मासूमों की चीख और आत्मा की कराह का नाम है ‘पा लो ना’

NewsCode | 11 December, 2016 5:46 AM
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रांची: भ्रूण हत्या और नवजात बच्चों की हत्या झारखण्ड की ही नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी समस्यों में से एक समस्या और ज्वलंत मुद्दा है। भ्रूण हत्या, नवजात बच्चों को जन्म के बाद भगवान भरोसे छोड़ देना, नवजात को नालियों और झाड़ियों में फेंक देने की मानसिकता आज भी नहीं बदली है। क्या बीतता होगा वैसे मासूमों पर जिसे दुनिया देखने से पहले हीं आखें बंद कर दी जाती हैं और जो अपनी किस्मत से धरती पर आ तो जाता है पर मां-बाप के रहते अनाथ कहलाते हैं। अगर वैसे लोग मिलें तो एक सवाल जरुर किया जा सकता है कि ऐसा करते वक्त उनके दिमाग में कौन सी बात चल रही होती है। ऐसे में इस हालात से निजात दिलाने के लिए साकारात्मक उद्देश्य के साथ रांची के आड्रे हाउस में तस्वीरों के माध्यम से दो दिवसीय चित्र प्रदर्शनी आयोजन किया गया है। इस मौके पर राज्य के ख्याति प्राप्त चित्रकारों ने अपनी कुचियों से उन नवजात के दर्द को उकेरने की कोशिश की है। वहीं सच्ची तस्वीरों के माध्यम से राज्य सहित पुरे देश को इस टूटते रिश्तों के दर्द को परिचित कराने और उसके समाधान को ढूंढने की शानदार कोशिश की गयी है।

ये तस्वीरें रुला देती हैं, ये तस्वीरें झकझोर देती हैं, आंखे भर आती हैं, अपने मानव होने के गर्व को शर्मशार कर देती हैं। 11 दिसंबर तक चलनेवाली प्रदर्शनी नवजात बच्चों को बचाने की कोशिशों पर आधारित ‘पा लो ना’ की ही तो हम बात कर रहे हैं जो कि सामाजिक कुरीतियों और संकीर्ण सोच पर एक तमाचा है। ममता का गला घोंटने के साथ-साथ बच्चों के हर उस दर्द को पिरोने की नायाब कोशिश किया है झारखण्ड के प्रख्यात चित्रकारों ने। आश्रयणी मीडिया की मुहिम, एस्पोवा और ज़िला कल्याण के सहयोग से आड्रे हाउस के कला दीर्घा में जागरूकता फैलाने के मकसद से चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, जिसका उद्घाटन संसदीय कार्यमंत्री सरयू राय, उपायुक्त मनोज कुमार, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर और एस्पोवा की अध्यक्षा पूनम पाण्डेय ने संयुक्त रूप से किया।

11 दिसंबर को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने भी आड्रे हाउस की ओर रुख किया और पहुंचे प्रदर्शनी को देखने के लिए। उन्होंने संवेदना जताते हुए कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है और इसकी जागरुकता के लिए यह एक बेहतर कदम है। साथ ही उन्होंने गहन चिंतन और अपनी कला को उभारकर सामने लाने वाले चित्रकारों को अपनी कला के माध्यम से समाज में फैली हुई इस मानसिकता को दूर करने का प्रयास किया है मुंडा ने धन्यवाद दिया। इस मानसिकता से लड़ने के लिए सभी को साथ मिलकर काम करने पर बल दिया।

रांची : रिटायर्ड जज एसके अग्निहोत्री आजसू में हुए शामिल, कहा- पार्टी को करेंगे मजबूत

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:22 PM
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रांची। आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो के आवास पर मिलन समारोह के मौके पर रिटायर्ड जज के साथ दूसरी अन्य पार्टी के सेकड़ों कार्यकर्ता मुखिया सहित आजसू पार्टी के विचार से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए।

इस मौके पर सुदेश महतो ने रिटायर जज के साथ कार्यकर्ताओं को माला पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। 2019 लोकसभा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए दूसरे पार्टी के कार्यकर्ता  अपनी जमीन तलाशने को लेकर आजसू पार्टी में शामिल होते नजर आ रहे हैं।

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आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा  पार्टी में शामिल हुए रिटायर्ड जज संतोष कुमार अग्निहोत्री का स्वागत करता हूँ।  आजसू पार्टी में शुभ संकेत है। पार्टी में इन्हें बड़ी जिम्मेवारी दी जाएगी। जिससे पार्टी मजबूत हो और जनता के बीच आजसू पार्टी की विचारधारा को पहुंचाया जाए। तीस सालों से न्याययिक सेवा करने के उपरांत इन्होंने समाजसेवा करने का जो फैसला लिये है। वो स्वागत योग्य है। जिनका समाज को जरूर लाभ मिलेगा।

रिटायर्ड जज संतोष कुमार अग्निहोत्री ने कहा कुछ महीनों से आजसू पार्टी को रीड कर रहा था इनकी विचारधारा को जानने की कोशिश कर रहा था जब मैं पूरी तरह से जान पाया तब मैंने  अंतिम फैसला लिया कि मैं आजसू पार्टी में रहकर समाज की सेवा करूंगा और पार्टी को मजबूत करने का काम करूंगा।

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झरिया : छेड़खानी का विरोध करने पर मारपीट, कई घायल

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:26 PM
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झरिया (धनबाद)। बहालगढ़ा में छेड़खानी का विरोध करने पर मारपीट हो गई जिससे कई लोग घायल हो गए। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार मुहल्ले में कुछ बाइक सवार युवक छेड़खानी किया। विरोध करने पर युवक घर में घुस गए और मारपीट करने लगे।

भुक्‍तभोगी ने स्‍थानीय थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

वहीं दूसरा मामला झरिया के कोयरीबांध का है जहां आपसी रंजिश में मारपीट होने से एक ऑटो ड्राईवर घायल हो गया। घायल ने मारपीट का आरोप एक स्‍थानीय दबंग वयक्ति के भाई पर लगाया है।

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रांची : तीन तलाक कानून से तीन साल सजा के प्रावधान को हटवायें केंद सरकार- आमया संगठन

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:17 PM
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रांची। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को बिना राज्यसभा से पारित कराये केन्द्रीय कैबिनेट और राष्ट्रपति के माध्यम से 20 सितंबर 2018 को अध्यादेश लाकर देश के 19 करोड़ मुसलमानों पर केन्द सरकार ने थोप दिया है। अध्यादेश में तीन तलाक को जघन्य अपराध मनाते हुए आईपीएस की धाराओं के तहत सजा देने का कानून बनाया गया है।

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कोई व्यक्ति एक साथ तीन तलाक बोलता है और उसकी पत्नी या परिवार के सदस्य पुलिस में शिकायत करते है तो तीन साल की सजा के साथ जेल हो जाएगा, जो कि असंवैधानिक है यह मामला सिविल कानून के तहत बननी चाहिए जिसमें ज्यादा से ज्यादा मुआवजा का प्रावधान रखा जाता।

वर्ष 2017 में  सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि तीन तलाक बोलने पर शादी नही टूटेगी, तो फिर किस आधार पर पति को तीन साल की जेल का प्रावधान रखा गया है पति के जेल जाने पर पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण कैसे होगा क्या पत्नी पति के खिलाफ मुकदमें लड़ेगी। अध्यादेश देखकर ऐसा लगता है कि सरकार को मुस्लिम महिलाओं के प्रति दर्द कम और वोट पाने की चाहत ज्यादा है।

केन्द्र सरकार को मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी है तो मॉब लिंचिंग में 100 से अधिक लोगों की हत्याएँ देश में  हुई है सिर्फ झारखंड में ही 27 लोग मारे गये है उनकी विधवाएं और मां बहनों को इंसाफ नही मिल रहा है और ना ही मुआवाजा मिले, अपराधी खुलेआम घुम रहे है दोषियों को अदालतों में जमानत मिल जा रही है।

सरकार के ही मंत्री फूल माला और मिठाई नौकरी देने की बात कर रहे है, इसपर सरकार मुकदर्शक बनी हुई है जबकि मॉब लिंचिंग पर 17 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने केन्द्र सरकार को कानून बनाने का आदेश दिया है साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिये है लेकिन केन्द्र सरकार ने मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने की पहल अबतक नही हुई।

हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और केन्द्र में विपक्षी दल के नेता और झारखंड के विपक्षी दल के नेता हेमंत सोरेन  से मांग करते है कि तीन तलाक़ कानून से तीन साल सजा के प्रावधान को हटवायें साथ ही धार्मिक संगठनों से मिलकर निकाहनामा फार्म में ही एक साथ तीन तलाक नही बोलने का नियम बनवाये।

यें बाते होटल केन मेन रोड रांची में आमया संगठन द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संगठन की सचिव पूर्व छात्र नेत्री नाजिया तब्बसुम ने कहीं, प्रेस कांफ्रेंस में मॉब लिंचिंग में मारे गरे अलीमुद्दीन अंसारी की विधवा मरियम खातून, नाजनीन बानों, शमा प्रवीण, रिजवाना बेगम, कमरून निशा, उबैद खातून, आलिया, रुखसार, नरगिस , गजाला, गुलफशां, फरिदा नुसरत, अमरीन सबा थी।

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