बकरीद में क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी, जानें पूरी कहानी

NewsCode | 1 September, 2017 12:58 PM
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इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12 वें महीने ‘धू-अल-हिज्जा’ के दसवें दिन ईद-उल-जुहा मनाई जाती है। मजहब-ए-इस्लाम में 5 फर्ज माने गए हैं, जिनमें से हज को आखिरी फर्ज माना गया है। मान्यता है कि हर मुसलमान को जीवन में एक बार हज जाना जरूरी है। इस्लाम में ईद का काफी महत्व है। हर साल 2 ईद मनाई जाती है। एक ईद-उल-फ़ितर और दूसरी ईद-उल-जुहा या बकरीद।

भारत में इस दफ़े 2 सितंबर को ईद-उल-जुहा मनाई जायेगी। हज पूरी होने की ख़ुशी में ही ईद-उल-जुहा का पर्व मनाया जाता है। इसे कुर्बानी का पर्व भी कहते हैं। बकरीद के दिन अपनी सबसे प्यारी चीज की अल्लाह को कुर्बानी देनी होती है।

इस दिन बकरे, भैंस, या कुछ जगहों पर ऊँट की भी कुर्बानी दी जाती है। जिस प्रकार से भारत में हिंदुओं के लिए दिवाली का, सिखों के लिए परकाश पूरब का और ईसाईयों के लिए क्रिसमस का महत्व है, ठीक वैसे ही मुस्लिमों के लिए बकरीद भी महत्वपूर्ण है। रमजान के पाक महीने के खत्म होने के लगभग 70 दिन बाद बकरीद मनाया जाता है।

भारत में अधिकांश जगहों पर मुस्लिम समुदाय के लोग बकरों की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के लिए बकरे को पाला -पोसा जाता है और उसे अच्छे से खिला-पिलाकर हृष्ट-पुष्ट बनाया जाता है। इसके बाद बकरीद के दिन अल्लाह के लिए उसकी कुर्बानी दे दी जाती है। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा कुर्बानी करने वाले अपने घर में रखते हैं और दो हिस्से बाँट देते हैं। बकरीद की नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी दी जाती है। ये कुर्बानी तीन दिन तक दी जा सकती है।

क्या है कहानी ?

हजरत इब्राहिम अपने बेटे हजरत इस्माइल को आज ही के दिन खुदा के लिए क़ुर्बान करने जा रहे थे। वे अपने बेटे को ऐसी हालत में देख नहीं पा रहे थे। इसलिए उन्होंने कुर्बानी के वक्त अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली। खुदा की मर्जी मुताबिक जैसे ही उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी दी, उनके बेटे की जगह एक जानवर आ गया। उन्होंने पट्टी खोली तो बेटा पूर्ववत था, बिल्कुल सुरक्षित। अल्लाहताला उनकी भावना से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने उनके पुत्र को जीवनदान दे दिया। तब से इस घटना की याद में ये त्यौहार मनाने की परंपरा का प्रारंभ हुआ।

जमशेदपुर : मोहलीशोल में तांत्रिक देंगे परीक्षा, सांपों के डंसने से नहीं जाएगी जान!

NewsCode Jharkhand | 20 August, 2018 8:32 PM
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जमशेदपुर। आज के इस डिजिटल युग में क्‍या इस बात पर विश्‍वास करना संभव है कि कोई तांत्रिक, उस व्‍यक्ति को ठीक कर सकता है जिसे किसी जहरीले सांप ने 12 घंटे पहले डंसा हो ? पूर्वी सिंहभूम जिले के मोहलीशोल गांव के तांत्रिकों का दावा तो कुछ ऐसा ही है जिस पर सहसा विश्‍वास नहीं होता ! फिर भी आस्था, यहां विज्ञान पर भारी साबित होती है। कोल्हान और बंगाल के कुछ इलाकों में मनसा पूजा की धूम है। मनसा देवी को, सांपों की देवी  के रूप में पूजा जाता है। आम मान्‍यता है कि मनसा माता की पूजा करने वाले के परिजनों को सांप नहीं डंसते हैं। इस पर्व के मौके पर झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल अंतर्गत मोहलीशोल गांव में तांत्रिक तैयार किए जाने की परंपरा विगत सौ सालों से चली आ रही है।

जमशेदपुर : मोहलीशोल में तांत्रिक देंगे परीक्षा, सांपों के डंसने से नहीं जाएगी जान!

मनसा पूजा के दौरान यहां सिद्धी प्राप्‍त करने वाले तांत्रिक, जहरीले सांपों से खुद को डंसवाकर ये साबित करते हैं कि उनपर किसी भी जहरीले सांप का असर नहीं होता। इस वर्ष मनसा पूजा के दौरान लगभग दस तांत्रिक अपनी परीक्षा देंगे। इन जहरीले सांपों को देखकर ही कितनों के मुंह से चीख निकल सकती है लेकिन ये तांत्रिक उन्‍हीं सांपों को गले में लपेटे काफी सहज दिखाई देते हैं।

जमशेदपुर : मोहलीशोल में तांत्रिक देंगे परीक्षा, सांपों के डंसने से नहीं जाएगी जान!

बताया जाता है कि यहां से तैयार तांत्रिक, किसी भी सांप के जहर को उतारने में माहिर होते हैं। यहां के तांत्रिकों के अनुसार उनके पास झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिसा से भी लोग आते हैं, जिनका उपचार वे जड़ी-बूटी और तंत्र- मंत्र से करते हैं। ये तांत्रिक, ये दावा करने से भी नहीं चूकते हैं कि जहरीले सांप के डंसने के 12 घंटे के भीतर, यदि पीड़ित को उनके पास ले आया जाए, तो वे उसे मरने नहीं देंगे।

मां मनसा के प्रति यहां के लोगों की आस्‍था बहुत ही गहरी है। परंतु शायद यहां के तांत्रिकों को ये जानकारी नहीं है कि निरीह सांपों को पकड़ कर रखना, वन्‍य जीव कानून का उल्‍लंघन है। झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र जैसे अंधविश्‍वास की बात इस आधुनिक युग में करना, कहीं से भी तार्किक नहीं है। परंपराएं अपनी जगह पर ठीक हैं लेकिन उनका कोई वैज्ञानिक और तार्किक आधार भी होना चाहिए।

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धनबाद : भाजयुमो ने बाढ़ प्रभावितों के लिए मांगी सहायता

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