवार के परिजनों को दी गई थी । कंपनी ने बताया है कि अनवर ने फांसी लगाकर जान दे दी है। कंपनी पर उसे जबरन रोकने और प्रताड़ित करने का आरोप था। हालांकि अनवर के भाई कामिल ने उसकी आत्महत्या को लेकर संदेह जताया है। पूरी घटना की जांच की मांग की गई  है।

बड़कागांव प्रखंड के अनवर ने कुवैत से बाहर आने की काफी कोशिश की थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से लेकर कई मिडिया के लोगों को इसकी जानकारी दी थी। अपने ड्यूटी अकाउंट से अपने पासपोर्ट नंबर का उल्लेख करते हुए उसने ड्यूटी किया था कि वह कुवैत में अरबी कंपनी डब्ल्यूएलएल में काम कर रहा है और काफी मुसीबत में है और भारत लौटना चाहता है लेकिन अरबी कंपनी  भारत आने नहीं दे रही है। अपनी दूसरी ड्यूटी में भी उसने मदद की गुहार लगाई थी।

अपने दूसरी ड्यूटी में उसने एक अन्य साथी मोहब्बत अमजद का जिक्र करते हुए बताया कि कंपनी के द्वारा कचरा फेंकने का काम दिया गया है जबकि वह एसी एवर कंडीशनर की रिपेयरिंग के काम के लिए यहां आया था साथ हीं उसे खाना भी नहीं दिया जा रहा था। इस तरह की समस्याओं से परेशान होकर विदेश मंत्री से भारत आने के लिए मदद की गुहार लगाई थी । कंपनी से भी अपने-अपने तबीयत खराब होने की बात बता कर एक बार भारत भेजने की गुहार लगाई थी। हलांकि मदद देने से पूर्व उसकी मौत की सूचना परिजनों को आ पहुंची थी।

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झरिया : धमाका, फायरिंग और मारपीट से क्षेत्र में दहशत, शादी समारोह घर में भी मचा कोहराम

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 11:29 AM
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झरिया (धनबाद) । भौरा थाना क्षेत्र के भौरा नीचे बाजार व ऊपर बाजार में बीती रात हथियारबंद लोगों ने हमला बोल दिया। दर्जनो राउंड फायरिंग की तथा कई घरों पर देसी व पेट्रोल बम फेंके गए। आधा दर्जन लोग घायल हो गए हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं।

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आरोपी न्यू क्वार्टर के रहने वाले हैं वह 70 – 80 के संख्या में थे। आरोपियों ने भौरा पुलिस के वाहन पर भी पथराव किया। पुलिस को भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी। हमलावर करीब आधे घंटे तक उत्पात मचाते रहे। मामले की गंभीरता को देख भौरा पुलिस ने जोड़ापोखर, पाथरडीह, सुदामडीह, सहित कई थानों की पुलिस को घटनास्थल पर बुलवा लिया और कई अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए।

हमलावर भौरा बाजार निवासी बालेश्वर उर्फ वाले यादव के शादी वाले घर में घुस गए और महिलाओं के साथ मारपीट दुर्व्यवहार तथा लूटपाट की। दूल्हे नीरज कुमार यादव की चेन और अंगूठी भी लूट ली और दूल्हे के साथ भी मारपीट की । इस दौरान एक महिला की कान की बाली भी खिंच डाली। इस घर से मंगलवार को बारात जानी है। नीरज यादव स्वर्गीय रंजीत यादव का पुत्र हैं।

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हॉकी, स्टिक, डंडे से पिटाई में बालेश्वर यादव, चंद्रवती देवी,शांति देवी बबली देवी, रीना देवी आदि घायल हो गए। सभी घायलों को भौरा अस्पताल लाया गया गंभीर स्थिति को देख चिकित्सकों ने उन्हें पीएमसीएच रेफर कर दिया है। घटना के पीछे आपसी रंजिश बताई जाती है।

हमलावरों ने दुकानों पर भी हमला कर दिया और तोड़फोड़ किया। जिसको लेकर दुकानदारों में भारी रोष है और आज बाजार के सारे दुकानदार अपने-अपने दुकान बंद कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं।

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चाईबासा : जगन्नाथपुर जिला परिषद सदस्य भाजपा छोड़ थामा झामुमों का दामन

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 11:26 AM
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चाईबासा । जैसे जैसे चुनाव नजदीक पहुंच रही है , वैसे वैसे जोड़ तोड़ की राजनीति भी तूल पकड़ने लगी है। जहां कुछ लोग पार्टी की विचार धारा पच नहीं रही है , तो कई पार्टी की वरीय पदाधिकारियों की उपेक्षा। इस राजनीतिक घटना क्रम से साफ पता चलता है कि आने वाली कल की राजनीति में बड़ा उलट फेर होने इंकार नहीं किया जा सकता है।

 पश्चिमी सिंहभूम भाजपा जिला अध्यक्ष शुरु नंदी के कार्यशैली व रैवया से पार्टी के वरीय पदाधिकारी व युवा कार्यकर्ता खुश नहीं है। अब तक कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ अन्य पार्टी का दामन थाम चुके है ।

चाईबासा : विभागीय लापरवाही में फिर गयी एक ठेका बिजली मिस्त्री की जान

सोमवार को जगन्नाथपुर जिला परिषद सदस्य व भाजपा युवा नेता अभिशेख सिंकु उर्फ मुन्ना के नेतृत्व में दर्जनों भाजपा कार्यकर्ता सहित जभासपा , कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने झामुमो सुप्रीमो शिबु सोरेन के समक्ष उनके आवास में विधिवत रुप से शामिल हो गए।

चाईबासा : जगन्नाथपुर जिला परिषद सदस्य भाजपा छोड़ थामा झामुमों का दामन

जिप सदस्य श्री सिंकु ने बताया कि भाजपा अपनी विचार धारा से भटक गई है।  यह सिर्फ अमित शाह व रघुवर दास की विचार धारा की पार्टी रह गई है । झारखंङ के विकास के नाम पर विनाश करने का काम किया जा रहा है। जो आने वाले समय में भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।

ये हुए भाजपा छोड़ झामुमों में शामिल

अभिशेक सिंकु — जिप सदस्य सह भाजपा नेता

संजय बारिक —  उप प्रमुख सह भाजपा नेता

हरिश हेंब्रम – भाजपा नेता

उमेश गोप – करंजिया पंचायत प्रभारी

बलदेव लागुरी – पोखरपी पंचायत अध्यक्ष

जयपाल लागुरी – पंचायत प्रभारी पोखरपी

 जभासपा मार्शल लागुरी

 सिकंदर तिरिया

रमेश सिंकु

विपिन सिंकु

मुखिया कृष्णा लागुरी

 मुखिया दमयंती लागुरी

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गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- केंद्र और राज्य सरकारें बनाएं कानून

NewsCode | 17 July, 2018 11:22 AM
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नई दिल्ली। गोरक्षकों द्वारा हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाएं रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए है। कोर्ट ने चार हफ्ते में केंद्र और राज्यों को लागू करने के आदेश दिए है। कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर कोई भी शख्स कानून को हाथ में नहीं ले सकता है।

केंद्र और राज्य सरकार को गाइडलाइन जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के लिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

अदालत ने कहा कि सरकारें हिंसा की इजाजत नहीं दे सकती हैं। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. एस. नरसिम्हा ने कहा था कि केंद्र सरकार इस मामले में सजग और सतर्क है, लेकिन मुख्य समस्या कानून व्यवस्था की है। कानून व्यवस्था पर नियंत्रण रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। केंद्र इसमें तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक कि राज्य खुद गुहार ना लगाएं।

बता दें कि गोरक्षा के नाम पर हो रही भीड़ की हिंसा पर रोक लगाने के संबंध में दिशानिर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह इस तरह से हो रही भीड़ की हिंसा को रोकें।

गोरक्षा के नाम पर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मॉबोक्रेसी’ को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, और इसे नया नियम नहीं बनने दिया जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक, इससे कड़ाई से निपटना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं के सिलसिले में प्रिवेंटिव, रेमिडियल और प्यूनिटिव दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि संसद को इसके लिए कानून बनाना चाहिए, जिसमें भीड़ द्वारा हत्या के लिए सज़ा का प्रावधान हो। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट अगस्त में करेगा।

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याचिकाकर्ता इंदिरा जयसिह ने कहा कि भारत में अपराधियों के लिए गोरक्षा के नाम पर हत्या करना गर्व की बात बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है और उन्हें जीवन की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारें इस तरह के अपराध करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने में भी विफल रही हैं। इसलिए वक्त की मांग है कि इस बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

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