बाबरी विध्वंस की 25वीं बरसी : अयोध्या रही शांत और रहेगी

NewsCode | 6 December, 2017 7:55 PM

अयोध्या में बाबरी विध्वंस के 25 साल गुजर चुके हैं, इस बीच सूबे की सरकारें बदलती रहीं, सियासी चालें चली जाती रहीं, लेकिन अयोध्या पहले भी शांत थी और आज भी शांत है।

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अयोध्या| उत्तर प्रदेश में लंबे अर्से के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनी है। इससे पहले, सपा और बसपा के शासनकाल में कोई मुख्यमंत्री अयोध्या नहीं गया। लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी 8 महीने में ही पांच बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं। इससे यह तो अंदाजा लगता ही है कि अयोध्या सरकार के राजनीतिक एजेंडे में शामिल है।

अयोध्या में बाबरी विध्वंस के 25 साल गुजर चुके हैं, इस बीच सूबे की सरकारें बदलती रहीं, सियासी चालें चली जाती रहीं, लेकिन अयोध्या पहले भी शांत थी और आज भी शांत है। यहां के लोगों का मिजाज सरकारें भी नहीं बदल पाईं।

अयोध्या की पहचान बाहर ‘राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद’ से ही होती है। लेकिन अयोध्या के पास इन दोनों के इतर और भी बहुत कुछ है कहने को। अयोध्यावासी अब इस विवाद को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं।

बाबरी मुद्दे के मुद्दई इकबाल अंसारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “जब छह दिसंबर आता है तो नेता सक्रिय हो जाते हैं और फिर इसके बाद मुद्दे पर सभी चुप्पी साध लेते हैं। अब इस मामले में फैसला हो ही जाना चाहिए। लोग राजनीति करने के लिए इस मुद्दे को हल होने नहीं देना चाहते।”

यह पूछने पर कि सर्वोच्च न्यायालय में शुरू हुई सुनवाई के बाद आपको क्या लगता है कि इस मुद्दे का हल हो जाएगा, इस पर उन्होंने कहा कि लोग इस मामले को निपटाना नहीं चाहते हैं। हकीकत यह है कि कोई नहीं चाहता कि अब यह मामला और आगे बढ़े। बहुत सारे दूसरे काम भी हैं। महज माहौल बनाने के लिए बीच-बीच में शिगूफा छोड़ दिया जाता है। 

यहां के मंदिर-मस्जिद को लेकर दूसरे शहरों में तनाव दिखता है, लेकिन अयोध्या की बुनावट ऐसी है कि यहां दोनों समुदायों में कभी कोई तनाव नहीं रहा। विवादों के कारण अयोध्या नगरी की सूरत तो बदली, लेकिन इसका मिजाज नहीं बदला है। छह दिसंबर, 1992 के बाद बढ़े सुरक्षा इंतजामों से यहां के लोग परेशान जरूर हैं।

राम जन्मभूमि के आसपास के चौराहे आबाद होकर अब बाजार में तब्दील हो गए हैं। हनुमानगढ़ी से राम जन्मभूमि दर्शन मार्ग पर नई बाजार व राम गुलेला बाजार प्रमुख हैं। हनुमान गढ़ी और उसके आसपास की सड़कों पर दोनों तरफ दुकानें हैं।

चूड़ियों की दुकानें, सिंदूर और चंदन की दुकानें, मूर्तियों की दुकानें, धार्मिक साहित्य की दुकानें, पूजन सामग्री की दुकानें हैं। अयोध्या की ख्याति भले ही हिंदू तीर्थस्थल की है, लेकिन मंदिरों में हर जाति के महंत हैं, तो सड़कों पर हर जाति व धर्म के दुकानदार अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। 

निर्मोही अखाड़े के महंत दीनेंद्र दास कहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बनना सभी लोगों का सपना है, लेकिन इसका राजनीति के लिए इस्तेमाल किया गया है। यहां की आम जनता चाहती है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान निकल जाए और राम की अयोध्या में भी विकास हो।

उन्होंने कहा कि योगी सरकार बनने के बाद यहां के विकास की आस जगी है। अयोध्या को नगर निगम वाले शहर का दर्जा मिल गया है, लेकिन यहां के हालात बदलने में अभी समय लगेगा।

इस बीच, हनुमान गढ़ी से आप राम जन्मभूमि की ओर चलेंगे तो खंडहरों और उजड़े मंदिरों की उदासी बढ़ जाती है। राम जन्मभूमि के आसपास कड़ी सैनिक सुरक्षा है। वहां विराजमान रामलला की सुरक्षा के लिए तीन अलग-अलग घेरे बनाए गए हैं। सीआरपीएफ की इस पर हर समय पैनी नजर रहती है।

यहां एक समय में पांच कंपनी सीआरपीफ के जवान व एक महिला कंपनी तैनात रहती है। आठ-आठ घंटे की ड्यूटी के लिहाज से यहां अर्धसैनिक बलों की 12 कंपनियां तैनात हैं। खुफिया कर्मियों की नजरें हर दर्शनार्थी पर टिकी रहती हैं।

राम जन्मभूमि के दर्शन मार्ग पर चाय बेचने वाले अशोक सैनी कहते हैं कि रात में यदि कोई बीमार हो जाए, तो उसे अस्पताल ले जाने की कोई व्यवस्था ही नहीं है। सुरक्षा के कारणों से बाहर से गाड़ियां नहीं आ सकतीं। 

इसके साथ ही रामलला की व्यक्तिगत सुरक्षा में भी कमांडो तैनात हैं। पूरे 70 एकड़ के अधिग्रहीत परिसर में 13 वाच टावर एवं दो दर्जन के करीब मोर्चे हैं। दो बुलेटप्रूफ कारें भी मौजूद हैं।

इन क्षेत्रों में 14 कंपनी पीएसी के अलावा करीब सिविल पुलिस के डेढ़ हजार जवान तैनात हैं। पूरे रेड जोन में 44 सीसीटीवी कैमरे हैं। येलो जोन में भी 64 सीसीटीवी एवं आटो डोम कैमरे लगाए जा रहे हैं। सुरक्षा बढ़ने के बाद बढ़ी बंदिशों के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। राम जन्मभूमि आने वाले हर रास्ते पर बैरिकेडिंग है।

राम जन्मभूमि के करीब जलपान की दुकान चलाने वाले हरिराम सिंह यादव कहते हैं, “बाजार तो गुलजार हुए हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अब भी अभाव है। रोडवेज बस अड्डा समाप्त हो जाने के कारण दिक्कत है। दर्शनार्थियों के लिए और सुविधाएं जुटाई जानी चाहिए। मेलों के दौरान कतार में लगे दर्शनार्थियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।”

हनुमान गढ़ी में चूड़ी बेचने वाले कमाल अंसारी कहते हैं, “अयोध्या हमारी जन्मभूमि है, हम यहीं पैदा हुए, यहीं बड़े हुए, यहीं पर रोजी-रोटी चलती है, हमें तो आज तक कोई परेशानी नहीं है। हमें नहीं पता कि यर्ह हिंदू मुसलमान झगड़ा किसने पैदा किया। यह करने वाले अयोध्या के लोग नहीं हैं। अयोध्या हमेशा शांत थी और रहेगी।”

आईएएनएस

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, संवैधानिक रूप से आधार वैध है

NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 12:33 PM
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लेकिन बैंक और मोबाइल से लिंक करना जरूरी नहीं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला लिया। केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है, लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार को बैंकों और मोबाइल से लिंक करना जरूरी नहीं है। स्कूलों में दाखिले के लिए भी आधार जरूरी नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनोखा होना बेहतर है। न्यायमूर्ति ए के सीकरी ने प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और अपनी ओर से फैसला सुनाते हुये कहा कि आधार के खिलाफ याचिकाकर्ताओं के आरोप संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर आधारित है, जिनके कारण राष्ट्र शासकीय निगरानी वाले राज्य में बदल जायेगा।

न्यायालय ने कहा कि आधार के लिए यूआईडीएआई ने न्यूनतम जनांकीकीय और बायोमेट्रिक आंकड़े एकत्र किये है। पीठ ने कहा कि आधार समाज के वंचित तबके को सशक्त बनाता है और उन्हें पहचान देता है। न्यायमूर्ति सीकरी ने फैसले में कहा, डुप्लीकेट आधार कार्ड प्राप्त करने की कोई संभावना नहीं है।

उन्होंने कहा कि फैसले में मानव सम्मान के विचार को विस्तार दिया गया है। न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा कि आधार योजना के सत्यापन के लिए पर्याप्त रक्षा प्रणाली है। जितनी जल्दी संभव हो आंकड़ों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र बनाया जाये। पीठ ने निजी कंपनियों को आधार के आंकड़े एकत्र करने की अनुमति देने वाले आधार कानून के प्रावधान 57 को रद्द कर दिया है।

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जमशेदपुर : छुुुुट्टी मांगी, न‍हीं मिली, गर्भावस्‍था के पांंचवें माह में ड्यूूटी करने को मजबूर सुरक्षाकर्मी

NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 3:58 PM
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एमजीएम अस्पताल की संवेदनहीनता

जमशेदपुर। जमशेदपुर का एमजीएम अस्पताल इन दिनों फिर से सुर्खियों में है। वैसे इस बार यह अस्पताल अलग ही तरह के कारनामों को लेकर सुर्खियों में है।

इस अस्पताल की लापरवाही की खबरें तो आम बात है, लेकिन इस बार इस अस्पताल में काम कर रही महिला सुरक्षाकर्मियों की क्या स्थिति है, यह बता रहे हैं।

किस तरह 8 महीने की गर्भवती महिला सुरक्षाकर्मी ड्यूटी करने को मजबूर है। ऐसा नहीं है कि उस महिला कर्मी ने छुट्टी के लिए गुहार नहीं लगाई थी।

इस महिला ने प्रेगनेंसी लीव का आवेदन दिया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन या होमगार्ड  के वरीय अधिकारी इस महिला के आवेदन को निरस्त करते हुए इतना ही कहा कि जब तुम्हें परेशानी होगी तो तुम्हें छुट्टी दे दी जाएगी।

ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही महिला ड्यूूटी करने को मजबूर

अब सवाल यह उठता है कि आखिर 8 महीने की गर्भवती महिला को क्या परेशानी नहीं हो रही होगी ?  क्या एमजीएम अस्पताल प्रबंधन और झारखंड सरकार का गृह रक्षा वाहिनी विभाग इतना संवेदनहीन हो गया है कि जो महिला अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही, उसे अस्पताल की सुरक्षा में लगा दिया गया।

वैसे यह कोई पहली महिला नहीं है, जो गर्भवती होने के बाद भी ड्यूटी बजा रही है, बल्कि इनकी जैसी और भी एक महिला सुरक्षाकर्मी यहां ड्यूटी पर तैनात है।

पांचवें माह से ही प्रेगनेंसी लीव दिए जाने का है प्रावधान

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकारी योजना जिसके तहत महिलाओं को पांचवें माह से ही प्रेगनेंसी लीव दिए जाने का प्रावधान है, उसका उल्‍लंघन हो रहा है। यदि महिला होमगार्ड की जवान के साथ कुछ अनहोनी हो जाए तो उसके लिए कौन जिम्मेवार होगा।

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NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 3:19 PM
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लोहरदगा। शहर के बड़ा तालाब, जामा मस्जिद आदि क्षेत्रों में नगर परिषद की ओर से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। अभियान में लोहरदगा सदर अंचलाधिकारी परमेश्वर कुशवाहा, सदर थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक शैलेश प्रसाद, नगर परिषद के सिटी मैनेजर आफताब आलम सहित कई अधिकारी और पुलिस बल के जवान मौजूद थे। अतिक्रमण अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। अतिक्रमण का दोषी पाए जाने पर, ऑन द स्‍पॉट कई दुकानदारों पर जुर्माना भी लगाया गया। नगर परिषद के इस अभियान से दुकानदारों में भी डर का माहौल देखा जा रहा है।

लोहरदगा : अतिक्रमण हटाओ अभियान से दुकानदारों में हड़कंप

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अतिक्रमण को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए जाने के बाद से नगर परिषद अतिक्रमण हटाने को लेकर अभियान चला रहा है। इस दौरान क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आने पर, अतिक्रमण हटाने को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले नगर परिषद ने कई बार दुकानदारों को चेतावनी देते हुए अतिक्रमण नहीं करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके अतिक्रमण होने की वजह से सड़कें संकरी हो गई थी और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही थी। जिसकी वजह से नगर परिषद और अंचल प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने को लेकर जोरदार अभियान चलाया।

लोहरदगा : टेबल-कुर्सी ही संभालते हैं कार्यालय, मत्स्य अधिकारी रहते हैं गायब 

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